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Fitch: फिच ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को 'बीबीबी-' पर रखा बरकरार, मजबूत विकास और वित्तीय स्थिति को बताया कारण
Mon, 25 Aug 2025 02:10 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Mon, 25 Aug 2025 02:10 PM IST
सार
Fitch Rating: फिच रेटिंग्स ने सोमवार को भारत की सॉवरेन रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी-' पर बरकरार रखा और कहा कि वृद्धि दर में मजबूती और राजकोषीय विश्वसनीयता में सुधार से संरचनात्मक मानकों में सुधार आएगा। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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फिच रेटिंग्स की रिपोर्ट
- फोटो : एक्स
विस्तार
फिच रेटिंग्स ने सोमवार को भारत की सॉवरेन रेटिंग को स्थिर परिदृश्य के साथ 'बीबीबी-' पर बरकरार रखा और कहा कि वृद्धि दर में मजबूती और राजकोषीय विश्वसनीयता में सुधार से संरचनात्मक मानकों में सुधार आएगा। फिच ने कहा, "भारत की रेटिंग को उसके मजबूत विकास और ठोस बाहरी वित्त का समर्थन प्राप्त है।" फिच ने मार्च 2026 (वित्त वर्ष 26) में 6.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 25 से अपरिवर्तित है, और 2.5 प्रतिशत के 'बीबीबी' औसत से काफी ऊपर है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का आर्थिक परिदृश्य समकक्ष देशों की तुलना में मजबूत बना हुआ है, हालांकि पिछले दो वर्षों में इसकी गति धीमी हुई है। फिच ने कहा, "यदि प्रस्तावित वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) सुधार अपनाए जाते हैं, तो इससे उपभोग को बढ़ावा मिलेगा तथा विकास संबंधी कुछ जोखिम कम हो जाएंगे।"
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केंद्र ने जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाने पर गठित मंत्रिसमूह के समक्ष 'योग्यता' और 'मानक' वस्तुओं व सेवाओं के लिए 5 और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना, और लगभग 5-7 वस्तुओं के लिए 40 प्रतिशत की दर का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव में मौजूदा 12 और 28 प्रतिशत कर स्लैब को समाप्त करने का प्रावधान है।
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फिच ने एक बयान में कहा, "वृहद स्थिरता के साथ विकास प्रदान करने के मजबूत रिकॉर्ड और राजकोषीय विश्वसनीयता में सुधार से प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहित इसके संरचनात्मक मापदंडों में लगातार सुधार होगा, और इस बात की संभावना बढ़ेगी कि मध्यम अवधि में ऋण में मामूली गिरावट आ सकती है।"
हालांकि, फिच ने 'बीबीबी' समकक्षों की तुलना में उच्च घाटे और ऋण को देखते हुए राजकोषीय मैट्रिक्स को ऋण की कमजोरी के रूप में चिह्नित किया। फिच ने कहा, "शासन संकेतकों और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद सहित संरचनात्मक मानकों में पिछड़ने से भी रेटिंग पर असर पड़ता है।" 14 अगस्त को एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को स्थिर दृष्टिकोण के साथ 'बीबीबी-' से एक पायदान ऊपर उठाकर 'बीबीबी' कर दिया। इसके साथ ही, 18 वर्षों में पहली बार भारत की रेटिंग में सुधार किया गया।