FTA: वीजा विवाद के बीच भारत व ब्रिटेन के बीच एफटीए से उम्मीदें कम, ब्रिटिश गृहमंत्री ने जताया था एतराज
FTA: लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के थिंक टैंक में शामिल दक्षिण एशिया के सीनियर फेलो राहुल रॉय-चौधरी का मानना है कि अब ऐसा प्रतीत होता है कि लिज ट्रस सरकार के तहत संभावित यूके-भारत एफटीए उतना वास्तविक नहीं होगा और न ही उतना व्यापक होगा जितना कि पिछली बोरिस जॉनसन सरकार के दौरान परिकल्पित किया गया था।
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‘हम स्पष्ट हैं कि हम गति के लिए गुणवत्ता का त्याग नहीं करेंगे और केवल तभी हस्ताक्षर करेंगे जब हमारे सामने ऐसा समझौता होगा जो यूके के हितों को पूरा करता हो।’ वीजा विवाद के बीच भारत के साथ व्यापार समझौते (FTA) पर ये बातें ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता ने कही है।
यहां इस बात की आशंका बढ़ रही है कि प्रस्तावित भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जो वर्तमान में दीवाली की समय सीमा तक पूरी होनी थी और बातचीत के अपने अंतिम चरण में है, इसके पूरा होने में देरी होगी। ब्रिटेन के गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन की ओर से वीजा पर विवादास्पद टिप्पणियों के बीच यह परिस्थिति पैदा हुई है।
बता दें कि ब्रिटेन की गृह मंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने साप्ताहिक पत्रिका ‘द स्पेक्टेटर’ के साथ गुरुवार को एक साक्षात्कार में एक खुली सीमा प्रवास नीति के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि वह भारत को अधिक वीजा रियायतें प्रदान करने वाले व्यापार सौदे के लिए कैबिनेट का समर्थन नहीं करेंगी।
माना जा रहा है कि सुएला ब्रेवरमैन का यह रुख ब्रिटिश प्रधानमंत्री लिज ट्रस और उनके बीच संभावित टकराव में खड़ा करेगा जो अपने पूर्ववर्ती बोरिस जॉनसन की ओर से निर्धारित दिवाली की समय सीमा के भारत के साथ एफटीए चाहती हैं। जिसके लिए बातचीत फिलहाल आखिरी दौर में है।
ब्रिटिश साप्ताहिक पत्रिका को ब्रेवरमैन ने कहा है कि मैं भारत के साथ एक खुली सीमा प्रवास नीति के विषय पर चिंतित हूं क्योंकि मुझे नहीं लगता है कि ब्रिग्जिट के लिए वोट करने वाले ऐसा चाहते हैं।
भारत-यूके एफटीए के तहत छात्रों और उद्यमियों के लिए वीजा में रियायत मिलने के मसले पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा उन्होंने कहा, मुझे इसपर कुछ आपत्तियां हैं। इस ब्रिटेन में प्रवास (Migration) को देखें तो यहां ओवरस्टे करने वाले लोगों का जो सबसे बड़ा समूह है, वे भारतीय प्रवासी हैं।
लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईआईएसएस) के थिंक टैंक में शामिल दक्षिण एशिया के सीनियर फेलो राहुल रॉय-चौधरी का मानना है कि अब ऐसा प्रतीत होता है कि लिज ट्रस सरकार के तहत संभावित यूके-भारत एफटीए उतना वास्तविक नहीं होगा और न ही उतना व्यापक होगा जितना कि पिछली बोरिस जॉनसन सरकार के दौरान परिकल्पित किया गया था। उन्होंने कहा है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि गतिशीलता, प्रवासन और टैरिफ के प्रमुख मुद्दों पर बातचीत गैर-समयबद्ध दूसरा चरण में अभी और जारी रहने की उम्मीद है।
इस बीच ब्रिटिश सरकार के प्रवक्ता की ओर से यह कहा गया है कि यूके और भारत के बीच एक व्यापार समझौता हमारे पहले से ही 24.3 बिलियन GBP प्रति वर्ष है के व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों और क्षेत्रों को लाभ होगा। हम स्पष्ट हैं कि हम गति के लिए गुणवत्ता का त्याग नहीं करेंगे और केवल तभी हस्ताक्षर करेंगे जब हमारे पास कोई समझौता होगा जो यूके के हितों को पूरा करे।
इन मुद्दों पर फंस रहा पेंच
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर जारी बातचीत तय समय पर पूरी होने की राह में डेटा स्थानीयकरण और ब्रिटिश कंपनियों को भारत सरकार के ठेकों में बोली लगाने की मंजूरी देने जैसे मुद्दे बड़ी अड़चन के तौर पर सामने आए हैं। ब्रिटिश मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।