Trade Deficit: देश का व्यापार घाटा बढ़कर 173 अरब डॉलर हुआ, अक्टूबर में निर्यात पिछले वर्ष से 17% घटा
Import-Export of India: वहीं, अप्रैल से अक्टूबर 2022 के दौरान देश का निर्यात 12.55 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 263.35 बिलियन अमरीकी डॉलर दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार आयात 33.12 प्रतिशत बढ़कर 436.81 अरब डॉलर हो गया।
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वैश्विक मांग घटने से देश के निर्यात में अक्तूबर में 23 महीने बाद पहली बार गिरावट आई है। इस दौरान निर्यात सालाना आधार पर 16.65 फीसदी घटकर 29.78 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले नवंबर, 2020 में वस्तुओं एवं सेवाओं का निर्यात 8.74 फीसदी घटा था। अक्तूबर, 2021 में 35.73 अरब डॉलर का निर्यात हुआ था।
वाणिज्य मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान आयात 6 फीसदी बढ़कर 56.69 अरब डॉलर पहुंच गया। आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा 50.25 फीसदी बढ़कर 26.91 अरब डॉलर पहुंच गया। पिछले साल अक्तूबर में यह आंकड़ा 17.91 अरब डॉलर रहा था।
मंत्रालय ने कहा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद, बने कपड़े, रसायन, फार्मा व चमड़ा के नकारात्मक प्रदर्शन से निर्यात में गिरावट आई है। वहीं, कच्चे तेल, कपास, उर्वरक और मशीनरी जैसे कच्चे माल की अधिक मांग से आयात बढ़ा है। विशेषज्ञों ने कहा, आर्थिक वृद्धि के साथ घरेलू मांग बढ़ने से आयात बढ़ रहा है।
- 16.6 फीसदी घटकर 29.78 अरब डॉलर रह गया निर्यात
- 50.25 फीसदी बढ़कर 26.91 अरब डॉलर पहुंचा व्यापार घाटा
अप्रैल-अक्तूबर में निर्यात 13% बढ़ा
आंकड़ों के मुताबिक, 2022-23 की अप्रैल-अक्तूबर अवधि में देश का निर्यात 12.55 फीसदी बढ़कर 263.35 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान 436.81 अरब डॉलर का आयात किया गया, जो 2021-22 की समान अवधि के मुकाबले 33.12 फीसदी ज्यादा है। आयात बढ़ने से अप्रैल-अक्तूबर में व्यापार घाटा सालाना आधार पर 84.21 फीसदी बढ़कर 173.46 अरब डॉलर पहुंच गया। 2021-22 की समान अवधि में यह आंकड़ा 94.16 अरब डॉलर रहा था।
इन वस्तुओं का निर्यात घटा
| उत्पाद | कमी |
| रत्न-आभूषण | 21.56% |
| इंजीनियरिंग | 21.26% |
| पेट्रोलियम | 11.28% |
| बने कपड़े | 21.16% |
| रसायन | 16.44% |
| समुद्री | 10.83% |
| फार्मा | 9.24% |
| चमड़ा | 5.84% |
| उत्पाद | वृद्धि |
| कॉटन | 351.67% |
| खाद, क्रूड | 161.37% |
| न्यूजप्रिंट | 113.44% |
| आयरन-स्टील | 37.85% |
| कच्चा तेल | 29.10% |
| चमड़ा | 29.08% |
| यातायात उपकरण | 27.19% |
| लकड़ी | 22.21% |
निर्यातकों के संगठन फियो ने कहा, माल की कीमतों में वृद्धि, बढ़ती महंगाई, मंदी में प्रवेश करने वाली अर्थव्यवस्था, मुद्राओं में उच्च अस्थिरता व भू-राजनीतिक संकट के कारण मांग में कमी के बीच वस्तुओं के निर्यात में मंदी आई है।
वैश्विक हालातों ने बढ़ाई मुश्किल
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि वैश्विक स्तर पर विपरीत परिस्थितियां दुनियाभर में मांग को प्रभावित कर रही हैं। इसका भारत के निर्यात पर भी प्रभाव पड़ेगा। वैश्विक व्यापार (मर्चेंडाइज) में भारत की हिस्सेदारी 1.8% है, जबकि वैश्विक सेवाओं में यह 4 फीसदी है। इसे बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मुताबिक, वैश्विक व्यापार इस साल 3.5 फीसदी बढ़ सकता है, जबकि 2023 में इसकी वृद्धि दर घटकर महज एक फीसदी रह जाएगी।