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वैश्विक चुनौतियों से निपटने की तैयारी: सीतारमण बोलीं- सरकार ने बनाया एक लाख करोड़ का आर्थिक स्थिरीकरण फंड
Fri, 13 Mar 2026 04:22 PM IST
Nirmal Kant
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: Nirmal Kant
Updated Fri, 13 Mar 2026 04:22 PM IST
सार
पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष बनाया, जो भारत को वैश्विक चुनौतियों से पैदा होने वाले आर्थिक झटकों से निपटने में मदद करेगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.81 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च के लिए लोकसभा से अनुमति मांगी है। पढ़िए रिपोर्ट-
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण कोष (इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड) सरकार को वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय मदद देगा। लोकसभा में पूरक अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह फंड पश्चिम एशिया जैसी जगहों पर अचानक पैदा होने वाली समस्याओं से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले झटकों को संभालने में मदद करेगा।
उन्होंने कहा, एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण फंड भारत को वैश्विक परिस्थितियों से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए वित्तीय गुंजाइश देगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.81 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति लोकसभा से मांगी है। लेकिन सरकार को 80 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त आय भी मिलने की उम्मीद है। इसलिए इन दोनों को मिलाने के बाद सरकार को वास्तव में 2.01 लाख करोड़ रुपये ही अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) में राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमान (आरई) के भीतर ही रहेगा। 2025-26 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 फीसदी आंका गया है, जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है।
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ये भी पढ़ें: सरकार का दावा- देश में तेल और गैस का संकट नहीं, राज्यों को जमाखोरी पर सख्ती के निर्देश
सीतारमण ने कहा कि दूसरी पूरक मांगों के कारण 2025-26 के बजट अनुमान से अधिक खर्च नहीं बढ़ा है। इस दौरान विपक्ष के सदस्य एलपीजी की कमी के मुद्दे पर लगातार नारेबाजी करते रहे। चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में सरकार ने कुल खर्च को 50.65 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से घटाकर 49.65 लाख करोड़ रुपये कर दिया था।
लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी तक सरकार 36.90 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी। सरकार ने पूरक अनुदान मांगों में एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण फंड बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उर्वरक सब्सिडी के लिए 19,230 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए 23,641 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मांगी गई है। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय के लिए 41,822 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का भी प्रस्ताव रखा गया है। सीतारमण ने कहा कि किसानों के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी और अनुदानों की पूरक मांगों में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
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उन्होंने कहा, एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण फंड भारत को वैश्विक परिस्थितियों से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए वित्तीय गुंजाइश देगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में 2.81 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने की अनुमति लोकसभा से मांगी है। लेकिन सरकार को 80 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त आय भी मिलने की उम्मीद है। इसलिए इन दोनों को मिलाने के बाद सरकार को वास्तव में 2.01 लाख करोड़ रुपये ही अतिरिक्त खर्च करने पड़ेंगे।
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सीतारमण ने कहा कि चालू वित्त वर्ष (2025-26) में राजकोषीय घाटा संशोधित अनुमान (आरई) के भीतर ही रहेगा। 2025-26 के संशोधित अनुमान में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 फीसदी आंका गया है, जो 2025-26 के बजट अनुमान के बराबर है।
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सीतारमण ने कहा कि दूसरी पूरक मांगों के कारण 2025-26 के बजट अनुमान से अधिक खर्च नहीं बढ़ा है। इस दौरान विपक्ष के सदस्य एलपीजी की कमी के मुद्दे पर लगातार नारेबाजी करते रहे। चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में सरकार ने कुल खर्च को 50.65 लाख करोड़ रुपये के बजट अनुमान से घटाकर 49.65 लाख करोड़ रुपये कर दिया था।
लेखा महानियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी तक सरकार 36.90 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुकी थी। सरकार ने पूरक अनुदान मांगों में एक लाख करोड़ रुपये का आर्थिक स्थिरीकरण फंड बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसके अलावा, उर्वरक सब्सिडी के लिए 19,230 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के लिए 23,641 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मांगी गई है। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय के लिए 41,822 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च का भी प्रस्ताव रखा गया है। सीतारमण ने कहा कि किसानों के लिए उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी और अनुदानों की पूरक मांगों में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किया गया है।