केंद्र सरकार के नए मानक: बर्तनों से फर्नीचर तक होंगे दिव्यांगों के अनुकूल, एटीएम व पीओएस भी होंगे सुगम
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर यह मसौदा तैयार किया है। यह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पीओयूआर दृष्टिकोण पर आधारित है।
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रसोई के बर्तन, फर्नीचर और सौंदर्य प्रसाधनों जैसे रोजमर्रा के उत्पाद अब दिव्यांगजनों के उपयोग के अनुकूल बनेंगे। केंद्र सरकार ने इन्हें सुलभ बनाने के मानकों का मसौदा जारी किया है। इसमें दिव्यांगों तक उत्पादों की निर्बाध पहुंच के लिए सार्वभौमिक डिजाइन, ब्रेल, स्पर्शनीय विशेषताएं और स्पष्ट लेबलिंग जैसे नियमों का प्रस्ताव किया है।
दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) ने दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर यह मसौदा तैयार किया है। यह विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त पीओयूआर दृष्टिकोण पर आधारित है। जिसके मायने सभी के लिए समान उपयोग, सरल और सहज डिजाइन, न्यूनतम शारीरिक प्रयास व व्हीलचेयर या गतिशीलता-सहायता उपयोगकर्ताओं के लिए पर्याप्त स्थान से हैं। यह मसौदा दैनिक इस्तेमाल की 20 प्रमुख श्रेणियों में सुगम्यता नियम निर्धारित करता है। उत्पाद मान्यता प्राप्त निकायों की ओर से अनिवार्य सुगम्यता परीक्षण के अधीन होंगे। इन्हें ए से एएए स्तर तक की रेटिंग दी जाएगी और उत्पाद पर स्पष्ट चिह्न प्रदर्शित होंगे। निर्माताओं को सुगम्य डिजाइनों के लिए जीएसटी प्रोत्साहन का लाभ मिल सकता है। उल्लंघन पर जुर्माना, उत्पाद वापसी हो सकती है।
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ये उत्पाद शामिल
मसौदे में रसोई के बर्तन, खाद्य पैकेजिंग और सौंदर्य प्रसाधनों से लेकर अनुकूलित कपड़े, फर्नीचर, बच्चों की देखभाल के उत्पाद, चिकित्सा आपूर्ति, लिफ्ट और स्वयं-सेवा कियोस्क तक रोजमर्रा के सामान शामिल हैं।
- खाना पकाने की आवश्यक वस्तुएं, बोतलें, पेय पदार्थ और खाद्य पैकेजिंग में आसानी से पकड़ में आने वाले डिजाइन होंगे।
- दोबारा सील करने योग्य पैकेजिंग, ब्रेल और चित्रलिपि लेबल होंगे।
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एटीएम व पीओएस भी होंगे सुगम
दिशा-निर्देशों के अनुसार, एटीएम और पीओएस उपकरण भी ऐसे हों, जिसमें स्पर्श कर मुद्रा की पहचान हो सके। स्क्रीन-रीडर-संगत यूपीआई इंटरफेस, एक-हाथ से इस्तेमाल के लिए सुलभ यात्रा फीचर होने चाहिए।