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साइरस मिस्त्री दोबारा नहीं बनना चाहते टाटा संस के चेयरमैनः रिपोर्ट

Tue, 24 Dec 2019 06:32 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Tue, 24 Dec 2019 06:32 PM IST
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cyrus mistry might not interested in tata sons chairmanship, says report
- फोटो : PTI

राष्ट्रीय कंपनी विधिक अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) से फैसला अपने पक्ष में आने के बाद अब साइरस मिस्त्री का मन बदल गया है। वो टाटा संस के चेयरमैन नहीं बनना चाहते हैं। 2016 में पद से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने राष्ट्रीय कंपनी विधिक प्राधिकरण में केस दर्ज किया था। टाटा संस ने इसके बाद रतन टाटा को जिम्मेदारी सौंप दी थी। रतन टाटा के कुछ महीने तक पद पर रहने के बाद यह जिम्मेदारी एन चंद्रशेखरन को दे दी गई थी। 

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18 दिसंबर को दिया था फैसला

हालांकि एनसीएलटी का फैसला टाटा संस के पक्ष में आया था, जिसके बाद साइरस फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में चले गए थे। इसके बाद 18 दिसंबर को एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाने का आदेश दिया था। हालांकि अब इकोनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि मिस्त्री का चेयरमैन बनने की बिलकुल भी इच्छा नहीं है। 

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न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मिस्त्री के खिलाफ रतन टाटा के उठाए गए कदम परेशान करने वाले थे। पीठ ने नए चेयरमैन की नियुक्ति को भी अवैध ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि टाटा संस को पब्लिक कंपनी से निजी बनाने का फैसला भी गैर कानूनी है और इसे पलटने का आदेश दिया जाता है। यह आदेश चार सप्ताह में लागू होगा और टाटा समूह के पास इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी विकल्प है।
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साइरस मिस्त्री ने इस फैसले पर कहा, ‘आज का फैसला मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह अच्छे प्रशासन और अल्पांश शेयरधारकों के अधिकारों की जीत है। इससे मेरा रुख सही साबित होता है।’

साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे और उन्हें इस पद से अक्तूबर 2016 में हटा दिया गया था। रतन टाटा के बाद उन्होंने 2012 में चेयरमैन का पद संभाला था। समूह के 150 साल के इतिहास में मिस्त्री चेयरमैन बनने वाले टाटा परिवार से बाहर के दूसरे व्यक्ति थे।  

सरकार ने रखा अपना पक्ष

टाटा संस-साइरस मिस्त्री विवाद में केंद्र सरकार के कंपनी मामलों के मंत्रालय ने राष्ट्रीय कंपनी विधिक अपीलीय प्राधिकरण (एनसीएलएटी) से अपने आदेश में गैर-कानूनी शब्द हटाने की अपील की है। इसके लिए मंत्रालय ने याचिका दायर की है। प्राधिकरण ने टाटा संस को पब्लिक से निजी कंपनी में बदलने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी (आरओसी) की मंजूरी के फैसले को भी गैर-कानूनी बताया था।
एनसीएलएटी अब इस मामले पर आगामी 2 जनवरी 2020 को सुनवाई करेगी।

एनसीएलएटी में दायर की गई याचिका में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने कहा है कि वो चाहती है कि प्राधिकरण आदेश के पैराग्रॉफ में संशोधन करे। यह आदेश 18 दिसंबर 2019 को सुनाया गया थ। आरओसी ने कहा कि उसके मुंबई कार्यालय ने कंपनीज एक्ट के प्रावधानों के तहत ही टाटा संस को पब्लिक कंपनी से निजी कंपनी में बदलने का फैसला दिया था। 

पक्षकार बनने से किया मना

आरओसी ने अपील में कहा है कि उसको इस विवादित केस में पार्टी न माना जाए। एनसीएलएटी ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज को भी इस केस में पार्टी बनाया था। आरओसी ने कहा है कि वो इस विवाद में कहीं से भी शामिल नहीं है। यह विवाद केवल टाटा संस और साइरस मिस्त्री के बीच है। 

साइरस मिस्त्री परिवार ने किया था विरोध 

बता दें सितंबर 2017 में टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए शेयरधारकों ने मंजूरी दी थी। उसके बाद आरओसी ने टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर दर्ज किया था। सायरस मिस्त्री परिवार इसके खिलाफ था। क्योंकि निजी कंपनी होने से वे अपने शेयर बाहरी लोगों को नहीं बेच सकते, बल्कि टाटा को ही बेचने पड़ेंगे। जबकि, पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरधारक किसी को भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। 

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