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FADA: जीएसटी 2.0 के इंतजार में ग्राहक टाल रहे वाहनों की खरीदी, त्योहारी सीजन में धीमी हो सकती है बिक्री
Tue, 26 Aug 2025 01:49 AM IST
शिव शुक्ला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शुक्ला
Updated Tue, 26 Aug 2025 01:49 AM IST
सार
जीएसटी सुधार की घोषणा के बाद ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं। वे डीलरों से नई दरों के बारे में पूछ रहे हैं। इस स्थगन से प्रमुख त्योहारी बिक्री पूरी तरह धुल सकती है, क्योंकि दबी हुई मांग नए जीएसटी लागू होने के बाद दिवाली के दौरान ही पूरी हो पाएगी।
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Automobile Industry
- फोटो : PTI
विस्तार
वाहनों पर जीएसटी दरों के कम होने की उम्मीद में ग्राहक अब खरीदी को स्थगित कर रहे हैं। ऑटोमोटिव डीलरों के संगठन फाडा ने कहा, भारी नुकसान से बचाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी 2.0 तुरंत लागू हो। अगर ऐसा नहीं होता है तो त्योहारी मौसम में और ज्यादा घाटा वाहन कंपनियों को हो सकता है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जीएसटी परिषद 3-4 सितंबर को जीएसटी के दो स्लैब लागू करने पर अंतिम निर्णय लेगी।
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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को लिखे पत्र में फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) ने कहा, जीएसटी 2.0 की घोषणा ने जमीनी स्तर पर चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है। देश भर के डीलर आगामी त्योहारों ओणम (26 अगस्त), गणेश चतुर्थी (27 अगस्त) और नवरात्रि व दिवाली (18-23 अक्तूबर) के लिए अपना माल तैयार कर रहे हैं।
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जीएसटी सुधार की घोषणा के बाद ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं। वे डीलरों से नई दरों के बारे में पूछ रहे हैं। इस स्थगन से प्रमुख त्योहारी बिक्री पूरी तरह धुल सकती है, क्योंकि दबी हुई मांग नए जीएसटी लागू होने के बाद दिवाली के दौरान ही पूरी हो पाएगी। फाडा ने कहा, ऐसे में जीएसटी परिषद की बैठक समय से पहले की जाए। इससे मांग केवल दिवाली के आसपास ही सीमित रहने के बजाय पूरे सीजन भर अच्छी रहेगी।
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किस्त की अवधि बढ़ाने की मांग
फाडा ने बैंकों और एनबीएफसी को किश्त अवधि को 30-45 दिनों तक बढ़ाने का निर्देश देने की भी मांग की। इससे डीलरों पर अनावश्यक दबाव कम होगा व व्यापार निरंतरता सुनिश्चित हो सकेगी। नई जीएसटी दरें अधिसूचित होने तक खुदरा बिक्री धीमी रहती है, तो कई डीलरों को गंभीर वित्तीय तनाव का सामना करना पड़ेगा। सरकार ने जीएसटी के चार स्लैब के बजाय दो स्लैब 5 और 18 फीसदी का सुझाव दिया है। वर्तमान में ऑटोमोबाइल पर 28 प्रतिशत कर लगता है, जो जीएसटी का सबसे ऊंचा स्लैब है।