Report: वित्त वर्ष 2026 में चालू खाता घाटा नियंत्रण में रहने की उम्मीद, अमेरिका संग व्यापार वार्ता पर टिकी नजर
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में देश का चालू खाता घाटा जीडीपी के लगभग 1.2 से 1.5 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें कहा गया है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में प्रगति आगामी तिमाहियों में देखने लायक एक महत्वपूर्ण पहलू बनी रहेगी।
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देश का चालू खाता घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी के लगभग 1.2 से 1.5 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है। बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता में प्रगति आने वाले महीनों में एक अहम कारक साबित होगी।
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भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर विशेष नजर
बैंक ने कहा कि अमेरिका भारत के इलेक्ट्रॉनिक निर्यातों का एक बड़ा गंतव्य है, और यह क्षेत्र फिलहाल उच्च अमेरिकी टैरिफ से मुक्त है। ऐसे में व्यापार वार्ता की दिशा पर विशेष नजर रखनी होगी।
व्यापार घाटा पिछले साल की तुलना में अधिक
इसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में भारत का व्यापार घाटा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में अब तक अधिक रहा है। हालांकि निर्यात में पिछले वर्ष की तुलना में वृद्धि हुई है, फिर भी आयात वृद्धि निर्यात वृद्धि से अधिक बनी हुई है, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़ रहा है।आयात के अंतर्गत, गैर-तेल-गैर-स्वर्ण खंड में वृद्धि देखी गई है, जो घरेलू मांग की स्थिति में सुधार को दर्शाता है।
त्योहारी सीजन में बढ़ेगी घरेलू मांग
रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले महीनों में त्योहारी सीजन की मांग के चलते यह रुझान जारी रहने की संभावना है। मौसमी मांग के चलते साल की दूसरी छमाही में सोने का आयात भी बढ़ने की उम्मीद है।
निर्यात के मोर्चे पर भारत ने किया विविधीकरण
हालांकि, तेल की कम कीमतों से कुछ राहत मिल सकती है। यह वैश्विक बाजार में अधिक आपूर्ति की आशंका के बीच मौजूदा स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। निर्यात के मोर्चे पर, वृद्धि स्थिर रही है और नए बाजारों में विविधीकरण के उत्साहजनक संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, हांगकांग और दक्षिण कोरिया जैसे अन्य एशियाई साझेदारों को भारत का निर्यात वृद्धि और कुल निर्यात में उनकी हिस्सेदारी, दोनों ही दृष्टि से पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहा है।
इसी प्रकार, स्पेन और जर्मनी जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों को निर्यात में भी इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह रुझान एक सकारात्मक विकास है और इससे वित्त वर्ष 26 के शेष महीनों में निर्यात वृद्धि को समर्थन मिलने की उम्मीद है।