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RBI On Cryptocurrency: क्रिप्टोकरेंसी पर आरबीआई का बड़ा बयान, कहा- इससे अर्थव्यवस्था के एक हिस्से के डॉलरीकरण का खतरा
Sun, 15 May 2022 05:20 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 15 May 2022 05:20 PM IST
सार
पूर्व वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा की अगुवाई वाली वित्त पर संसद की स्थाई समिति के समक्ष रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास समेत शीर्ष अधिकारियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी आशंकाओं को उनके सामने रखा।
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क्रिप्टोकरेंसी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक संसदीय समिति से कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी से अर्थव्यवस्था के एक हिस्से का डॉलरीकरण हो सकता है। यह भारत के संप्रभु हितों के खिलाफ होगा। सूत्रों के मुताबिक, पूर्व वित्त राज्यमंत्री जयंत सिन्हा की अगुवाई वाली वित्त पर संसद की स्थाई समिति के समक्ष रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास समेत शीर्ष अधिकारियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने क्रिप्टोकरेंसी को लेकर अपनी आशंकाओं को उनके सामने रखा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को लेकर चुनौतियां खड़ी होंगी।
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रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने कहा कि यह मौद्रिक नीति तय करने और देश की मौद्रिक प्रणाली का नियमन करने की केंद्रीय बैंक की क्षमता को गंभीर रूप से कमतर करेगी। उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी में विनिमय का माध्यम बनने की क्षमता है और यह घरेलू स्तर पर तथा सीमापार होने वाले वित्तीय लेनदेन में रुपये का स्थान ले सकती है। केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने कहा कि ये करेंसी मौद्रिक प्रणाली के एक हिस्से पर काबिज हो सकती है और प्रणाली में धन के प्रवाह के नियमन की आरबीआई की क्षमता को भी कमतर कर सकती है।
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रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने आगाह किया कि आतंक के वित्तपोषण, धनशोधन और मादक पदार्थों की तस्करी में भी क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल किया जा सकता है और यही नहीं, यह देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उन्होंने संसदीय समिति से कहा कि लगभग सभी क्रिप्टोकरेंसी डॉलर पर आधारित हैं और इन्हें विदेशी निजी संस्थान जारी करते हैं। ऐसे में संभव है कि इससे हमारी अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से का डॉलरीकरण हो जाए, जो देश के संप्रभु हितों के खिलाफ होगा।
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आरबीआई के अधिकारियों ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी का बैंकिंग प्रणाली पर भी नकारात्मक असर होगा क्योंकि आकर्षक परिसंपत्तियां होने के कारण हो सकता है कि लोग अपनी मेहनत की कमाई इनमें लगाएं जिसके परिणामस्वरूप बैंकों के पास देने के लिए संसाधनों की कमी हो।