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CRISIL Report : लागत बढ़ने से छोटी और सस्ती कारों की बिक्री में गिरावट की आशंका, बढ़ रही महंगी-प्रीमियम वाहनों की मांग

Tue, 17 May 2022 01:35 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, मुंबई।
एजेंसी, मुंबई। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 17 May 2022 01:35 AM IST
सार

रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रीमियम कारों के मुकाबले छोटी कारों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। नए मॉडल के लॉन्च की रफ्तार भी धीमी हुई है, जिससे प्रीमियम कारों की ओर खरीदारों का आकर्षण बढ़ा है।

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CRISIL Report Possibility of decline in sales of small and cheap cars due to Increases Cost Increasing demand for expensive-premium vehicles
महंगी और प्रीमियम कारों की मांग में तेजी (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : PTI

विस्तार

महामारी के कारण कमाई घटने के बावजूद महंगी और प्रीमियम कारों की बिक्री बढ़ रही है। हालांकि, छोटी (एंट्री लेवल) और सस्ती कारों की बिक्री में गिरावट की आशंका है। क्रिसिल ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा कि कोरोना का उच्च आय वाले लोगों की वित्तीय सेहत पर असर नहीं हुआ है। इसलिए उनकी खरीद क्षमता मजबूत बनी हुई है और वे महंगी-प्रीमियम कारें खरीदना चाहते हैं।

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इसके विपरीत, आय घटने से कम कमाई वाले खरीदार छोटी कारें खरीदने का फैसला टाल रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रीमियम कारों के मुकाबले छोटी कारों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। नए मॉडल के लॉन्च की रफ्तार भी धीमी हुई है, जिससे प्रीमियम कारों की ओर खरीदारों का आकर्षण बढ़ा है। वहीं, अधिक कीमत वाले दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी बनी रहेगी। प्रीमियम सेगमेंट में 10 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली कारें आती हैं। 70,000 रुपये से अधिक दाम वाले दोपहिया वाहन उच्च कीमत श्रेणी में आते हैं।  
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महंगी कारों की मांग 5 गुना ज्यादा
भारत में आमतौर पर पहली बार कार खरीदने वाले ग्राहक कम कीमत वाले वाहन खरीदते हैं। इसके बावजूद पिछले वित्त वर्ष के दौरान प्रीमियम सेगमेंट कारों की बिक्री सस्ती कारों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा रही। इनकी वार्षिक वृद्धि दर 38 फीसदी रही, जबकि सस्ती कारों की बिक्री में करीब सात फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इससे 2021-22 में प्रीमियम कारों की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर करीब 30 फीसदी हो गई, जो 2020-21 में 25 फीसदी रही थी। 
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20 फीसदी तक बढ़ीं छोटी कारों की कीमतें 
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले चार वित्त वर्ष में छोटी कारों की कीमतें 15-20 फीसदी बढ़ी हैं। इसकी प्रमुख वजह कारों में सुरक्षा उपाय बढ़ाने को लेकर सरकार की सख्ती है। इन उपायों में एंटी लॉकिंग ब्रेकिंग सिस्टम, एयरबैग, स्पीड वार्निंग अलार्म, सीट बेल्ट रिमाइंडर, रियर पार्किंग सेंसेर, क्रैश टेस्ट नियम आदि शामिल हैं। इसके अलावा, आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों ने वाहन निर्माता कंपनियों के एक हिस्से को प्रभावित किया है। इससे न सिर्फ लागत बढ़ी है बल्कि उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। 


छोटी कारों के मॉडल घटे, प्रीमियम के बढ़े
क्रिसिल रिसर्च ने बताया कि कार खरीदने को लेकर उपभोक्ताओं की पसंद बदल रही है। इसलिए वाहन कंपनियां महंगी और प्रीमियम कारों पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इसका असर नए मॉडल पर भी दिख रहा है। 

  • 2014-15 में महंगी और प्रीमियम कारों के सिर्फ 71 मॉडल बाजार में उपलब्ध थे, जो 2020-21 में बढ़कर 93 हो गए। 
  • इसके उलट, इस दौरान छोटी और सस्ती कारों के मॉडल 29 से घटकर सिर्फ 12 रह गए हैं।
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