Report: त्योहारी मांग और जीएसटी सुधारों से कंज्यूमर सेक्टर को मिल सकती है रफ्तार, ग्रामीण मांग पर दबाव कायम
सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार त्योहारी मांग और जीएसटी सुधारों के चलते वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में उपभोक्ता सेक्टर की स्थिति बेहतर होगी। हालांकि, ग्रामीण मांग अब भी नाजुक स्थिति में बनी हुई है। ग्रामीण बाजारों में रिकवरी आय वृद्धि से नहीं, बल्कि महंगाई घटने के कारण दिखाई दे रही है।
विस्तार
त्योहारी मांग और जीएसटी सुधारों के चलते वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में उपभोक्ता कंपनियों के नतीजे बेहतर होने की उम्मीद है। सिस्टेमैटिक्स रिसर्च की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। इसमें कहा गया है कि उपभोक्ता वस्तुओं में मामूली वृद्धि देखी गई है। वहीं विवेकाधीन खर्च अभी भी कोविड-पूर्व स्तरों से नीचे बना हुआ है।
ये भी पढ़ें: India US Trade Deal: ब्रेंडन लिंच भारत पहुंचे, व्यापार समझौते के खोजे जाएंगे रास्ते; छठे दौर की बातचीत पर मंथन
पहली तिमाही के नतीजे रहे सुस्त
वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के नतीजे सुस्त रहे, लेकिन तिमाही-दर-तिमाही सुधार पहले से ही दिखाई दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, घटती महंगाई, सप्लाई चेन का सामान्य होना और त्योहारों के मौसम की मांग, दूसरी छमाही में सेक्टर की रिकवरी को गति देंगे।
उपभोक्ता कंपनियों के नतीजे रहे बेहतर
उपभोक्ता वस्तुओं की कंपनियों ने वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में राजस्व में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। वहीं बिक्री में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। दोनों संकेतक क्रमिक रूप से थोड़े बेहतर रहे।
शहरी और ग्रामीण मांग की स्थिति
शहरी मांग में सुधार के संकेत दिखे, जबकि ग्रामीण मांग स्थिर रही। हालांकि, प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों ने जूस, कार्बोनेटेड पेय, आइसक्रीम, डेयरी, सन और स्किन केयर उत्पाद, और पेंट जैसी श्रेणियों पर असर डाला।
वॉल्यूम मांग में सुधार की उम्मीद
रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति में कमी और व्यापक वितरण के कारण वित्त वर्ष 26 की दूसरी छमाही में वॉल्यूम मांग में सुधार की उम्मीद है। खाद्य और पेय पदार्थों को भी संभावित जीएसटी दरों में कटौती का लाभ मिल सकता है।
ग्रामीण मांग की स्थिति नाजुक
हालांकि, ग्रामीण मांग अब भी नाजुक स्थिति में बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण बाजारों में रिकवरी आय वृद्धि से नहीं, बल्कि महंगाई घटने के कारण दिखाई दे रही है। ग्रामीण परिवारों की खपत अब भी सरकारी ट्रांसफरों पर निर्भर है। घटती बचत, बढ़ता खाद्य खर्च और बढ़ती अनौपचारिक उधारी दबाव को और बढ़ा रही है। मजबूत मानसून ने कृषि उत्पादन को बढ़ावा दिया है, लेकिन फसलों की कम कीमतें कृषि आय को सीमित कर रही हैं।
शहरों में गैर-जरूरी खर्च में हुई वृद्धि
ग्रामीण उपभोक्ता विश्वास में मामूली सुधार हुआ है। वहीं शहरी विश्वास अभी भी निराशाजनक बना हुआ है। फिर भी, शहरों में गैर-जरूरी खर्च में फिर से वृद्धि होने लगी है, जिससे वर्ष की दूसरी छमाही में समग्र क्षेत्र में सुधार को बल मिल सकता है।