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देश के हर छोटे से छोटे रेलवे स्टेशन पर बनेगा प्लेटफॉर्म, मुंबई-दिल्ली में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक

Wed, 01 Nov 2017 11:50 AM IST
पंकज शुक्ल
पंकज शुक्ल Updated Wed, 01 Nov 2017 11:50 AM IST
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construction of platform to start in every small railway station, says rail minister piyush goyal

‘अमर उजाला’ की पहल पर देश में पहली बार गांव, कस्बों और तहसील मुख्यालयों पर बने रेलवे स्टेशनों और हाल्ट स्टेशनों तक यात्रियों को सुविधाएं पहुंचाने के लिए रेल मंत्रालय ने कमर कसी है।

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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ‘अमर उजाला’ से एक एक्सक्लूसिव मुलाकात में कहा कि देश में जहां कहीं भी बुजुर्गों और दिव्यांगों को रेल के डिब्बों के भीतर आने के लिए डिब्बों की सीढ़ियों चढ़नी होती है, वहां कम से कम दो बोगियों के सामने छोटा प्लेटफॉर्म बनाने पर उनकी सहमति है।
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पढ़ें- सीएसआर अवार्ड: रेल मंत्री पीयूष गोयल बोले- समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य कर रहा अमर उजाला
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रेल मंत्री ने इसी बातचीत में ये भी ऐलान किया कि देश के तीन बड़े शहरों दिल्ली, बंगलुरू और मुंबई में यात्रियों की भीड़ का दबाव कम करने के लिए मौजूदा रेलवे लाइनों के ऊपर ही एलिवेटेड ट्रैक बनाने का काम 2019 से पहले शुरू हो जाएगा।

एलईडी कार्यक्रम की दुनिया भर में प्रशंसा

construction of platform to start in every small railway station, says rail minister piyush goyal

अमर उजाला सीएसआर अवार्ड कार्यक्रम में शिरकत करने आए केंद्रीय कोयला और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ‘अमर उजाला’ से देर तक लंबी बातचीत की। ये पूछे जाने पर कि जिस देश में किसी मंत्रालय को मिले लक्ष्यों को पूरा करने में ही ज्यादातर विभाग हांफने लगते हैं, ऊर्जा मंत्रालय के लक्ष्यों को उन्होंने खुद ही न सिर्फ बढ़ा लिया बल्कि समय से पहले पूरा भी कर लिया, गोयल ने कहा, ये संवेदना का काम है। 2014 में जब देश में नई सरकार बनी तो 25 करोड़ घरों में बिजली नहीं थी।

हमारा लक्ष्य देश के गरीब और वंचित लोगों के घरों तक उजाला पहुंचाने का रहा है। इसीलिए हमने एलईडी योजना शुरू की। हमने ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा का खर्च घटाया भी है। एलईडी के इस्तेमाल से लोगों के सिर्फ बिजली बिल ही कम नहीं हुए बल्कि बिजली बची भी है।

जिन राज्यों के पास बिजली का टोटा रहता था, वहां अब बिजली सरप्लस है। लोगों को खुश देखना ही सरकार का लक्ष्य रहा है और अब तो दुनिया के तमाम दूसरे देश हमारे एलईडी कार्यक्रम को अपना रहे हैं और इसकी प्रशंसा कर रहे हैं।

मुंबई, दिल्ली में पटरियों के ऊपर नए ट्रैक 

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मुंबई में हाल ही में एक लोकल ट्रेन स्टेशन पर भगदड़ के दौरान हुई मौतों के सिलसिले में जब रेल मंत्री से पूछा गया कि मुंबई में एलिवेटेड रेलवे ट्रैक बनाने का काम कई वर्षों से फाइलों में ही क्यों अटका पड़ा है? उन्होंने कहा कि मुंबई के एलिवेटेड ट्रैक की सारी फाइलें उन्होंने मंगाई और उनका अध्ययन किया।

इससे एक बात ये साफ जाहिर हुई कि इस योजना को अमली जामा पहनाने के लिए कभी गंभीरता से सोचा ही नहीं गया। पीपीपी मॉडल के तहत बने इस प्रोजेक्ट की लागत  बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट से भी ज्यादा मिली। 

गोयल ने कहा, “ये बात मैं पहली बार अमर उजाला के साथ साझा कर रहा हूं कि  इस पूरे प्रोजेक्ट के सरलीकरण का काम शुरू हो चुका है। हम मौजूदा ट्रैक के ऊपर ही नया ट्रैक बनाकर मुंबई में अतिरिक्त लोकल ट्रेन सेवाएं शुरू करने जा रहे हैं। और, इसके साथ ही दिल्ली और बंगलुरू में भी 2019 से पहले एलिवेटेड रेलवे ट्रैक का काम शुरू कर दिया जाएगा। केंद्र की अगली बीजेपी सरकार ही इसका उद्घाटन भी कर देगी।”

हर हाल्ट पर बनेगा प्लेटफॉर्म
रेलमंत्री का ध्यान जब इस तरफ दिलाया गया कि देश के गांवों, कस्बों और तहसीलों को जोड़ने वाले रेल मार्ग पर अब भी तमाम स्टेशन और हाल्ट ऐसे हैं, जहां प्लेटफॉर्म तक नहीं बने हैं जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को ट्रेन में चढ़ने में तमाम दिक्कतें होती हैं।

पहले तो रेलमंत्री को इस जानकारी पर अचरज हुआ, लेकिन मामले की गंभीरता के समझ आते ही उन्होंने कहा कि ऐसे हर स्टेशन पर जहां 50-60 लोग भी ट्रेन में चढ़ते हैं, कम से कम दो बोगियों में चढ़ने भर लंबाई का प्लेटफॉर्म बनाने पर उनकी सहमति है और इस दिशा में रेल मंत्रालय जरूर काम शुरू करेगा। उ

न्होंने ‘अमर उजाला’ की इस बात की भी प्रशंसा की कि यह संवेदनशील जानकारी उनको इस अखबार के माध्यम से मिली। उन्होंने कहा कि इन दिनों वह रेलवे से भी यात्राएं करते हैं और देश के लोगों की रेल यात्रा को बेहतर और सुखद करने के प्रयास में लगे हैं।

कोयला खदानों से प्रदूषण कम करने पर जोर
ये पूछे जाने पर कि ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता के लिए कोयले पर निर्भरता और उसमें भी खुली खदानों को बढ़ावा देना कहां तक उचित है, कोलया मंत्री ने कहा कि खुली खदानों (ओपन कास्ट माइनिंग) का भी अपना महत्व है। लेकिन, यह बात सरकार भी मानती है कि खुली खदानों से कोयला निकालने और उसके परिवहन के दौरान कम से कम प्रदूषण हो, इस पर भी ध्यान देना हमारी ही जिम्मेदारी है। कोयले की वैगनों पर पानी का छिड़काव हो और धूल रोकने के लिए भी बराबर काम करने की जरूरत है।

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