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फौरी राहत है पेट्रोल-डीजल के दाम में कटौती, लोगों को नहीं मिलेगी महंगाई से मुक्ति

Thu, 04 Oct 2018 05:24 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 04 Oct 2018 05:24 PM IST
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common people will not get major relief despite cut in petrol diesel

पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार द्वारा 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने  की घोषणा केवल एक फौरी राहत है। लोग इससे खुश हो लें, लेकिन इससे महंगाई में कमी आ जाएगी ऐसा शिगूफा न पालें। बाजार के जानकारों ने कहा कि जब तक सरकार कोई बड़े उपाय का ऐलान नहीं करती है तब तक यह कटौती मामूली है। 

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इन वजह से कटौती फौरी राहत

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने amarujala.com से बात करते हुए कहा कि 2.50 रुपये केंद्र सरकार और 2.50 रुपये राज्य सरकारों से कटौती के बाद भी लोगों को हर चीज महंगी ही मिलेगी। इसकी वजह है कच्चे तेल का दाम और रुपये में गिरावट। कच्चे तेल का दाम फिलहाल 82 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है। वहीं गुरुवार को रुपया भी डॉलर के मुकाबले 73.70 पर चला गया। अभी रुपये 75 के पार जाने की संभावना बनी हुई है। साथ ही कच्चे तेल का दाम भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की उम्मीद है। 
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फेस्टिव सीजन में नहीं मिलेगी राहत

अगर आप फेस्टिव सीजन की तैयारियों में लगने वाले हैं और सोच रहे हैं कि आगे चलकर कई वस्तुओं की कीमतों में कमी आएगी तो ऐसा नहीं है। महंगाई का यह आलम अगले एक महीने तक रहने की उम्मीद है। पेट्रोल डीजल की कीमतें और रुपये में गिरावट पिछले चार साल के उच्चतम स्तर पर है। इसके चलते आम आदमी के लिए आना-जाना, घर का खर्च, बिजली-पानी आदि सभी कुछ महंगा हो गया है। वहीं अपनी जरूरत का रोजमर्रा का सामान खरीदने के लिए भी ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।

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तेल कंपनियों को भी नहीं राहत

common people will not get major relief despite cut in petrol diesel
इंडियन ऑयल - फोटो : अमर उजाला

तेल कंपनियों के लिए 10 अरब डॉलर की उगाही करने को विदेशी कर्ज लेने संबंधी नियमों में ढील देने से रुपये की गिरावट को रोकने में कोई खास मदद नहीं मिलेगी। यह बात बृहस्पतिवार को बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बोफाएमएल) ने कही। अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी ने साथ ही कहा कि इससे पहले गैर-आवश्यक वस्तुओं पर शुल्क बढ़ाने जैसी कोशिशों का भी बड़ा असर नहीं हुआ।

बोफाएमएल ने कहा कि सरकारी तेल कंपनियों के लिए 10 अरब डॉलर तक ईसीबी (विदेशी वाणिज्यिक कर्ज) नियमों में ढील देना बहुत प्रभावी नहीं है। बुधवार शाम को घोषित कदम उनके लघु अवधि विदेशी कर्ज को घटाने से आंशिक तौर पर अप्रभावी हो जाएगा, जो ब्रोकरेज कंपनी के मुताबिक मौजूदा कारोबारी साल में 15 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। कंपनी ने कहा कि आरबीआई तेल आयातक कंपनियों के लिए उम्मीद के मुताबिक विशेष स्वैप खिड़क खोलने का बोझ वहन नहीं कर सकता है।

ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि अप्रैल से हस्तक्षेप की प्रक्रिया 25-30 अरब डॉलर गंवाने के अब प्रति माह आठ अरब डॉलर के लिए प्रतिबद्धता से विदेशी पूंजी भंडार आठ महीने के आयात को वहन करने लायक सीमा से नीचे जा सकता है।

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