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India-China: ट्रम्प के दबाव को कम करने के लिए भारत से संबंध सुधारने की कोशिश में चीन, बोले जानकार

Wed, 20 Nov 2024 10:20 AM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 20 Nov 2024 10:20 AM IST
सार

India China Relations: पिछले महीने भारत ने घोषणा की थी कि उसने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त के लिए चीन से समझौता कर लिया है, यह चार साल से अधिक समय से चल रहे सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता थी। अमेरिका-भारत सामरिक व भागीदारी मंच के अनुसार इस फैसले का कारण अमेरिका में ट्रंप की वापसी को देखते हुए चीन के रुख में आया बदलाव है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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China trying to improve ties with India to ease off US pressure from Trump: Business leader
भारत चीन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चीन अमेरिका में आने वाले ट्रम्प प्रशासन के दबाव को कम करने की कोशिश में भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है, एक शीर्ष भारत केंद्रित अमेरिकी व्यापार पैरवीकार और रणनीतिक समूह के प्रमुख ने मंगलवार को यह बात कही। अपने राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रम्प ने चीन से आने वाले सामानों पर 60 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था- उन्होंने अन्य सभी अमेरिकी आयातों पर 20 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा था।

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अमेरिका-भारत सामरिक व भागीदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा, "इसलिए, हम ट्रंप प्रशासन के आने का शुरुआती प्रभाव देख रहे हैं, जिसने चीन पर भारत के साथ व्यवहार को आसान बनाने का दबाव बनाया है। इसीलिए सीमा पर गश्त पर सहमति बनी है। सीधी उड़ानों पर सहमति बनी है।" उन्होंने आगे कहा, "वे भारत आने वाले चीनी लोगों के लिए अधिक वीजा भी जारी करेंगे। आप देख रहे हैं कि ट्रंप के आने से भारत-चीन संबंधों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।"
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पिछले महीने भारत ने घोषणा की थी कि उसने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त के लिए चीन से समझौता कर लिया है, यह चार साल से अधिक समय से चल रहे सैन्य गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता थी।
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अघी ने पीटीआई को दिए साक्षात्कार में कहा, "चीन की ओर से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि ट्रंप आ रहे हैं। इससे अमेरिका के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो जाएंगे। तो, इस तनावपूर्ण रिश्ते के लिए कई मोर्चे क्यों बनाए जाएं? कम से कम भारत के साथ साझेदारी या संभावित रिश्ते को आसान बनाया जाए'।"

उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षित सोर्सिंग के लिए स्थान उपलब्ध कराकर ट्रम्प की "अमेरिका फर्स्ट" नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जबकि नया प्रशासन विनिर्माण को चीन से दूर ले जाने और अमेरिका में रोजगार सृजन की योजना बना रहा है।

अघी ने कहा, "ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ लगाने का प्रयास ताकि कंपनियों पर विनिर्माण को वापस अमेरिका में लाने के लिए दबाव डाला जा सके, यह  काम रातोंरात नहीं होने वाला है। विनिर्माण को अमेरिका से बाहर ले जाने में लगभग 40 साल लग गए। हमारे सामने चुनौती यह है कि हमारे पास पर्याप्त कौशल नहीं है। हमारे पास उस दृष्टिकोण से हमारी मदद करने के लिए पर्याप्त जनशक्ति नहीं है। इसलिए, बदलाव में समय लगेगा।"

यूएसआईएसपीएफ प्रमुख ने कहा, "यही वह जगह है जहां भारत यह कहकर महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि 'हां, हम आपको विनिर्माण को अमेरिका में वापस लाने में मदद करेंगे, लेकिन हम इनमें से बहुत से घटकों का निर्माण भारत में भी करेंगे' और वे वैश्विक आपूर्ति शृंखला का हिस्सा बन जाएंगे। यह आपकी मदद करता है क्योंकि आप भू-राजनीतिक रूप से चीन के जोखिम भरे माहौल पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि आप एक मित्र पर निर्भर हैं। 

उन्होंने कहा, "आप देखेंगे कि अमेरिका को प्राथमिकता देने के मामले में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। साथ ही, आपूर्ति शृंखला के भीतर आत्मनिर्भर भारत भी बहुत महत्वपूर्ण हो गया है।" अघी ने यह भी दावा किया कि कॉरपोरेट अमेरिका चुनाव परिणामों से "बहुत खुश" है।

उन्होंने कहा, "उनका मानना है कि ट्रंप समझते हैं कि कारोबार चलाना और उसे बढ़ाना कितना चुनौतीपूर्ण है। उम्मीद है कि वे कॉरपोरेट के लिए करों में कमी लाएंगे, जिससे उन्हें अधिक लाभ कमाने और कारोबार को बढ़ाने में मदद मिलेगी। कॉरपोरेट समुदाय नए ट्रंप प्रशासन का स्वागत करता है।

अघी ने कहा, "बाजार में तेजी आई है। दिलचस्प बात यह है कि डॉलर भी मजबूत हुआ है। यह कॉर्पोरेट अमेरिका की आने वाले प्रशासन में विश्वास को दर्शाता है।" भारत-अमेरिका संबंधों पर चुनावों के प्रभाव के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में, उद्योगपति ने कहा कि यह केवल प्रशासन पर निर्भर नहीं है।

उन्होंने कहा, "यह दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक विचारों के आदान-प्रदान पर निर्भर है। यह अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। यह व्यापार पर निर्भर है। यह लोगों के आपसी संबंधों पर निर्भर है। जब आप भू-राजनीति को देखते हैं, तो भारत-अमेरिका, विशेष रूप से चीन के साथ, जुड़े हुए हैं।"

यूएसआईएसपीएफ प्रमुख ने कहा, "हम जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड के तहत दोनों देशों के बीच जबरदस्त गतिविधियां देख रहे हैं। व्यापार के मामले में, आपके पास 200 बिलियन अमरीकी डॉलर का व्यापार है, जिसके बढ़ने की उम्मीद है। प्रौद्योगिकी के मामले में, हम देख रहे हैं कि भारतीय भारत में ही बहुत सारी अमेरिकी प्रौद्योगिकी का निर्माण कर रहे हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र अमेरिकी कंपनियों के लिए पर्याप्त मात्रा में आईपी (बौद्धिक संपदा) पैदा कर रहे हैं।" अघी ने यह भी कहा कि पांच मिलियन भारतीय-अमेरिकी अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 6 प्रतिशत उत्पन्न करते हैं, जबकि वे जनसंख्या का केवल 1 प्रतिशत हैं।


उन्होंने कहा, "ट्रंप प्रशासन यह देखेगा कि आप अमेरिका में नौकरियां कैसे पैदा करते हैं। यहीं पर भारत को यह कहकर बहुत मजबूत भूमिका निभानी होगी कि 'हां, हम अमेरिका प्लस वन रणनीति का समर्थन करेंगे।' क्या यह भारत की आत्मनिर्भर भारत की रणनीति में बाधा बनेगा? नहीं। मुझे लगता है कि दोनों एक साथ रह सकते हैं और पारस्परिक सफलता के लिए एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं।"

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