फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   China Economy Iran War Impact Global Supply Chain Electric Vehicles Trade Surplus Business News in Hindi

Iran War: ईरान युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था पस्त, लेकिन चीन के लिए कैसे वरदान बन सकता है यह संकट? जानिए सच

Sat, 04 Apr 2026 07:13 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Sat, 04 Apr 2026 07:13 PM IST
सार

ईरान युद्ध और ट्रंप की नीतियों के बीच चीन की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा? जानिए कैसे कच्चे तेल का संकट चीन के 'न्यू थ्री' और वैश्विक व्यापार के लिए अवसर बन रहा है।

विज्ञापन
China Economy Iran War Impact Global Supply Chain Electric Vehicles Trade Surplus Business News in Hindi
ईरान संकट का चीन पर असर - फोटो : amarujala.com

विस्तार

पश्चिम एशिया में अमेरिका और इस्राइल की ओर से ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है। इस युद्ध के कारण अपूर्ति शृंखला इतनी बुरी तरह प्रभावित हुई कि पूरी दुनिया असमंजस में है। हालांकि, यह संकट चीन के लिए एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। जहां एक ओर डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और ईरान पर हमलों से वैश्विक बाजार खस्ताहाल हो रहे हैं, वहीं चीन खुद को इस हालात में भी स्थिरता और निश्चितता का प्रतीक बता रहा है। इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस युद्ध से चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान तो होगा, लेकिन उसके प्रतिद्वंद्वियों और पड़ोसियों की तुलना में यह असर काफी कम रहेगा। 

विज्ञापन


आइए समझते हैं कि ऊर्जा, निर्यात और आर्थिक विकास के मोर्चे पर यह भू-राजनीतिक तनाव चीन के लिए क्या नई संभावनाएं और चुनौतियां लेकर आया है।

विज्ञापन

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच चीन की मजबूत तैयारी

ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर चीन अपनी बेहतर तैयारी के कारण काफी सुरक्षित स्थिति में है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपने कच्चे तेल का 70% से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मंगाते हैं, जबकि चीन की इस मार्ग पर निर्भरता केवल एक तिहाई है। इसके अलावा, चीन के कुल ऊर्जा उपयोग में कोयला, परमाणु ऊर्जा और तेजी से बढ़ती नवीकरणीय ऊर्जा की प्रमुख हिस्सेदारी है।

विज्ञापन
विज्ञापन


यदि आपूर्ति शृंखला बुरी तरह बाधित होती है, तो चीन के पास लगभग चार महीने का सुरक्षित समुद्री तेल भंडार मौजूद है, जिसे सरकार फिलहाल केवल सबसे खराब स्थिति के लिए बचाकर रखना चाहती है। हालांकि, 23 मार्च को चीन में पेट्रोल की कीमतों में 13% की बढ़ोतरी की गई है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार कच्चे माल की यह बढ़ती लागत चीन को 41 महीनों से चले आ रहे 'डिफ्लेशन' (कीमतों में लगातार गिरावट) के खतरनाक दौर से बाहर निकालने में मदद कर सकती है, जो 2012-16 के बाद कीमतों में गिरावट का सबसे लंबा दौर है।

चीन पर दबाव और न्यू थ्री उत्पादों की क्या भूमिका?

वैश्विक स्तर पर आपूर्ति शृंखला बाधित होने के कारण ऊर्जा महंगी होने से लोगों का अन्य वस्तुओं पर खर्च घटेगा, जिसका सीधा असर चीनी कारखानों पर पड़ेगा। पिछले साल चीन ने 1.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष दर्ज किया था, जिसने उसकी आर्थिक वृद्धि में एक तिहाई का योगदान दिया था। 

लेकिन, इस संकट ने चीन के 'न्यू थ्री' उत्पादों- इलेक्ट्रिक वाहन, लिथियम-आयन बैटरी और सोलर सेल- के लिए एक बड़ा अवसर भी पैदा कर दिया है। इन तीनों क्षेत्रों की वैश्विक उत्पादन क्षमता में चीन की हिस्सेदारी 70% से अधिक है। तेल की कीमतें ऊंची रहने पर पूरी दुनिया में इन ग्रीन उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी। इसका एक फायदा यह भी है कि जो यूरोपीय देश चीनी आयातों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे थे, युद्ध के कारण अब उनका ध्यान भटक गया है, जिसका सीधा लाभ चीनी उत्पादकों को मिलेगा।

China Economy Iran War Impact Global Supply Chain Electric Vehicles Trade Surplus Business News in Hindi
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग - फोटो : ANI

क्या चीन लाएगा बड़ा राहत पैकेज?

यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो चीन के सामने साल 2026 के लिए निर्धारित 4.5-5% के विकास लक्ष्य को हासिल करने की भारी चुनौती होगी, जो 1991 के बाद का सबसे निचला स्तर है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग कर्ज बढ़ाने वाले 'स्टिमुलस' (आर्थिक प्रोत्साहन) पैकेजों को अर्थव्यवस्था की कमजोरी और नैतिक विफलता मानते हैं। वे चाहते हैं कि व्यवसाय और उपभोक्ता सरकारी बेल-आउट पर निर्भर रहने के बजाय खुद को संभालें। लेकिन, अगर निर्यात गिरता है और सुस्त पड़ा प्रॉपर्टी बाजार उबर नहीं पाता है, तो सरकार को मजबूरन ब्याज दरों में तेजी से कटौती करनी पड़ सकती है और सार्वजनिक खर्च बढ़ाना पड़ सकता है। 

ड्रैगन के बारे में जानकारों की क्या राय?

आर्थिक जानकारों का मानना है कि कमजोर निर्यात की स्थिति में चीन को अपनी घरेलू मांग बढ़ानी होगी। स्टिमुलस के जरिए घरेलू मांग में होने वाली यह वृद्धि न केवल चीनी परिवारों के लिए, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिरता के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होगी। हालांकि, अमेरिका के लिहाज से यह एक बड़ी विडंबना ही होगी कि डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और युद्ध ने विश्व बाजारों को तो अस्थिर कर दिया, लेकिन अंततः यह संकट चीन की अर्थव्यवस्था को निर्यात-निर्भरता से हटाकर अधिक संतुलित बना सकता है। ऐसे में, यह जाहिर है कि जिस चीन को कमजोर करने की ट्रंप दिन-रात जुगत में लगे रहने का दावा करते हैं, वह उनके ही कर्मों से अपने हालात बेहतर करने में सफल हो रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed