Gov Decisions: केंद्र ने कहा- खाद्य वस्तुओं के कीमतों पर नजर, आरआईएनएल की पुनरुद्धार योजना को मंजूरी
Gov Decisions: खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार सरकार उपभोक्ताओं और किसानों के हित में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए समय पर निर्णय ले रही है। अच्छी मानसूनी बारिश और अनुकूल मौसम के कारण फसल वर्ष 2024-25 (जुलाई-जून) में दालों और प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने का अनुमान है। आइए इस बारे में और विस्तार से जानें।
विस्तार
सरकार उपभोक्ताओं के लिए आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर कड़ी निगरानी रख रही है ताकि कीमतें स्थिर बनी रहें। केंद्र ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी। सरकार के अनुसार खाने-पीने के चीजों की उपलब्धता और उनकी सही कीमतें सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने और आयात व निर्यात नीतियों से जुडे़ उपाय किए जा रहे हैं।
खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, "केंद्र सरकार उपभोक्ताओं और किसानों के हित में मूल्य स्थिरता बनाए रखने के लिए समय पर निर्णय ले रही है।" अच्छी मानसूनी बारिश और अनुकूल मौसम के कारण फसल वर्ष 2024-25 (जुलाई-जून) में दालों और प्याज का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ने का अनुमान है।
2024-25 में तुअर उत्पादन 35.02 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 34.17 लाख टन उत्पादन से 2.5 प्रतिशत अधिक है। कृषि मंत्रालय ने तुअर की खरीद के लिए मंजूरी जारी कर दी है। अधिक बुवाई के कारण खरीफ और देर खरीफ प्याज का उत्पादन अच्छा रहने का अनुमान है। इसी प्रकार, रबी प्याज की बुवाई भी अच्छी चल रही है। खाद्य मुद्रास्फीति अक्तूर के 10.87 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2024 में 8.39 प्रतिशत हो गई।
सरकार ने आरआईएनएल पुनरुद्धार योजना को 11,440 करोड़ रुपये की मंजूरी दी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कर्ज के बोझ से दबी राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के लिए 11,440 करोड़ रुपये की पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दे दी है। शुक्रवार को जारी बयान में यह जानकारी दी गई।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने आरआईएनएल के लिए 11,440 करोड़ रुपये की पुनरुद्धार योजना को मंजूरी दे दी है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस निवेश में आरआईएनएल में इक्विटी पूंजी के रूप में 10,300 करोड़ रुपये और 1,140 करोड़ रुपये के कार्यशील पूंजी ऋण को 7 प्रतिशत के गैर-संचयी अधिमान्य शेयर पूंजी के रूप में परिवर्तित करना शामिल है, जिसे 10 वर्षों के बाद भुनाया जा सकेगा, इससे आरआईएनएल को चालू हालत में रखने में मदद मिलेगी।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार इस पैकेज से आरआईएनएल की कई पुरानी समस्याएं हल हो जाएंगी। बयान में कहा गया है कि आरआईएनएल में 10,300 करोड़ रुपये की इक्विटी निवेश से उसे कार्यशील पूंजी जुटाने से संबंधित परिचालन संबंधी समस्याओं को दूर करने और सबसे अधिक उत्पादक तरीके से ब्लास्ट फर्नेस परिचालन शुरू करने में मदद मिलेगी।
मंत्रिमंडल ने 687 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग को मंजूरी दी : सिंधिया
दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शुक्रवार को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोबाइल सेवाओं के लिए 687 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की रिफार्मिंग को मंजूरी दे दी है। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से गठित सचिवों की समिति के अध्ययन के आधार पर अन्य कदम उठाए जाएंगे।
उद्योग संगठन सीओएआई के एक कार्यक्रम में सिंधिया ने बताया कहा कि मोबाइल सेवाओं को 2030 तक 2,000 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी और कैबिनेट के फैसले से रेडियो तरंगों की कुल मात्रा 1,587 मेगाहर्ट्ज हो जाएगी। उन्होंने बताया, दूरसंचार उद्योगों की जरूरतों के लिए एक दिन पहले मंत्रिमंडल ने 687 मेगाहर्ट्ज की रिफार्मिंग को मंजूरी दे दी है, जो हमें 900 मेगाहर्ट्ज से 1,587 मेगाहर्ट्ज तक ले जाएगा। इसमें से 320 (मेगाहर्ट्ज) तुरंत जारी किया जाएगा, कुछ अगले साल के अंत तक और कुछ 2028-29 के अंत तक। यह हमें 2030 की जरूरतों के लिहाज से तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि उद्योग की आवश्यकताएं पूरी हों और देश के डिजिटल दूरसंचार परिदृश्य में कोई बाधा न आए। सिंधिया ने कहा, इसके बाद भी करीब 300 मेगाहर्ट्ज का अंतर रह जाता है। सचिवों की समिति इसके दूसरे दौर पर काम कर रही है। रिपोर्ट इस साल के मध्य तक आ जाएगी। हम यह सुनिश्चित करने के लिए काम करेंगे कि भारत में हमारे डिजिटल दूरसंचार परिदृश्य के विकास में कोई बाधा न आए।
सरकार केआईओसीएल-एनएमडीसी विलय पर विचार कर रही: कुमारस्वामी
सरकार पेलेट निर्माता केआईओसीएल का लौह अयस्क क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एनएमडीसी के साथ विलय करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय इस्पात मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि केआईओसीएल की हालत गंभीर है।
उन्होंने यहां राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के लिए 11,440 करोड़ रुपये के पुनरुद्धार पैकेज की घोषणा करने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन के अवसर पर कहा, "केआईओसीएल और एनएमडीसी के विलय पर विचार किया जा रहा है। केआईओसीएल ने भी घाटा होने की सूचना दी है।" मंत्री ने कहा कि यह स्थिति राज्य (कर्नाटक) सरकार के असहयोग के कारण उत्पन्न हुई है।
इस्पात मंत्रालय के अधीन केआईओसीएल लिमिटेड, कर्नाटक के मंगलुरु में 3.5 मिलियन टन प्रतिवर्ष (एमटीपीए) क्षमता का आयरन-ऑक्साइड पेलेट संयंत्र और 2.16 लाख टन प्रतिवर्ष पिग आयरन के निर्माण के लिए एक ब्लास्ट फर्नेस इकाई संचालित करता है। एनएमडीसी भी इस्पात मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एक इकाई है। यह भारत की लौह अयस्क की 20 प्रतिशत मांग को पूरा करती है।