Capex: वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय 25 प्रतिशत बढ़ेगा, जेफरीज का दावा
Jefferies Report: जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, चुनावों के दौरान लोकलुभावन योजनाओं में वृद्धि के बावजूद, केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करने के प्रति प्रतिबद्ध है। रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार की खर्च प्राथमिकताएं एक संतुलित दृष्टिकोण दिखाती हैं। जेफरीज ने और क्या कहा है आइए जानें।
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जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में केंद्र सरकार के पूंजीगत व्यय में साल-दर-साल आधार पर 25 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि होने की उम्मीद है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार के कुल व्यय में भी 15 प्रतिशत का इजाफा हो सकता है। चुनावों के दौरान लोकलुभावन योजनाओं में वृद्धि के बावजूद, केंद्र सरकार बुनियादी ढांचे के विकास में निवेश करने के प्रति प्रतिबद्ध है। रिपोर्ट के अनुसार, जहां लोकलुभावन नीतियों ने गति पकड़ी है, खासकर राज्यों के चुनावों के दौरान, केंद्र सरकार की खर्च प्राथमिकताएं एक संतुलित दृष्टिकोण दिखाती हैं।
जेफरीज को उम्मीद है कि 31 मार्च 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष की दूसरी छमाही में केंद्र सरकार का कुल व्यय साल दर साल आधार पर लगभग 15%बढ़ेगा, जबकि पूंजीगत व्यय में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी। लोकलुभावन नीतियों के बावजूद सरकार पूंजीगत व्यय पर अधिक खर्च कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य चुनावों में मुफ्त में दी जाने वाली योजनाओं की बढ़ती सफलता, जैसे कि महाराष्ट्र का कल्याण कार्यक्रम जिसकी लागत सालाना 460 अरब रुपये (राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 प्रतिशत) है, लोकलुभावनवाद की धारणा के संदर्भ में चिंता पैदा करती है।
रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चला है कि 28 भारतीय राज्यों में से 14 में पहले से ही ऐसी ही योजनाएं हैं, जो लगभग 12 करोड़ परिवारों को कवर करती हैं और जिनकी कुल लागत भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 0.7-0.8 प्रतिशत है। हालांकि, केंद्र सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए दीर्घकालिक आर्थिक संपत्ति बनाने पर बना हुआ है, जो निरंतर विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
वित्तीय बाजारों पर भी रिपोर्ट में टिप्पणी की गई है। इसके अनुसार भारतीय शेयर बाजार हाल ही में हुए सुधार के बाद स्थिर हो रहा है, खासकर मिड-कैप सेगमेंट में। विदेशी निवेशकों ने पिछले दो महीनों में 12.5 अबर डॉलर से अधिक मूल्य के भारतीय इक्विटी शेयर बेचे हैं, जो ऐतिहासिक मानकों के हिसाब से एक राशि राशि है- लेकिन घरेलू निवेशकों ने इस निकासी को बहुत हद तक पचा लिया है।अक्तूबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में रिकॉर्ड प्रवाह देखा गया, उस दौरान शेयर बाजार में सुधार हो रहा था।
रिपोर्ट ने जोर दिया कि मजबूत घरेलू प्रवाह भारत के बाजारों के लिए एक आश्वस्त करने वाला कारक है। लोकलुभावन उपायों से जुड़ी चिंताओं बावजूद सरकारी पूंजीगत व्यय और मजबूत स्थानीय निवेश का संयुक्त प्रभाव एक स्थिर दृष्टिकोण का सुझाव देते हैं।