फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   CEA says US tariff impact will fade within 6 months; urges private sector to step up for India

CEA: अमेरिकी टैरिफ का असर छह महीने से अधिक नहीं, निजी क्षेत्र को भारत के लिए और अधिक सोचना होगा, बोले सीईए

Wed, 13 Aug 2025 05:37 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 13 Aug 2025 05:37 PM IST
विज्ञापन
CEA says US tariff impact will fade within 6 months; urges private sector to step up for India
वी. अनंत नागेश्वरन, मुख्य आर्थिक सलाहकार - फोटो : ANI

अमेरिका की टैरिफ के कारण आने वाली चुनौतियां अगली एक या दो तिमाहियों में समाप्त हो जाएंगी। केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने बुधवार को यह दावा किया। उन्होंने निजी क्षेत्र से और अधिक कोशिश करने की अपील की क्योंकि देश अन्य दीर्घकालिक चुनौतियों से निपट रहा है।

विज्ञापन


वित्त वर्ष 2025 में विकास दर में मंदी दिखी। यह वित्त वर्ष 2024 के 9.2 प्रतिशत से घटकर 6.5 प्रतिशत रह गई। इसके लिए कड़ी ऋण स्थितियों और नकदी की कमी को जिम्मेदार ठहराया। नागेश्वरन ने आगे कहा कि सही कृषि नीतियां वास्तविक जीडीपी वृद्धि में 25 प्रतिशत इजाफा कर सकती हैं।
विज्ञापन


अमेरिकी टैरिफ पर नागेश्वरन ने कहा कि इससे दूसरे और तीसरे दौर का असर भी आएगा। यह रत्न और आभूषण, झींगा और वस्त्र जैसे क्षेत्रों पर पहले दौर के प्रभाव के बाद आएगा। इससे निपटना "अधिक कठिन" होगा। नागेश्वरन ने कहा कि सरकार स्थिति से अवगत है और प्रभावित क्षेत्रों के साथ बातचीत शुरू हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों और हफ्तों में नीति निर्माताओं की प्रतिक्रिया सामने आएगी, लेकिन लोगों को धैर्य रखना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस महीने के अंत में व्यापार वार्ता के लिए अमेरिकी अधिकारियों के भारत आने की अटकलों के बीच नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर पुतिन के बीच अलास्का में होने वाली बैठक का भी टैरिफ के प्रभाव पर असर पड़ने की संभावना है।

वर्तमान में विश्व स्तर पर चीजें बहुत अस्थिर

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के बारे में कोई भी विवरण देने से इनकार करते हुए शिक्षाविद से सलाहकार बने नागेश्वरन ने कहा कि इस समय विश्व स्तर पर चीजें बहुत अस्थिर हैं। भारत और अमेरिका के  संबंध सहयोग से गतिरोध की ओर जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि मौजूदा स्थिति एक या दो तिमाहियों में सुधर जाएगी। मुझे नहीं लगता कि लंबे समय के परिदृश्य में भारत पर टैरिफ प्रभाव उतना महत्वपूर्ण होगा, लेकिन थोड़े समय तक इसका कुछ प्रभाव पड़ेगा।"

उन्होंने कहा कि कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अधिक टैरिफ लगाने का फैसला क्यों किया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या यह ऑपरेशन सिंदूर का नतीजा है या इससे भी अधिक रणनीतिक बात है।

हालांकि, सीईए ने कहा कि टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बीच हमें अधिक "महत्वपूर्ण चुनौतियों" से अनजान नहीं रहना चाहिए। इन चुनौतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का प्रभाव, महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक देश पर निर्भरता और उनका प्रसंस्करण व आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करना शामिल है।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने मौजूदा परिस्थितियों के बीच निजी क्षेत्र से और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "क्योंकि हम इन दीर्घकालिक चुनौतियों से निपट रहे हैं।" सीईए ने वादा किया कि सार्वजनिक नीति चुनौतियों के बीच सुविधाकर्ता की भूमिका निभाएगी।

निजी क्षेत्र को अनुसंधान के क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाना होगा

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने भारतीय उद्योग जगत को संबोधित करते हुए कहा, "आने वाले वर्षों में हमारे सामने आने वाली बड़ी रणनीतिक चुनौतियों को देखते हुए निजी क्षेत्र को भी बहुत कुछ सोचना होगा। निजी क्षेत्र को अगली तिमाही के बजाय दीर्घकालिक दृष्टिकोण के बारे में सोचना होगा। इसके कारण ही वर्तमान में हमारे सामने कई चुनौतियां आ रही हैं।" हालांकि, सीईए ने विषय पर और अधिक विस्तार से बात नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसंधान के लिए धन आवंटित किया है, अब निजी क्षेत्र को इस क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाना होगा।

देश की चुनौतियों से निपटने में निजी क्षेत्र को करनी होगी मदद

सीईए ने कहा कि भारतीय युवा अत्यधिक स्क्रीन उपयोग, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सेवन आदि के कारण शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इससे लोगों में चिंताएं और यहां तक कि आत्महत्या के विचार भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए निजी क्षेत्र की मदद मांगी। उन्होंने वित्त वर्ष 2026 में निजी क्षेत्र की ओर से किए गए पूंजीगत व्यय का स्वागत किया और कहा कि अगले वर्ष फरवरी में जारी होने वाले आंकड़े इसकी पुष्टि करेंगे।

देश में खपत अच्छी स्थिति में: मुख्य आर्थिक सलाहकार

यूपीआई उपयोग के आंकड़ों की ओर इशारा करते हुए, मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि खपत की स्थिति 'काफी अच्छी' है। शहरी खपत के बारे में बोलते हुए सीईए ने खेद जताया किया कि सेवाओं की खपत को दर्शाने के लिए कोई उचित डेटा स्रोत नहीं है। नागेश्वरन ने यह भी कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों की आय से जानकारी प्राप्त करना भी सही मापदंड नहीं हो सकता, क्योंकि खपत गैर-सूचीबद्ध क्षेत्र की ओर बढ़ रही है।

सीईए ने कहा कि अर्थव्यवस्था में समग्र संसाधन जुटाने में कोई कमी नहीं दिख रही है। उन्होंने सभी से बैंकों के ऋण वृद्धि, वाणिज्यिक पत्र जारी करने और आईपीओ के लिए धन जुटाने पर एक साथ ध्यान देने को कहा। चीन के बारे में नागेश्वरन ने कहा, "हमें सुरक्षा पहलू को भी समझना होगा और 100 अरब डॉलर के व्यापार घाटे को सिर्फ़ संख्या से आगे देखना होगा।" समाधान के तौर पर, आयात के स्रोतों में विविधता लाने की ज़रूरत है और मुख्य आर्थिक सलाहकार ने ज़ोर देकर कहा कि इसमें निजी क्षेत्र की भूमिका होगी।

भारत को तय करना होगा- वह दूसरे देशों पर निर्भर रहे या जरूरी संसाधन जुटाने की तैयारी करे

चीन का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि केवल एक देश ही महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति करता है। ये खनिज अर्धचालक व कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि इनकी आपूर्ति 'गंभीर रूप से अस्थिर' है। उन्होंने कहा, "हम कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता के बाद महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य आयातों के मामले में भी दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रह सकते। नागेश्वरन ने कहा, "भारत के नीति निर्धारकों को यह तय करना होगा कि वे दूसरे देशों पर हमेशा निर्भर रहना चाहते हैं या फिर इससे बचने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"



सीईए ने कहा कि एआई श्रम विस्थापन का कारण बनेगा। उन्होंने एआई को अपनाने में सावधानी बरतने की वकालत की और कहा कि "हमें उन क्षेत्रों का चयन करना होगा जिनमें हम एआई को तैनात और उपयोग करने की अनुमति देते हैं। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि हम ऐसा किस गति से करते हैं"। उन्होंने कहा कि अगले 10-12 वर्षों में प्रतिवर्ष कम से कम 80 लाख नए रोजगार सृजित करने की जरूरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed