FMCBG: विश्व कर व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और टैक्स चोरी रोकने पर सहमति, ऋण की विसंगतियों पर हुई चर्चा
G-20: आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुजरात के गांधीनगर में तीसरी जी 20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक के दौरान कहा कि सीबीडीसी में निर्बाध सीमा पार भुगतान की सुविधा की संभावना है। इस एजेंडे को आगे ले जाने की आवश्यकता है। आईएमएफ सीबीडीसी से उत्पन्न मैक्रो-वित्तीय चुनौतियों पर भी काम कर रहा है।
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विस्तार
जी-20 वित्त मंत्रियों ने मंगलवार को वैश्विक कर मानदंडों में बदलाव की रणनीतियों को लागू करने पर चर्चा की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां जहां भी काम करें, वहां कर का भुगतान करें। भारत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय बैठक में भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे निम्न और मध्यम आय वाले देशों की मदद करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए सदस्यों से चोरी रोकने के उपायों के कार्यान्वयन के संबंध में विचार आमंत्रित किए। वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नरों को टू पिलर सॉल्यूशन के कार्यान्वयन का समर्थन करने और भारत की अध्यक्षता में जी-20 के तहत वैश्विक कर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्षमता निर्माण की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए भी आमंत्रित किया गया।
The cultural programme was planned in line with #MissionLiFE announced by Hon'ble PM @narendramodi, which promotes a sustainable way of living.
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All the Finance Ministers & Governors were glad to see the issue of sustainable development depicted during the cultural programme,… pic.twitter.com/HHzWioPbbt — Nirmala Sitharaman Office (@nsitharamanoffc) July 18, 2023
जी-20 अध्यक्ष के तौर पर भारत वैश्विक राजनीतिक तनाव और महामारी के कारण विकासशील देशों के सामने आने वाली गंभीर ऋण समस्याओं से निपटने के तरीकों पर जोर दे रहा है। क्योंकि, अगर इस तरफ ध्यान नहीं दिया गया, तो विकासशील देशों की बढ़ती ऋण समस्याएं वैश्विक मंदी पैदा कर सकती हैं। इससे लाखों लोगों अत्यंत गरीबी की ओर जा सकते हैं।
पिछले साल दिसंबर में विश्व बैंक ने कहा था कि दुनिया के सबसे गरीब देशों पर 62 अरब डॉलर का ऋण बकाया है, जो 2021 में 46 अरब डॉलर था। इस तरह से यह दो वर्ष में 35 फीसदी बढ़ गया है। बढ़ते कर्ज की वजह से ये देश दिवालिया हो सकते हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। इससे बचाव जरूरी है।
#WATCH | With regard to cross-border payments, it was recognised that there is great potential for CBDCs (Central Bank Digital Currency) to facilitate seamless cross-border payments and there is a need to take this agenda forward. IMF is also working on the macro-financial… pic.twitter.com/IuVhnVw4Ju
— ANI (@ANI) July 18, 2023
निर्मला सीतारमण ने चीन के वित्त मंत्री के सामने उठाया कर्ज संकट का मुद्दा
वित्त मंत्री सीतारमण ने जी-20 बैठक से इतर चीनी समकक्ष लियु कुन से द्विपक्षीय वार्ता में वैश्विक कर्ज संकट का मुद्दा उठाया। चीन इस संकट से गहराई से जुड़ा है, इसका हल निकालने में उसे रचनात्मक भूमिका निभाने को कहा। दोनों मंत्री इस बात पर सहमत हुए किे आर्थिक वृद्धि और विकास के लिए अच्छा दोस्ताना कारोबारी माहौल बनाए रखना जरूरी है। इसके साथ ही दोनों ने अपनी अर्थव्यवस्थाओं, महंगाई और परस्पर कारोबार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। कुन ने जी-20 की भारत की अध्यक्षता की सराहना की। उन्होंने उम्मीद जताई कि फाइनेंस ट्रैक के तहत जिन मसलों पर चर्चा हुई है, उन पर आम सहमति के साथ बैठक हो। वहीं, सीतारमण ने भारत की अध्यक्षता में पहली बार बनाए गए सतत विकास कार्यसमूह की सह-अध्यक्षता के लिए चीन के प्रयासों को सराहा।
जलवायु परिवर्तन से निपटने को 2030 तक तीन लाख करोड़ डॉलर
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2030 तक दुनिया को 3 लाख करोड़ डॉलर के अतिरिक्त निवेश की जरूरत है। सतत विकास लक्ष्यों को लेकर भारत की अध्यक्षता में पहली बार बनाए गए स्वतंत्र पैनल ने बताया कि दुनिया को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। खासतौर पर 2030 तक करीब 3 लाख करोड़ डॉलर का निवेश करना होगा। अर्थशास्त्री लॉरेंस समर और एनके सिंह की अध्यक्षता में बनाए गए पैनल ने सुझाव दिया है कि बहुपक्षीय बैंकों के जरिये सतत विकास लक्ष्यों और जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्षम ढांचे के विकास के लिए निवेश में तेजी लाने की जरूरत है।
साझा बयान जारी नहीं...
दो दिनी बैठक रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे को साझा बयान में शामिल करने को लेकर बिना साझा बयान के संपन्न हुई। साझा वक्तव्य की जगह वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अध्यक्षीय भाषण के साथ बैठक का समापन किया। अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई पश्चिमी देश चाहते थे कि साझा बयान में यूक्रेन हमले पर रूस की निंदा की जाए। इस पर भारत, चीन व रूस सहमत नहीं थे।
कर्ज का तीव्र और प्रभावी पुनर्गठन जरूरी : आईएमएफ प्रमुख
छोटे व विकासशील देशों के कर्ज संकट को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा, इस संकट से निपटने के लिए तेज और प्रभावी प्रक्रिया अपनानी होगी। उन्होंने कहा, कर्ज का तीव्र व प्रभावी पुनर्गठन आवश्यक है।