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सुप्रीम कोर्ट: एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ फैसला सुरक्षित, बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही रोकने का मामला
Thu, 26 Sep 2024 02:09 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Thu, 26 Sep 2024 02:09 PM IST
सार
Supreme Court: प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) को मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
उच्चतम न्यायालय ने शैक्षणिक प्रौद्योगिकी कंपनी बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही रोकने के एनसीएलएटी के आदेश के विरुद्ध अमेरिकी कंपनी की याचिका पर फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया।
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प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिवाला समाधान पेशेवर (आईआरपी) को मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा। पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।
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न्यायालय ने अमेरिकी कंपनी ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी की याचिका पर विचार किया और आईआरपी से कहा कि वह बायजू मामले से निपटने के लिए ऋणदाताओं की समिति की बैठक के साथ आगे न बढ़े।
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शीर्ष अदालत ने बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए दिवाला अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के फैसले पर सवाल उठाया था, जिसमें बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था और बीसीसीआई के साथ 158.9 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान को मंजूरी दे दी गई थी।
पीठ ने पाया कि राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) ने शैक्षणिक प्रौद्योगिकी कंपनी के खिलाफ दिवाला कार्यवाही बंद करते समय अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।
न्यायालय ने इस बात का संकेत दिया कि वह विवाद को नए सिरे से निर्णय के लिए वापस भेज सकता है।
एनसीएलएटी ने दो अगस्त को भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के साथ 158.9 करोड़ रुपये के बकाया निपटान को मंजूरी देने के बाद बायजू के खिलाफ दीवाला कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया था।
यह फैसला बायजू के लिए बड़ी राहत लेकर आया, क्योंकि इसने प्रभावी रूप से इसके संस्थापक बायजू रवींद्रन को फिर से नियंत्रक स्थिति में ला दिया। हालांकि, यह राहत थोड़े समय की रही बायजू को झटका देते हुए शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को एनसीएलएटी के फैसले पर रोक लगा दी थी।