Biz Updates: RBI का बड़ा एक्शन; महालक्ष्मी क्रेडिट बैंक का लाइसेंस रद्द
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रिज़र्व बैंक ने कर्नाटक के श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक की बिगड़ती आर्थिक स्थिति के कारण उसका लाइसेंस रद्द कर दिया है।रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि कर्नाटक के को-ऑपरेटिव सोसाइटीज़ के रजिस्ट्रार से भी बैंक को बंद करने और एक लिक्विडेटर (समापक) नियुक्त करने का आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया है। बैंक के बंद होने (लिक्विडेशन) पर, लगभग 97.9 प्रतिशत जमाकर्ताओं को 'डिपॉज़िट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' (DICGC) से अपनी जमा राशि का पूरा पैसा मिल जाएगा।
लाइसेंस रद्द करने का कारण बताते हुए RBI ने कहा कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी और कमाई की संभावना नहीं है और यह 'बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949' के कुछ प्रावधानों का पालन नहीं करता है। RBI ने कहा, 'अपनी मौजूदा आर्थिक स्थिति के साथ बैंक अपने मौजूदा जमाकर्ताओं को पूरी रकम का भुगतान करने में असमर्थ होगा।' साथ ही कहा कि बैंक का कामकाज जारी रखना जमाकर्ताओं के हितों के लिए नुकसानदेह होगा।
लाइसेंस रद्द होने के बाद, गोकक (कर्नाटक) में स्थित श्री महालक्ष्मी अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट बैंक को गुरुवार से 'बैंकिंग' का कारोबार करने से रोक दिया गया है। इस कारोबार में जमा स्वीकार करना और जमा राशि का भुगतान करना जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
भारत और ब्रिटेन के बीच हुए व्यापार समझौते के तहत आने वाले पहले 15 वर्षों में भारत ब्रिटेन से कुल 3.78 लाख पारंपरिक पेट्रोल और डीजल इंजन वाली यात्री कारों के आयात की अनुमति देगा। इसमें सिर्फ महंगी या खास कारें ही नहीं, बल्कि आम लोगों के इस्तेमाल वाली सस्ती और मध्यम श्रेणी कारें भी शामिल होंगी। इन कारों को भारत में लाने पर सामान्य कर (टैक्स) की तुलना में कम सीमा शुल्क देना होगा।
इस समझौते के तहत कारों और दूसरे वाहनों के आयात पर लगने वाला कर (टैरिफ) लगभग 110 फीसदी से घटकर 10 फीसदी तक हो जाएगा। साथ ही दोनों देशों के बीच तय सीमा के अनुसार ही गाड़ियों के आयात और निर्यात की अनुमति दी जाएगी, यानी एक निश्चित संख्या (कोटा) से ज्यादा गाड़ियां नहीं लाई या भेजी जा सकेंगी।
बुधवार को जारी इंडिया-ब्रिटेन सीईटीए दस्तावेज के अनुसार, भारत को ब्रिटेन के इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन वाली यात्री कारों के बाजार में छठे वर्ष से बिना किसी शुल्क के निर्यात करने की सुविधा मिलेगी। यह सुविधा उन कारों पर लागू होगी, जिनकी कीमत 20 हजार से 80 हजार ब्रिटिश पाउंड के बीच है। धीरे-धीरे इस योजना के तहत निर्यात का कोटा बढ़ता जाएगा और 15वें वर्ष तक यह बढ़कर 88 हजार गाड़ियों तक पहुंच जाएगा और इसके बाद भी यह सुविधा जारी रहने की संभावना है।
इससे टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुजुकी जैसी भारतीय कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों ने घोषणा की है कि व्यापक आर्थिक और व्यापार साझेदारी समझौता (सीईटीए) 15 जुलाई से लागू किया जाएगा।
45 से अधिक देशों में फैली भारतीय आम की मिठास, अमेरिका को 30% ज्यादा बढ़ेगा निर्यात
भारत का आम निर्यात इस सीजन में 45 से ज्यादा देशों तक फैल चुका है। खास बात है कि अमेरिका को पिछले साल के मुकाबले इस सीजन में ज्यादा आम निर्यात किए गए हैं, जबकि यह सीजन खत्म होने में अभी एक महीने बाकी हैं।
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) ने कहा, मौजूदा रुझान के आधार पर दुनिया के सबसे बड़े आम आयातक देश अमेरिका को होने वाला निर्यात इस सीजन में 30 फीसदी से ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है।
एपीडा चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा, अमेरिका के प्रमुख शहरों में आम की बिक्री बढ़ाने के लिए कैंपेन शुरू किए गए हैं। इन शहरों में सिएटल, लॉस एंजिल्स, वाशिंगटन, न्यूयॉर्क और अटलांटा शामिल हैं। यह कैंपेन सिर्फ अमेरिका तक ही सीमित नहीं है। इस साल चेक रिपब्लिक, स्पेन, मलयेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान समेत करीब 20 देशों में प्रोत्साहन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। उम्मीद है कि इन प्रयासों से अगले एक-दो वर्षों में भारत का आम निर्यात दोगुना हो जाएगा।
भारत दुनिया के शीर्ष-10 कृषि निर्यातकों में शामिल
देव ने कहा, भारत के निर्यात बास्केट में पिछले कुछ वर्षों में काफी विविधता आई है। आम के निर्यात में यह बढ़ोतरी भारत के कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात में जबरदस्त बढ़त के बीच हुई है, जो बीते वित्त वर्ष में 53 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। इससे भारत को अमेरिका, ब्राजील, चीन और यूरोपीय संघ के देशों से मिल रही टक्कर के बावजूद दुनिया के शीर्ष-10 कृषि निर्यातकों में अपनी जगह बनाए रखने में मदद मिली है।