{"_id":"61f28ac763f1216f7270f96f","slug":"budget-should-focus-on-bridging-widened-inequality-in-economy-creating-jobs-says-rbi-former-governer-d-subbarao","type":"story","status":"publish","title_hn":"Budget 2022: अर्थव्यवस्था में असमानता को पाटने और रोजगार सृजन पर हो जोर, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सुब्बाराव का सुझाव","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Budget 2022: अर्थव्यवस्था में असमानता को पाटने और रोजगार सृजन पर हो जोर, रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सुब्बाराव का सुझाव
Thu, 27 Jan 2022 05:36 PM IST
दीपक चतुर्वेदी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीपक चतुर्वेदी
Updated Thu, 27 Jan 2022 05:36 PM IST
सार
Union Budget 2022 Latest News: देश का आम बजट 1 फरवरी 2022 को पेश होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पेश करेंगी। इस बीच रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा कि सरकार को आगामी बजट में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विज्ञापन
बजट 2022
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश का आम बजट 1 फरवरी 2022 को पेश होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे पेश करेंगी। इस बीच रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा कि सरकार को आगामी बजट में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
विज्ञापन
सुब्बाराव ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए कर कटौती की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। सुब्बाराव ने यह भी कहा कि अनुभव से पता चलता है कि संरक्षणवादी दीवारों के साथ निर्यात को बढ़ावा देने की नीति शायद ही कभी प्रतिस्पर्धी होती है, इसलिए आयात शुल्कों को घटाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वृद्धि को गति देना हर बजट का मकसद होता है और इस बजट का भी उद्देश्य यही होना चाहिए।
विज्ञापन
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने कहा कि हमें रोजगार आधारित वृद्धि की जरूरत है। अगर इस बजट के लिए कोई थीम है, तो वह रोजगार ही होनी चाहिए। सुब्बाराव ने कहा कि कोरोना के प्रकोप और मंदी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। इसके अलावा आर्थिक गतिविधियों के श्रम प्रधान अनौपचारिक क्षेत्र से पूंजी प्रधान औपचारिक क्षेत्र की ओर केंद्रित होने से भी रोजगार का संकट पैदा हुआ। रोजगार पैदा करने के लिए वृद्धि जरूरी है, लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। निर्यात पर जोर देना भी जरूरी है क्योंकि निर्यात बढ़ाने से न सिर्फ विदेशी मुद्रा मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
विज्ञापन