Tata: तूफान से दूर रहा बॉम्बे हाउस, बिना हंगामा खत्म हुई ट्रस्ट बोर्ड की बैठक; नियुक्तियों-विवाद पर चर्चा नहीं
रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि के एक दिन बाद टाटा समूह की बैठक सबकी निगाहों और सुर्खियों में थी। टाटा ग्रुप, बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है। टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा संस को नियंत्रित करता है, उसके ट्रस्टीज में गहरे मतभेद हैं। विवाद बहुतेरे हैं मगर न बोर्ड में नियुक्तियों पर बात हुई और न ही झगड़े वाला एजेंडा खुला।
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दसियों तूफान देख चुका और सैकड़ों किस्सों को अपने में छुपाए 101 साल पुराना बांबे हाउस शुक्रवार को शांत था। टाटा समूह के इस मुख्यालय में कयास तो तूफान के थे मगर 38,835 करोड़ के टाटा समूह के मालिक टाटा संस को चलाने वाले टाटा ट्रस्ट के बोर्ड की बैठक से कोई सनसनी नहीं निकली। विवाद बहुतेरे हैं मगर न बोर्ड में नियुक्तियों पर बात हुई और न ही झगड़े वाला एजेंडा खुला। सहमति व सौहार्द के झंडे लहराते बैठक समाप्त हो गई।
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रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि के बाद हुई बैठक
रतन टाटा की पहली पुण्यतिथि के एक दिन बाद यह बैठक सबकी निगाहों और सुर्खियों में थी। टाटा ग्रुप, बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है। टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा संस को नियंत्रित करता है, उसके ट्रस्टीज में गहरे मतभेद हैं। 10 अक्तूबर की बोर्ड मीटिंग में गवर्नेस, उत्तराधिकार, बोर्ड नियुक्तियां और टाटा संस की लिस्टिंग जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी थी। मीटिंग लंबी थी मगर कल्याण योजनाओं पर फोकस रहा। मीटिंग को 'बिजनेस एज यूजुअल' कहा गया। टाटा ट्रस्ट की बोर्ड बैठक से अलग शापूरजी पलॉन्जी (एसपी) ग्रुप ने टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग की मांग को लेकर एक बयान जारी किया। टाटा ट्रस्ट के भीतर झगड़े की सबसे बड़ी वजह यही है। इस एजेंडे पर आज चर्चा होनी थी मगर हुई नहीं। शापूरजी ग्रुप के पास टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। समूह का कहना है कि यह पारदर्शिता का नैतिक तकाजा है कि टाटा संस की पब्लिक लिस्टिंग की जाए ताकि आरबीआई नियमों का पालन हो। टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग का विरोध कर रहा है क्योंकि इससे टाटा संस पर उनका नियंत्रण कमजोर हो सकता है।
दो गुटों में बंटा है टाटा ट्रस्ट
नोएल टाटा गुट में वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह हैं जबकि दूसरा गुट मेहली मिस्री का है जिसमें प्रमीत जावेरी, जहांगीर एच.सी. जहांगीर, डेरियस खंबाटा हैं। यह गुट पारदर्शिता मॉडर्न गवर्नेस, सख्त निगरानी और टाटा संस की लिस्टिंग की मांग कर रहा है। टाटा ट्रस्ट की एकजुटता में आग लगाने वाला दूसरा मुद्दा बोर्ड में नियुक्तियां और गवर्नेस है। ट्रस्टीज के बीच बोर्ड अपॉइंटमेंट्स और फैसले लेने की प्रक्रिया पर तलवारें खिंची हैं। ताजा विवाद विजय सिंह के टाटा संस बोर्ड में दोबारा अपॉइंटमेंट को रोकने से शुरू हुआ। नोएल टाटा की सुझाई नियुक्तियां भी रुकी हुई हैं। हाल में ही टाटा इंटरनेशनल लि. (टीआईएल) में 1,000 करोड़ के निवेश का निर्णय हुआ। यह फैसला टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा के नेतृत्व में किया गया। फैसले के तरीके ने पारदर्शिता में कमी की शिकायत को हवा दी। टाटा संस के चेयरमैन, एन. चंद्रशेखरन दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाते हैं, उनका कार्यकाल पांच साल बढ़ाने पर दोनों गुट सहमत हुए थे।
विवाद सरकार की चौखट तक पहुंचा
गृह मंत्री अमित शाह व वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नोएल टाटा, चंद्रशेखरन, वेणु श्रीनिवासन और डेरियस खंबाटा से मुलाकात की। सरकार को चिंता है कि समूह में कुछ ऊंच-नीच हुआ तो निवेशकों का भरोसा डगमगा जाएगा। यह इस पेशबंदी का ही असर था कि शुक्रवार की बैठक शांतिपूर्ण रही, सौहार्द कितना था यह तो वक्त बताएगा।
मीटिंग में हुए ये फैसले
- हेल्थकेयर फंडिंग : 3 प्रोजेक्ट्स पर सहमति।
- बोर्ड में कोई बदलाव नहीं: विजय सिंह का
- दोबारा नियुक्ति रुकी, वेणु श्रीनिवासन पर चर्चा नहीं।
- सहमति की कोशिश: इंडिपेंडेंट
- डायरेक्टर्स पर मतभेद सुलझाने का वादा।
- लिस्टिंग टली : कोई औपचारिक बहस नहीं।