{"_id":"6a74e68d7e55a9de360f8b57","slug":"biz-updates-business-news-in-hindi-upi-policies-gtri-share-market-economy-foreign-exchange-2026-08-07","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Biz Updates: 'अमेरिकी दबाव में UPI की नीतियां न बदले भारत, भुगतान व्यवस्था की स्वायत्तता बनाए रखे', बोला GTRI","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Biz Updates: 'अमेरिकी दबाव में UPI की नीतियां न बदले भारत, भुगतान व्यवस्था की स्वायत्तता बनाए रखे', बोला GTRI
Fri, 07 Aug 2026 03:46 AM IST
Devesh Tripathi
बिजनेस डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क,अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 07 Aug 2026 03:46 AM IST
विज्ञापन
बिजनेस न्यूज एंड अपडेट्स
- फोटो : amarujala.com
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने गुरुवार को कहा कि भारत को अमेरिका के दबाव में आकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जुड़ी अपनी नीतियों में बदलाव नहीं करना चाहिए। देश को प्रतिस्पर्धा, नीतिगत स्वायत्तता और अपनी भुगतान व्यवस्था की दीर्घकालिक मजबूती की रक्षा करनी चाहिए।
इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन संबंधी विधेयक पारित किया। इसके तहत सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई तथा अधिसूचित अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।
जीटीआरआई ने कहा कि फिलहाल बैंक और भुगतान प्रणाली से जुड़े सेवा प्रदाता यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड जैसे निर्धारित भुगतान माध्यमों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं ले सकते। थिंक टैंक के अनुसार, शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नीति ने यूपीआई के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। इसकी वजह से उपभोक्ता, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले बिना किसी लेनदेन शुल्क के भुगतान कर और प्राप्त कर सके हैं।
विज्ञापन
हालांकि, जीटीआरआई ने कहा कि बैंकों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और भुगतान कंपनियों को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, सर्वर, विवाद निपटान और भुगतान प्रणाली के विस्तार पर लगातार निवेश करना पड़ता है। जीटीआरआई ने कहा, "इसलिए व्यवस्था के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसके लिए सभी व्यापारियों पर सामान्य शुल्क लगाना जरूरी नहीं है।"
उसने कहा, "इसके विकल्पों में लक्षित बजटीय सहायता, सरकारी प्रोत्साहन, बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर शुल्क, वित्तीय सेवाओं से क्रॉस-सब्सिडी और केवल अधिक कारोबार वाले व्यापारियों पर सीमित शुल्क जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।" जीटीआरआई का दावा है कि यह विधायी बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका भारत की घरेलू डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की वर्ष 2026 की 'नेशनल ट्रेड एस्टीमेट रिपोर्ट ऑन फॉरेन ट्रेड बैरियर्स' में ब्राजील के पिक्स और भारत के यूपीआई तथा रुपे ढांचे की आलोचना की गई है।
विज्ञापन
इससे पहले गुरुवार को लोकसभा ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन संबंधी विधेयक पारित किया। इसके तहत सरकार को बैंकों और अन्य सेवा प्रदाताओं को यूपीआई तथा अधिसूचित अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा।
विज्ञापन
जीटीआरआई ने कहा कि फिलहाल बैंक और भुगतान प्रणाली से जुड़े सेवा प्रदाता यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड जैसे निर्धारित भुगतान माध्यमों पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं ले सकते। थिंक टैंक के अनुसार, शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) नीति ने यूपीआई के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। इसकी वजह से उपभोक्ता, छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले बिना किसी लेनदेन शुल्क के भुगतान कर और प्राप्त कर सके हैं।
विज्ञापन
हालांकि, जीटीआरआई ने कहा कि बैंकों, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) और भुगतान कंपनियों को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने, सर्वर, विवाद निपटान और भुगतान प्रणाली के विस्तार पर लगातार निवेश करना पड़ता है। जीटीआरआई ने कहा, "इसलिए व्यवस्था के लिए टिकाऊ वित्तीय मॉडल की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन इसके लिए सभी व्यापारियों पर सामान्य शुल्क लगाना जरूरी नहीं है।"
उसने कहा, "इसके विकल्पों में लक्षित बजटीय सहायता, सरकारी प्रोत्साहन, बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर शुल्क, वित्तीय सेवाओं से क्रॉस-सब्सिडी और केवल अधिक कारोबार वाले व्यापारियों पर सीमित शुल्क जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।" जीटीआरआई का दावा है कि यह विधायी बदलाव ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका भारत की घरेलू डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की वर्ष 2026 की 'नेशनल ट्रेड एस्टीमेट रिपोर्ट ऑन फॉरेन ट्रेड बैरियर्स' में ब्राजील के पिक्स और भारत के यूपीआई तथा रुपे ढांचे की आलोचना की गई है।
ट्राई सख्त: कंपनियों को अब 5जी इंटरनेट स्पीड का देना होगा हिसाब
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पहली बार 5जी नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। अब कंपनियों को 5जी इंटरनेट स्पीड का हिसाब देना होगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि 5जी संसाधनों के बंटवारे के कारण आम यूजर्स को खराब सेवा न मिले। दूरसंचार कंपनियों को 4जी, 5जी और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग टैरिफ तय करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। दूरसंचार नियामक ट्राई ने कहा, 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग आधारित प्लान में नेटवर्क के हर हिस्से को अलग टैरिफ श्रेणी माना जाएगा। कंपनियों को प्रत्येक हिस्से के लिए डाउनलोड और अपलोड स्पीड की अनिवार्य जानकारी देनी होगी। दावे गलत होने पर कार्रवाई होगी। स्लाइसिंग में एक 5जी नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांटा जाता है। हर हिस्से को जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाता है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पहली बार 5जी नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार के लिए नए नियमों का मसौदा जारी किया है। अब कंपनियों को 5जी इंटरनेट स्पीड का हिसाब देना होगा। साथ ही, यह सुनिश्चित करना होगा कि 5जी संसाधनों के बंटवारे के कारण आम यूजर्स को खराब सेवा न मिले। दूरसंचार कंपनियों को 4जी, 5जी और अन्य सेवाओं के लिए अलग-अलग टैरिफ तय करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है। दूरसंचार नियामक ट्राई ने कहा, 5जी नेटवर्क स्लाइसिंग आधारित प्लान में नेटवर्क के हर हिस्से को अलग टैरिफ श्रेणी माना जाएगा। कंपनियों को प्रत्येक हिस्से के लिए डाउनलोड और अपलोड स्पीड की अनिवार्य जानकारी देनी होगी। दावे गलत होने पर कार्रवाई होगी। स्लाइसिंग में एक 5जी नेटवर्क को कई वर्चुअल नेटवर्क में बांटा जाता है। हर हिस्से को जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाता है।