USA Visa: बाइडन प्रशासन ने जाते-जाते एच-1बी वीजा नियमों में ढील दी, भारतीय पेशेवरों को मिल सकता है लाभ
US Visa: अमेरिका में बाइडन सरकार ने वीजा नियमों में ढील दी है। नए नियम 17 जनवरी 2025 से लागू होंगे। उसके बाद वीजा की सभी याचिकाओं के लिए गैर-आप्रवासी कर्मचारी को फॉर्म I-129 का नया संस्करण भरना पड़ेगा। माना जा रहा है कि बदलाव से अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों को लाभ मिलेगा। आइए इस बारे में और जानें।
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अमेरिका में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने जाते-जाते एच-1बी वीजा के नियमों में ढील देने का फैसला किया है। सरकार के इस फैसले से अमेरिकी कंपनियों के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करना आसान हो जाएगा। बाइडन प्रशासन के इस निर्णय के बाद एफ-1 छात्र वीजा से एच-1बी वीजा में आसानी से बदलाव हो सकेगा। बाइडन सरकार के इस कदम से हजारों भारतीय तकनीकी पेशेवरों को लाभ मिलने की संभावना है। अमेरिका में इन दिनों सत्ता हस्तांकरण की प्रक्रिया चल रही है। नवनिर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी को दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने वाले हैं।
एच-1बी वीजा की मांग सबसे अधिक
एच-1बी वीजा सबसे अधिक मांग वाला एक गैर-आप्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनमें सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए इस वीजा पर निर्भर करती हैं। ऐसे में भारतीय आईटी पेशेवरों को बाइडन प्रशासन के इस फैसले से लाभ मिल सकता है।
गैर-लाभकारी व सरकारी अनुसंधान संगठनों को मिलेगा लाभ
मंगलवार को होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) की ओर से घोषित इस नियम का उद्देश्य विशेष पदों और गैर-लाभकारी व सरकारी अनुसंधान संगठनों के लिए नियमों को आधुनिक बनाकर नियोक्ताओं और श्रमिकों को अधिक लचीलापन प्रदान करना है। इन संगठनों के लिए एच-1बी वीजा की सीमाओं में छूट दी गई है।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन बदलावों से अमेरिकी नियोक्ताओं को अपनी व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुसार नियुक्ति करने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद मिलेगी। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 20 जनवरी को शपथ ग्रहण समारोह के बाद अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालेंगे।
एफ-1 वीजाधारक छात्रों को भी मिल सकेगा लाभ
डीएचएस के अनुसार, यह नियम वैसे एफ-1 वीजाधारक छात्रों के लिए लचीलापन लाएगा, जो अपनी स्थिति को एच-1बी में बदलना चाहते हैं। इससे अमेरिकी नागरिकता व आव्रजन सेवाओं (यूएससीआईएस) को उन अधिकांश व्यक्तियों के आवेदनों पर अधिक तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी, जिन्हें पहले एच1-बी वीजा के लिए मंजूरी मिल चुकी थी।
होमलैंड सिक्योरिटी के सचिव एलेजांद्रो एन मयोरकास ने कहा, "अमेरिकी व्यवसाय उच्च कुशल प्रतिभाओं की भर्ती के लिए एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर निर्भर हैं, जिससे देश भर के समुदायों को लाभ मिल रहा है।" उन्होंने कहा, "कार्यक्रम में ये सुधार नियोक्ताओं को वैश्विक प्रतिभाओं को नियुक्त करने के लिए अधिक लचीलापन प्रदान करेगा, यह हमारी आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा और उच्च कुशल श्रमिकों को नियुक्त करने में मदद करेगा।
एच-1बी वीजा कार्यक्रम को आधुनिक बनाने के लिए लिया गया निर्णय: यूएससीआईएस निदेशक
यूएससीआईएस के निदेशक उर एम. जादौ ने कहा, "एच-1बी वीजा कार्यक्रम 1990 में कांग्रेस की ओर से बनाया गया था और इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की बढ़ती अर्थव्यवस्था को समर्थन देने के लिए इसे आधुनिक बनाने की जरूरत थी।"
नए नियम 17 जनवरी 2025 से लागू होंगे। उसके बाद वीजा की सभी याचिकाओं के लिए गैर-आप्रवासी कर्मचारी को फॉर्म I-129 का नया संस्करण भरना पड़ेगा। यूएससीआईएस के माध्यम से डीएचएस के पास कानूनी रूप से प्रति वर्ष 65,000 एच-1बी वीजा जारी करने का अधिकार है। इसके अलावे उन्नत डिग्री वाले आवेदकों को अतिरिक्त 20,000 वीजा प्रदान किया जाता है। कई गैर-लाभकारी संगठनों को इस सीमा से छूट प्राप्त है।