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Eric Garcetti: भारत को बेहतर कराधान और नियामकीय ढांचे की जरूरत, बजट से पहले अमेरिकी राजदूत ने दी ये सलाह
Tue, 30 Jan 2024 08:46 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 30 Jan 2024 08:46 PM IST
सार
Eric Garcetti: इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) को संबोधित करते हुए गार्सेटी ने कहा कि अमेरिका ऐसे भारत को देखना चाहता है जो आत्मनिर्भरता को 'आत्ममुग्धता' ना मानता हो। अमेरिका भारत की आत्मनिर्भरता को भारतीय कंपनियों की ताकत के रूप में देखता है जो दुनिया के बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें।
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अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने मंगलवार को द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विस्तार के लिए भारत में बेहतर कराधान (Texation) और नियामकीय ढांचे की वकालत की और कहा कि भारत में सब कुछ करने की जरूरत है जिससे देश की वृद्धि की गति धीमी ना पड़े। अमेरिकी राजदूत ने कि भारत में करोबार की इच्छा रखने वाली कई अमेरिकी कंपनियों के लिए अपारदर्शी कॉरपोरेट कर व्यवस्था अब भी एक बाधा है और यदि भारत को अपना लक्ष्य हासिल करना है तो निर्यात नीतियों में बदलाव करना होगा।
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इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) को संबोधित करते हुए गार्सेटी ने कहा कि अमेरिका ऐसे भारत को देखना चाहता है जो आत्मनिर्भरता को 'आत्ममुग्धता' ना मानता हो। अमेरिका भारत की आत्मनिर्भरता को भारतीय कंपनियों की ताकत के रूप में देखता है जो दुनिया के बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकें। भारत-अमेरिका के बीच तेजी से बढ़ते संबंधों के विभिन्न पहलुओं का जिक्र करते हुए गार्सेटी ने कहा कि सहयोग का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिसमे अब कम नहीं किया जा रहा हो। उन्होंने कहा, 'अभी हमारा भारत के साथ 40 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है और चीन के साथ इससे भी बड़ा व्यापार घाटा है तथा हम चाहते हैं कि चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (भारत) स्थानांतरित हो।
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गार्सेटी ने कहा, "भारत में एफडीआई उस गति से नहीं आ रहा है, जिस गति से आना चाहिए। यह दक्षिण पूर्व एशिया के देशों जैसे वियतनाम और मैक्सिको जैसे देशों में जा रहा है।" गार्सेटी ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और अधिकारियों से कहा, "मैं स्वार्थी रूप से यहां (भारत) से और अधिक की अपेक्षा रखता हूं। मुझे आपकी मदद की आवश्यकता है। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि यह धारणा कि भारत में ही सब कुछ बनाना है, विकास की गति को धीमा कर देगा।
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उन्होंने कहा, "यदि आप इनपुट पर कर लगाते हैं, तो विनिर्माण क्षेत्र में आप में से कई जानते हैं कि आप अपने आउटपुट पर कर लगा रहे हैं, आप हम पर कर नहीं लगा रहे हैं, आप अपने बाजार की रक्षा नहीं कर रहे हैं। आप जो कर रहे हैं उससे बाजार सीमित हो सकता है।" अमेरिकी राजदूत ने कहा कि हम निश्चित तौर पर आत्मनिर्भर भारत चाहते हैं, पर हम भारत को एक किले के रूप में परिवर्तित होते नहीं देखना चाहते हैं।