DGCA: गो फर्स्ट को अगले आदेश तक टिकटों की बिक्री रोकने के निर्देश, परिचालन जारी रखने में विफल रहने पर शोकॉज
DGCA: गो एयरलाइंस (इंडिया) लिमिटेड (गो फर्स्ट) की उड़ानों के अचानक रद्द होने और आईबीसी के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के मद्देनजर डीजीसीए ने विमानन कंपनी से जवाब मांगा है।
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नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 'गो फर्स्ट' को अगले आदेश तक टिकटों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। जानकारी के अनुसार डीजीसीए ने सुरक्षित, कुशल और विश्वसनीय तरीके से परिचालन जारी रखने में विफल रहने पर गो फर्स्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
गो फर्स्ट के खिलाफ एयरक्राफ्ट रूल्स 1936 के तहत की गई कार्रवाई
गो एयरलाइंस (इंडिया) लिमिटेड (गो फर्स्ट) की उड़ानों के अचानक रद्द होने और आईबीसी के तहत कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के मद्देनजर डीजीसीए ने विमानन कंपनी से जवाब मांगा है। कुशल और विश्वसनीय तरीके से सुरक्षित रूप से सेवा संचालन जारी रखने में विफलता के लिए विमान नियम, 1937 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत गो फर्स्ट को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इसकी जानकारी दी है।
विमानन कंपनी ने नोटिस मिलने के 15 दिनों में मांगा गया जवाब
एयरलाइन ऑपरेटर से नोटिस मिलने के 15 दिनों के जवाब मांगा गया है। गो फर्स्ट में एयर ऑपरेटर्स सर्टिफिकेट (एओसी) को जारी रखने पर आगे का निर्णय उनकी ओर से प्रस्तुत जवाब के आधार पर लिया जाएगा। इसके अलावा, गो फर्स्ट को तत्काल प्रभाव से और अगले आदेश तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से टिकटों की बुकिंग और बिक्री को रोकने का निर्देश दिया गया है।
गो फर्स्ट ने एनसीएलटी से दिवाला समाधान याचिका पर जल्द सुनवाई करने की मांग की
संकट से जूझ रही गो फर्स्ट ने एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण) से अपील की है कि उनकी स्वैच्छिक दिवाला समाधान याचिका पर जल्द फैसला किया जाए। वहीं कंपनी के दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के बाद पट्टेदारों ने एयरलाइन के विमानों का पंजीकरण रद्द करना शुरू कर दिया है। एनसीएलटी ने बीती चार मई को गो फर्स्ट की याचिका पर सुनवाई कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पट्टेदारों ने गो फर्स्ट के 20 से अधिक विमानों का पंजीकरण रद्द करने की मांग की है
कंपनी की तरफ से एनसीएलटी में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी नागेश ने प्रांजल किशोर के साथ रामलिंगम सुधाकर की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने अपना पक्ष रखा। पीठ ने भी गो फर्स्ट के अनुरोध पर विचार करने की बात कही है। बता दें कि पट्टेदारों ने 20 से अधिक विमानों का पंजीकरण रद्द करने की मांग की है। वाडिया समूह के स्वामित्व वाली कंपनी गो फर्स्ट ने स्वैच्छिक दिवाला समाधान याचिका दायर करने के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय से संपर्क किया है।