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कैपिटल ग्रुप का विश्लेषण : देश के लिए शुभ यह दशक, प्रगति के लंबे दौर के प्रवेश द्वार पर भारत की दस्तक

Mon, 17 Jul 2023 04:09 AM IST
शिव शरण शुक्ला बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 17 Jul 2023 04:09 AM IST
सार

2014 में सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री मोदी ने कारोबारी हित में सुधार शुरू किए। 100 करोड़ से अधिक नागरिकों के आधार डाटाबेस ने कर्ज पाने की प्रणाली सुधारी।

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Analysis of Capital Group: This decade is auspicious for country PM MODI
निवेश। - फोटो : Pixabay

विस्तार

क्या यह भारत के जगमगाने का दशक है? भारत में निवेश के माहौल पर कैपिटल ग्रुप ने अपना ताजा विश्लेषण इसी सवाल से शुरू किया। फिर खुद ही जवाब में कहा कि उसे विश्वास है भारत प्रगति के एक लंबे दौर के प्रवेश द्वार पर खड़ा है। इतने बड़े लोकतंत्र में 10 साल से राजनीतिक स्थिरता है। आर्थिक गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली है। अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं। इसका कुछ असर हो सकता है, लेकिन निवेशक लगातार भारत का रुख कर रहे हैं। अमेरिका की राजकीय यात्रा में पीएम नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस को संबोधित किया। शीर्ष कारोबारियों से मिले। ये इशारा है कि भारत सही दिशा में बढ़ रहा है। कॉरपोरेट जगत का विश्वास उच्चतम स्तर पर है। भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है। तकनीकी नवाचार प्रगति के नए क्षेत्र खोल रहे हैं। हाल ही में इन्वेस्को ने दावा किया कि निवेशकों के लिए भारत 2023 में चीन को पछाड़कर उभरते बाजारों में सबसे आकर्षक गंतव्य बन चुका है। दुनिया में 2.2 लाख डॉलर के एसेट का प्रबंधन कर रहे कैपिटल ग्रुप ने विश्लेषण में भारत के लिए सकारात्मक हालात को कई बिंदुओं में सामने रखा, जो इस प्रकार हैं...
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सुधार : आधार, जीएसटी और यूपीआई से
2014 में सत्ता में आते ही प्रधानमंत्री मोदी ने कारोबारी हित में सुधार शुरू किए। 100 करोड़ से अधिक नागरिकों के आधार डाटाबेस ने कर्ज पाने की प्रणाली सुधारी। 2017 में जीएसटी लागू कर टैक्स प्रणाली को चुस्त किया। डिजिटाइज्ड व्यवस्था से कच्चे माल, वस्तुओं और सेवाओं को ट्रैक किया जाने लगा। औपचारिक विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्र का दायरा बढ़ा। 2016 में लॉन्च यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने भुगतान प्रणाली आसान बनाई। बैंक और गैर-बैंकिंग संस्थानों से लेकर आम नागरिकों तक के लिए इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन आसान हुआ। कर्ज प्रक्रिया भी सुधरी। 
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  • घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए पीएलआई योजना से भी अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिली। 
  •  नतीजा, आईएमएफ का दावा है कि 2027 तक अमेरिका व चीन के बाद भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। 

बुनियादी ढांचे के लिए निवेश में बूम 5 साल में सरकार ने सड़क, रेलवे ट्रैक, हवाईअड्डों और बंदरगाहों के निर्माण-विकास में करोड़ों खर्च किए हैं। मुंबई-सूरत की 170 किमी दूरी तय करने में 10 साल पहले 12 घंटे लगते थे, आज 6 लेन हाईवे ने यह समय 6 घंटे कर दिया है।
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भारत में ही विनिर्माण की हवा : मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, कंप्यूटर आदि के भारत में निर्माण को महत्व दिया गया। आज जो वैश्विक कंपनियां चीन के अलावा कहीं और अपनी आपूर्ति शृंखला बनाना चाहती हैं, उन्हें भारत में संभावना नजर आ रही है। इनका फायदा भारतीय कंपनियों को भी होगा। रोजगार बढ़ाने में मदद मिल रही है।

29 साल के औसत भारतीय, बड़ा घरेलू बाजार
भारतीयों की 29 वर्ष की औसत आयु निवेशकों को आकर्षित में अहम कारक है। उन्हें घरेलू खपत के लिहाज से भी भारत बड़ा बाजार नजर आ रहा है। दिसंबर, 2022 तक भारतीयों ने 108 यूनिकॉर्न खड़े किए हैं। यूनिकॉर्न की संख्या में आज हम दुनिया में तीसरे हैं तो इसमें घरेलू खपत का अहम योगदान है। दूसरे स्थान पर मौजूद चीन में 172 और प्रथम स्थान पर काबिज अमेरिका में 644 यूनिकॉर्न हैं। 


चिप व केमिकल उद्योग में चीन का विकल्प
विकसित देश अपने लिए चीन के अलावा केमिकल आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत चाहते हैं। बीते दशक में कई केमिकल कंपनियों ने भारत का रुख किया। ई-वाहनों की बैटरी से लेकर सेमीकंडक्टर के लिए कई देश एवं कंपनियां भारत की ओर देखने लगी हैं। ‘चाइना प्लस वन’ नीति से भारत द्वारा चीन के लिए चुनौती बनने में कई वर्ष लगेंगे, लेकिन फिलहाल इसमें सबको फायदा नजर आ रहा है। 
 
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