H1B Visa Row: 'एच-1बी वीजा के फैसले से पहला नुकसान अमेरिका को ही', जानिए बैंकिंग और बाजार के विशेषज्ञों की राय
बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि एच-1बी वीजा के नए नियम लागू करना अमेरिका को ही भारी पड़ सकता है। साथ ही भारत की धन-प्रेषण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से देश में सालाना 32 अरब डॉलर का फायदा होता हैं।
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ट्रंप प्रशासन की ओर से एच-1बी वीजा के नए नियम लागू करने का खामियाजा खुद अमेरिका को ही उठाना पड़ सकता है। जानकारों की ऐसी ही राय है नए एच-1बी वीजा नियमों के भारतीय अर्थव्यवस्था पर तत्काल प्रभाव के बारे में बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि इसका पहला असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर संकुचन के रूप में पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियों में भी काफी उथल-पुथल मची है।
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भारत की धन-प्रेषण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर
बग्गा के अनुसार, भारत की धन-प्रेषण अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से देश में सालाना 32 अरब डॉलर का फायदा होता हैं। बग्गा ने कहा, 'इस सीजन में एनआरआई और पीआईओ भारत नहीं आएंगे... छात्र भी यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जाना पसंद करेंगे..."
आईटी सेक्टर सहित दूसरे क्षेत्रों पर भी पड़ेगा असर
एच-1बी वीजा के नए नियमों का आईटी सेक्टर पर पड़ने वाले असर के बारे में बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि इसका असर जरूर होगा। सिर्फ आईटी ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवा, डॉक्टर, नर्स और अन्य वित्तीय सेवा कंपनियां भी प्रभावित होंगी... अगर अगले साल से एच-1बी वीजा देने की यही दर रही, तो लगभग 14 अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। इसका मुनाफा शायद उन कंपनियों के पास न हो।
अमेरिकी ग्रामीण इलाकों में लगभग 16 हजार भारतीय मूल के डॉक्टर
अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में लगभग 16,000 भारतीय मूल के डॉक्टर काम कर रहे हैं। एच-1बी वीजा से अमेरिका के कई क्षेत्रों को फायदा हो रहा है। आईटी सेक्टर में, बड़ी कंपनियों के पास 5,000 से 10,000 एच-1बी कर्मचारी हैं। वे इन कामों को आउटसोर्स करने की कोशिश करेंगी। इस नियम का फायदा वैंकूवर और आसपास के अन्य देशों जैसे विदेशी केंद्रों को होगा।"
जीएसटी 2.0 विकास समर्थक नीति
जीएसटी 2.0 सुधारों के प्रभावी होने पर बैंकिंग और बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा... यह एक विकास-समर्थक नीति है। सरकार आसानी से 48,000 करोड़ रुपये के घाटे की भरपाई कर लेगी और उसे पहले से कहीं ज्यादा जीएसटी मिलेगा। इससे सभी क्षेत्रों में खपत को बढ़ावा मिलेगा।