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AGR मामला: SC में सुनवाई आज, दूरसंचार कंपनियां बताएंगी बकाया चुकाने का प्लान
Thu, 18 Jun 2020 06:53 AM IST
योगेश साहू
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: योगेश साहू
Updated Thu, 18 Jun 2020 06:53 AM IST
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SC on telecom sector
- फोटो : pti
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सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की बकाया राशि के भुगतान को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा। बता दें कि दूरसंचार विभाग ने यह याचिका दाखिल की थी।
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विभाग ने दूरसंचार कंपनियों से चार लाख करोड़ रुपये का भुगतान करने को कहा था। याचिका पर हुई पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कंपनियों को बकाया राशि की गणना और कार्ययोजना के साथ आने के लिए कहा था।
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Supreme Court will today hear a petition filed by the Department of Telecommunications to allow telecom companies to make staggered payment for their Adjusted Gross Revenue (AGR) dues. pic.twitter.com/AbDCgnTnjh
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) June 18, 2020
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी फटकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून को हुई सुनवाई में समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की बकाया राशि के रूप में चार लाख करोड़ रुपये की दूरसंचार विभाग की मांग को गुरुवार को पूरी तरह अनुचित करार दिया था। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि विभाग को इसे वापस लेने पर विचार करना चाहिए।
न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए सरकार द्वारा सार्वजनिक उपक्रमों से की गई इस मांग पर सवाल उठाए थे। पीठ ने कहा था कि मामले में उसके फैसले की गलत व्याख्या की गई है, क्योंकि इन पर एजीआर के आधार पर बकाया राशि के मुद्दे पर न्यायालय ने विचार नहीं किया था।
विभाग की मांग को बताया था अनुचित
पीठ ने सार्वजिनक उपक्रमों से की गई मांग पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह पूरी तरह अनुचित है। दूरसंचार विभाग की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि वह एक हलफनामा दायर कर स्पष्ट करेंगे कि सार्वजनिक उपक्रमों से समेकित सकल आय के आधार पर मांग क्यों की गई है।
कोर्ट ने निजी कंपनियों से कहा था- बताएं कैसे करेंगे भुगतान
पिछली सुनवाई में पीठ ने निजी संचार कंपनियों से भी कहा था कि वे भी हलफनामे दाखिल कर बताएं कि वे समेकित सकल आय की बकाया राशि का भुगतान किस तरह करेंगी।
कोर्ट ने कहा था ब्याज के साथ बकाया राशि देनी होगी
11 जून की सुनवाई से भी पहले शीर्ष अदालत ने 18 मई को भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और अन्य मोबाइल सेवा प्रदाताओं को दूरसंचार विभाग को देय बकाया राशि का स्वत: आकलन करने पर आड़े हाथ लिया था। न्यायालय ने कहा था कि उन्हें ब्याज के साथ बकाया राशि का भुगतान करना होगा। एक अनुमान के अनुसार यह राशि 1.6 लाख करोड़ रुपये है।
शीर्ष अदालत ने सरकार को देय बकाया राशि का पुन: आकलन करने की इन कंपनियों को अनुमति देने के लिए दूरसंचार विभाग को भी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने कहा था कि राजस्व की गणना के मामले में उसका 24 अक्तूबर 2019 का आदेश अंतिम है।