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Economy: सुधार का अगला एजेंडा प्रशासनिक व न्यायिक क्षेत्रों पर होगा केंद्रित, जानें क्या बोले संजीव सान्याल
Tue, 08 Aug 2023 05:28 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 08 Aug 2023 05:28 PM IST
सार
Economy: सान्याल ने यहां भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसी) में कहा कि 2014 के बाद मौजूदा सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली तो नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के लिए सुधार किए गए। उन्होंने कहा, '2014 से सुधारों का नया चक्र शुरू किया गया।
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संजीव सान्याल, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य।
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने मंगलवार को कहा कि सरकार का अगला सुधार एजेंडा देश के प्रशासनिक और न्यायिक क्षेत्रों पर केंद्रित होगा।
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सान्याल ने यहां भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स (बीसीसी) में कहा कि 2014 के बाद मौजूदा सरकार ने केंद्र में सत्ता संभाली तो नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के लिए सुधार किए गए। उन्होंने कहा, '2014 से सुधारों का नया चक्र शुरू किया गया। पिछले दशक में नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था के लिए सुधार किए गए। दिवाला व ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) और जीएसटी पेश किए गए और मुद्रास्फीति का लक्ष्य तय किया गया।
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अब दो बड़े सुधारों प्रशासनिक और न्यायिक की आवश्यकता है, जिसके लिए व्यापक जन समर्थन की जरूरत है। जब भी हम ऐसा करेंगे, प्रतिरोध होगा। प्रशासनिक प्रणाली अंग्रेजों की ओर से नियंत्रित किए जाने के एकमात्र उद्देश्य के साथ बनाई गई थी। न्यायपालिका के साथ भी ऐसा ही है। व्यवस्था न्याय देना नहीं चाहती, बल्कि उसे नियंत्रित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि ये सुधार के दो प्रमुख क्षेत्र हैं जिन पर सरकार ध्यान देना शुरू करेगी।
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वृहद आर्थिक मोर्चे पर सान्याल ने कहा कि इस साल अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत से सात प्रतिशत के बीच रहेगी। उन्होंने कहा, 'देश में इस समय वृहद आर्थिक स्थिरता है। चालू खाते का घाटा (सीएडी) उचित दायरे में है और विदेशी मुद्रा भंडार 600 अरब डॉलर है। सान्याल ने कहा, 'लेकिन कमजोर निर्यात मांग के साथ घरेलू मांग को आगे बढ़ाने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि इससे बाह्य क्षेत्र पर दबाव पड़ सकता है जिससे चालू खाते के घाटे में समस्या पैदा हो सकती है। उनके अनुसार, आपूर्ति पक्ष को मजबूत रखने पर ध्यान केंद्रित करना होगा जैसा कि कोविड वर्षों के दौरान था।
उन्होंने कहा, 'बुनियादी ढांचे में पिछले निवेश से अब हमें फायदा हो रहा है। विश्व के निराशाजनक परिदृश्य को देखते हुए 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर बुरी नहीं है।
उन्होंने कहा, 'इस समय ग्रोथ एक्सीलेटर को दबाने की जरूरत नहीं है। हम ऐसा तभी कर सकते हैं जब एक स्पष्ट राजमार्ग हो। फिलहाल कुछ उतार-चढ़ाव बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धि के कुछ ऊंचे बिंदुओं के लिए वृहद आर्थिक स्थिरता का त्याग करना बुद्धिमानी नहीं है और जरूरत बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करने और मजबूत आपूर्ति पक्ष को बनाए रखने की है। उन्होंने कहा, 'अर्थव्यवस्था के आकार के मामले में हम निश्चित रूप से जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएंगे। लेकिन तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद अगली दो अर्थव्यवस्थाएं हमसे बहुत दूर होंगी।
सान्याल ने कहा कि सरकार रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण करने और इसे हार्ड करेंसी में बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, "यह यूएसडी की भूमिका में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है जो निकट भविष्य के लिए एंकर मुद्रा बनी रहेगी।" सान्याल ने यह भी कहा कि अगली जनगणना करने की जरूरत है क्योंकि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। मुद्रास्फीति के बारे में उन्होंने कहा कि सब्जियों की कीमतों में कभी-कभार वृद्धि को छोड़कर मुद्रास्फीति का दबाव बहुत अधिक नहीं है।