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Economy: 51% जर्मन कंपनियां भारत में बढ़ाएंगी निवेश; जर्मनी के लिए एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत विकास इंजन
Fri, 25 Oct 2024 07:25 AM IST
शुभम कुमार
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Published by: शुभम कुमार
Updated Fri, 25 Oct 2024 07:25 AM IST
सार
Economy: जर्मन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स अब्रॉड (एएचके) के नेटवर्क की ओर से किए गए सर्वे में कहा गया है कि भारत में कारोबार कर रहीं जर्मनी की 51 फीसदी कंपनियां आने वाले 12 महीनों में अपना निवेश बढ़ाना चाहती हैं।
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अर्थव्यवस्था
- फोटो : amarujala
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विस्तार
भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जर्मनी के लिए विकास का इंजन बना हुआ है। जर्मनी की कंपनियां भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद को देखते हुए उसकी विकास गाथा में हिस्सेदार बनना चाहती हैं। जर्मन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स अब्रॉड (एएचके) के नेटवर्क की ओर से किए गए सर्वे में कहा गया है कि भारत में कारोबार कर रहीं जर्मनी की 51 फीसदी कंपनियां आने वाले 12 महीनों में अपना निवेश बढ़ाना चाहती हैं।
वहीं, चीन में कारोबार करने वाली जर्मनी की 28 फीसदी कंपनियां ग्रेटर चीन में अपने निवेश में कटौती करना चाहती हैं। ग्रेटर चीन में चीन, ताइवान और हांगकांग शामिल हैं। यह सर्वे एशिया-प्रशांत और ग्रेटर चीन क्षेत्र में करीब 820 सदस्य कंपनियों के बीच किया गया है। एजेंसी
एशिया व प्रशांत क्षेत्र में निराश नहीं हैं कंपनियां : ट्रेयर
सर्वे में कहा गया है कि ग्रेटर चीन को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जर्मन कंपनियों की वर्तमान कारोबारी स्थिति 2024 की शरद ऋतु में ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है। हर पांच में से एक कंपनी ने अपनी वर्तमान कारोबारी स्थिति को खराब बताया है।
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जर्मन चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स डीआईएचके में विदेशी व्यापार प्रमुख वोल्कर ट्रेयर ने कहा, कई स्थानों पर निराशाजनक स्थिति के बावजूद एशिया-प्रशांत में हमारी कंपनियां निराश नहीं हैं। वे भविष्य को लेकर आशावादी हैं। सर्वे में शामिल आधी से अधिक कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उनके स्थानीय कारोबार में सुधार होगा। सिर्फ 8 फीसदी को ही गिरावट की आशंका है।
भारत में कारोबार वृद्धि की अत्यधिक संभावना
एएचके के मुताबिक, चीन में कारोबारी माहौल में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन कंपनियों की निवेश योजनाओं में काफी कमी आई है। इसकी प्रमुख वजह चीन की तुलना में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य बाजारों में विविध और बेहतर कारोबारी माहौल है। इसके साथ ही भारत के संदर्भ में कहा गया है कि देश जर्मन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है, जहां कारोबार वृद्धि की भारी संभावनाएं हैं। जर्मन कंपनियों को उम्मीद है कि भारत में उनकी आय तेजी से बढ़ेगी।
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वहीं, चीन में कारोबार करने वाली जर्मनी की 28 फीसदी कंपनियां ग्रेटर चीन में अपने निवेश में कटौती करना चाहती हैं। ग्रेटर चीन में चीन, ताइवान और हांगकांग शामिल हैं। यह सर्वे एशिया-प्रशांत और ग्रेटर चीन क्षेत्र में करीब 820 सदस्य कंपनियों के बीच किया गया है। एजेंसी
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एशिया व प्रशांत क्षेत्र में निराश नहीं हैं कंपनियां : ट्रेयर
सर्वे में कहा गया है कि ग्रेटर चीन को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में जर्मन कंपनियों की वर्तमान कारोबारी स्थिति 2024 की शरद ऋतु में ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है। हर पांच में से एक कंपनी ने अपनी वर्तमान कारोबारी स्थिति को खराब बताया है।
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जर्मन चैंबर ऑफ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स डीआईएचके में विदेशी व्यापार प्रमुख वोल्कर ट्रेयर ने कहा, कई स्थानों पर निराशाजनक स्थिति के बावजूद एशिया-प्रशांत में हमारी कंपनियां निराश नहीं हैं। वे भविष्य को लेकर आशावादी हैं। सर्वे में शामिल आधी से अधिक कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में उनके स्थानीय कारोबार में सुधार होगा। सिर्फ 8 फीसदी को ही गिरावट की आशंका है।
भारत में कारोबार वृद्धि की अत्यधिक संभावना
एएचके के मुताबिक, चीन में कारोबारी माहौल में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन कंपनियों की निवेश योजनाओं में काफी कमी आई है। इसकी प्रमुख वजह चीन की तुलना में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य बाजारों में विविध और बेहतर कारोबारी माहौल है। इसके साथ ही भारत के संदर्भ में कहा गया है कि देश जर्मन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है, जहां कारोबार वृद्धि की भारी संभावनाएं हैं। जर्मन कंपनियों को उम्मीद है कि भारत में उनकी आय तेजी से बढ़ेगी।