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ईपीएफ की नई सीमा से बदलेगा पीएफ का गणित: सैलरी, पेंशन और टेक-होम पर क्या होगा असर? आपको होगा फायदा या नुकसान
Mon, 28 Sep 2026 06:51 AM IST
प्रशांत तिवारी
बीके सिन्हा, पूर्व सहायक पीएफ कमिश्नर
बीके सिन्हा, पूर्व सहायक पीएफ कमिश्नर
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Mon, 28 Sep 2026 06:51 AM IST
सार
EPF की वैधानिक वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये किए जाने से 15,000 से 25,000 रुपये के प्रासंगिक वेतन वाले कर्मचारियों का PF, EPS और EDLI कवरेज बढ़ सकता है। हालांकि, 25,000 रुपये की सीमा का अर्थ यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से अनिवार्य रूप से 3,000 रुपये PF कटेगा। पुराने EPF सदस्यों और नए कर्मचारियों पर लागू नियमों में अंतर महत्वपूर्ण रहेगा।
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EPF
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों के भविष्य निधि (EPF), पेंशन (EPS) और बीमा (EDLI) से जुड़े अनिवार्य दायरे की वैधानिक वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। सितंबर 2014 के बाद यह पहला मौका है, जब इस सीमा में संशोधन किया गया है।
हर कर्मचारी के वेतन से 12% PF कटेगा, यह जरूरी नहीं
अब सबसे बड़ा भ्रम यह है कि अधिकांश लोग यह मान रहे हैं कि वेतन सीमा 25,000 रुपये होने से हर वह व्यक्ति जो 25,000 रुपये तक कमा रहा है, उसके मूल वेतन से 12% यानी सीधे 3,000 रुपये कटने शुरू हो जाएंगे। लेकिन कानून और नियम ऐसा बिल्कुल नहीं कहते।
मान लीजिए किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ते को मिलाकर प्रासंगिक वेतन 20,000 रुपये प्रतिमाह है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी का 12% योगदान यानी 2,400 रुपये हर महीने उसकी सैलरी से कटेगा। ठीक इसी तरह, कंपनी की ओर से भी 12% यानी 2,400 रुपये का अंशदान उसके खाते में डाला जाएगा। कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले इस 2,400 रुपये में से पेंशन (EPS) और भविष्य निधि (EPF) का विभाजन योजना के नियमों के तहत तय होगा।
क्या 25,000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर भी यह नियम लागू होगा?
मान लीजिए किसी नए कर्मचारी का वेतन 30,000 रुपये है। सिर्फ इस वजह से कि सरकार की नई सीमा 25,000 रुपये है, इसका मतलब यह नहीं है कि 30,000 की पूरी सैलरी पर अनिवार्य PF कटने लगेगा। नई वैधानिक सीमा 25,000 रुपये केवल यह तय करने के लिए है कि किसे अनिवार्य दायरे में लाना है। उससे ऊपर के मामलों में कर्मचारियों की पुरानी स्थिति और नियमों को देखना होगा। इसके अलावा, पुराने सदस्य और नए कर्मचारी दोनों के लिए नियम अलग हैं। जो कर्मचारी पहले से EPF सदस्य हैं, उनकी सैलरी बढ़ने मात्र से उनकी सदस्यता समाप्त नहीं हो जाती। इसलिए किसी संस्थान में यह कह देना कि जिसकी सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा है, उस पर PF लागू नहीं होगा या 25,000 रुपये तक वाले हर कर्मचारी का 3,000 रुपये कटेगा ही बिना स्थिति देखे अधूरा सच है।
कंपनियों पर बढ़ेगा वैधानिक खर्च, पे-रोल सिस्टम में करना होगा बदलाव
कंपनियों के लिए यह निश्चित रूप से एक अतिरिक्त वैधानिक लागत है। नियमों के मुताबिक, कंपनियां अपनी इस बढ़ी हुई PF देनदारी का बोझ कर्मचारियों की बेसिक सैलरी या कुल CTC को अवैध रूप से घटाकर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर नहीं थोप सकतीं। श्रम मंत्रालय और क्षेत्रीय कार्यालयों की एडवाइजरी के अनुसार, सभी संस्थानों को अपने पे-रोल सिस्टम, सॉफ्टवेयर, कर्मचारी मास्टर डाटा और फॉर्म II को तुरंत अपडेट करना होगा। कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि 15,000 से 25,000 के वेतन ब्रैकेट वाले कर्मचारी जो अब तक बाहर थे, उन्हें 17 सितंबर से इस दायरे में शामिल किया जाए और सही ECR का अनुपालन किया जाए।
ये भी पढ़ें: यूपीआई पर एमडीआर की मार: क्या महंगा होगा म्यूचुअल फंड निवेश? जानें एसआईपी और एकमुश्त निवेश पर क्या होगा असर
पेंशन और बीमा के मोर्चे पर कितना फायदा?
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हर कर्मचारी के वेतन से 12% PF कटेगा, यह जरूरी नहीं
अब सबसे बड़ा भ्रम यह है कि अधिकांश लोग यह मान रहे हैं कि वेतन सीमा 25,000 रुपये होने से हर वह व्यक्ति जो 25,000 रुपये तक कमा रहा है, उसके मूल वेतन से 12% यानी सीधे 3,000 रुपये कटने शुरू हो जाएंगे। लेकिन कानून और नियम ऐसा बिल्कुल नहीं कहते।
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- PF की गणना हमेशा सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत तय वेतन पर होती है। इसमें मुख्य रूप से मूल वेतन और महंगाई भत्ता शामिल होते हैं।
- मकान किराया भत्ता या यात्रा भत्ता जैसे अन्य भत्ते इसमें तभी जुड़ते हैं, जब वे कुल पारिश्रमिक के तय नियमों से बाहर हों।
- यदि किसी कर्मचारी का वास्तविक वेतन (मूल वेतन + DA) 15,000 रुपये ही है, तो उसका पुराना अंशदान, यानी 1,800 रुपये ही कटता रहेगा, भले ही उसकी कुल सैलरी या CTC ज्यादा हो। असली और बड़ा बदलाव वहीं आएगा, जहां वास्तविक वेतन 15,000 रुपये से ऊपर और 25,000 रुपये के बीच है।
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मान लीजिए किसी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ते को मिलाकर प्रासंगिक वेतन 20,000 रुपये प्रतिमाह है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी का 12% योगदान यानी 2,400 रुपये हर महीने उसकी सैलरी से कटेगा। ठीक इसी तरह, कंपनी की ओर से भी 12% यानी 2,400 रुपये का अंशदान उसके खाते में डाला जाएगा। कंपनियों की ओर से दिए जाने वाले इस 2,400 रुपये में से पेंशन (EPS) और भविष्य निधि (EPF) का विभाजन योजना के नियमों के तहत तय होगा।
क्या 25,000 रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर भी यह नियम लागू होगा?
मान लीजिए किसी नए कर्मचारी का वेतन 30,000 रुपये है। सिर्फ इस वजह से कि सरकार की नई सीमा 25,000 रुपये है, इसका मतलब यह नहीं है कि 30,000 की पूरी सैलरी पर अनिवार्य PF कटने लगेगा। नई वैधानिक सीमा 25,000 रुपये केवल यह तय करने के लिए है कि किसे अनिवार्य दायरे में लाना है। उससे ऊपर के मामलों में कर्मचारियों की पुरानी स्थिति और नियमों को देखना होगा। इसके अलावा, पुराने सदस्य और नए कर्मचारी दोनों के लिए नियम अलग हैं। जो कर्मचारी पहले से EPF सदस्य हैं, उनकी सैलरी बढ़ने मात्र से उनकी सदस्यता समाप्त नहीं हो जाती। इसलिए किसी संस्थान में यह कह देना कि जिसकी सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा है, उस पर PF लागू नहीं होगा या 25,000 रुपये तक वाले हर कर्मचारी का 3,000 रुपये कटेगा ही बिना स्थिति देखे अधूरा सच है।
कंपनियों पर बढ़ेगा वैधानिक खर्च, पे-रोल सिस्टम में करना होगा बदलाव
कंपनियों के लिए यह निश्चित रूप से एक अतिरिक्त वैधानिक लागत है। नियमों के मुताबिक, कंपनियां अपनी इस बढ़ी हुई PF देनदारी का बोझ कर्मचारियों की बेसिक सैलरी या कुल CTC को अवैध रूप से घटाकर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी पर नहीं थोप सकतीं। श्रम मंत्रालय और क्षेत्रीय कार्यालयों की एडवाइजरी के अनुसार, सभी संस्थानों को अपने पे-रोल सिस्टम, सॉफ्टवेयर, कर्मचारी मास्टर डाटा और फॉर्म II को तुरंत अपडेट करना होगा। कंपनियों को सुनिश्चित करना होगा कि 15,000 से 25,000 के वेतन ब्रैकेट वाले कर्मचारी जो अब तक बाहर थे, उन्हें 17 सितंबर से इस दायरे में शामिल किया जाए और सही ECR का अनुपालन किया जाए।
ये भी पढ़ें: यूपीआई पर एमडीआर की मार: क्या महंगा होगा म्यूचुअल फंड निवेश? जानें एसआईपी और एकमुश्त निवेश पर क्या होगा असर
पेंशन और बीमा के मोर्चे पर कितना फायदा?
- इस संशोधन का सबसे क्रांतिकारी और सकारात्मक असर कर्मचारियों की पेंशन और बीमा सुरक्षा पर पड़ेगा।
- पहले 15,000 रुपये की सीमा होने के कारण कंपनियों का अधिकतम पेंशन अंशदान 1,250 रुपये प्रतिमाह तक ही सीमित था (15,000 का 8.33%)।
- अब 25,000 रुपये की सीमा होने से यह बढ़कर लगभग 2,083 रुपये प्रतिमाह (25,000 का 8.33%) तक हो जाएगा। इसका सीधा और स्पष्ट मतलब यह है कि रिटायरमेंट के वक्त कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन की गणना ऊंचे आधार पर होगी, जिससे भविष्य में मिलने वाली पेंशन की राशि भी काफी बढ़कर आएगी।
- इस नए अनिवार्य दायरे में आने वाले कर्मचारियों को PF और पेंशन के साथ-साथ EDLI योजना के तहत मिलने वाले मुफ्त जीवन बीमा सुरक्षा का लाभ भी स्वतः मिलने लगेगा, जिसका पूरा खर्च नियोक्ता उठाता है।