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Hindi News ›   Business ›   Big move: Coinswitch Kuber disables all crypto purchase options on its app, two days ago Coinbase stopped UPI payments

बदलाव की आहट: कॉइनस्विच कुबेर पर नहीं खरीद पाएंगे क्रिप्टोकरेंसी, रुपये में भुगतान के सारे विकल्प बंद

Wed, 13 Apr 2022 08:19 AM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Wed, 13 Apr 2022 08:19 AM IST
सार

कॉइनस्विच कुबेर के इस कदम से दो दिन पहले 'कॉइनबेस' ने यूनीफाइड पैमेंट इंटरफेस यानी यूपीआई (UPI) को बंद कर दिया था। यह उसके प्लेटफॉर्म पर क्रिप्टो खरीदी का एकमात्र विकल्प था। 
 

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Big move: Coinswitch Kuber disables all crypto purchase options on its app, two days ago Coinbase stopped UPI payments
crypto - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

भारत में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर सरकार के सख्त रवैये और बजट 2022 में क्रिप्टो या अन्य डिजिटल एसेट से होने वाले लाभ पर 30 फीसदी का भारी टैक्स व क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर एक फीसदी टीडीएस का निर्णय अब रंग दिखाने लगा है। इसका असर ये हो रहा है कि भारतीय निवेशकों के लिए अब रुपये में क्रिप्टोकरेंसी खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। पहले क्वाइनबेस और अब कॉइनस्विच कुबेर ने भी अपने एप पर यूपीआई और बैंक ट्रांसफर के जरिए जमा होने वाले भारतीय रुपयों से क्रिप्टोकरेंसी की खरीदी के सारे विकल्प बंद कर दिए हैं।

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एनपीसीआई के रडार पर क्रिप्टो एक्सचेंज
दरअसल, देश में यूपीआई पेमेंट की निगरानी करने वाले एनपीसीआई के रडार पर आने के बाद पहले अमेरिका बेस्ड क्रिप्टो एग्रिगेटर क्वाइनबेस ने भारत में लॉन्च होने के महज तीन महीने बाद ही क्रिप्टोकरेंसी खरीद के लिए यूपीआई पेमेंट पर रोक लगा दी। अब क्वाइनबेस के बाद एक ओर क्रिप्टो एग्रिगेटी क्वाइनस्विच कुबेर ने भी बड़ा कदम उठाया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार इसने अपने एप से रुपये में होने वाली सभी डिपॉजिट सेवाओं को अस्थाई तौर पर रोक दिया है। यानी यूपीआई के जरिए क्रिप्टो खरीद बंद कर दी गई है। इसके अलावा अब कंपनी के मोबाइल एप पर यूपीआई के माध्यम से बैंक ट्रांसफर जैसे एनईएफटी और आरटीजीएस पर रोक लगा दी है। 
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बयान के बाद बैंक हुए सतर्क
आपको बता दें कि इससे दो दिन पहले ही एनपीसीआई की ओर से जारी किए गए क्रिप्टोकरेंसी की खरीद-फरोख्त में यूपीआई के उपयोग को लेकर बयान के बाद बैंकों की ओर से कदम उठाया गया था। एनपीसीआई के बयान के बाद बैंकों ने क्वाइनबेस पर यूपीआई के माध्यम से होने वाले सभी लेन-देन रोक दिए थे। यहां बता दें कि क्वाइनबेस ने भारत में एंट्री लेने के बाद अपने उपभोक्ताओं को यूपीआई के जरिए क्रिप्टोकरेंसी खरीदने की सुविधा का आश्वासन दिया था। 
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क्रिप्टो भारत में लीगल टेंडर नहीं
गौरतलब है कि नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई)  ने बीते दिनों एक बयान जारी कर कहा था कि उसे भारत में किसी भी क्रिप्टो एक्सचेंज के द्वरा यूपीआई के जरिए लेन-देन किए जाने की कोई जानकारी नहीं हैं। इसके बाद बैंकों ने सबसे पहले क्वाइनबेस पर यूपीआई ट्रांजैक्शन को रोक दिया था। दरअसल, भारत में क्रिप्टोकरेंसी लीगल टेंडर नहीं है और सरकार ने भी आगाह किया है कि बिना नियामक के क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के बाद जोखिम निवेशक का होगा। क्योंकि जब तक क्रिप्टोको आधिकारिक रूप से देश में कानूनी मान्यता नहीं मिलती, तब तक एनपीसीआई क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े यूपीआई पेमेंट को मंजूरी नहीं दे सकती। देश में यूपीआई से होने वाले सभी भुगतान एनपीसीआई के दायरे में आते हैं।

ट्रेंडिंग वॉल्यूम में आई भारी कमी 
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2021 में क्रिप्टो एक्सचेंजो को ट्रेडिंग वॉल्यूम 1.4 करोड़ यूजर्स था। जो सरकार के क्रिप्टो पर टैक्स के एलान के बाद से लगातार घट रहा है। सरकार की सख्ती के बाद यूपीआई के जरिए क्रिप्टो करेंसी के लेन-देन की सुविधा देने वाले वॉलेट मोबिक्विक ने बीती एक अप्रैल से अपनी सेवाएं बंद कर दीं। उसी समय से यानी एक अप्रैल से 11 अप्रैल के बीच ही ट्रेडिंग वॉल्यूम में 50 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। रिपोर्ट की मानें तो एक अप्रैल को जब क्रिप्टो पर टैक्स और टीडीएस लागू हुआ, उसके बाद ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 55 फीसदी, तो डोमेन ट्रैफिक में 40 फीसदी की कमी आई है। 

क्रिप्टो से आय का इतना हिस्सा कटेगा 
बीती एक अप्रैल से क्रिप्टो से होने वाले लाभ पर 30 फीसदी के टैक्स का नियम लागू कर दिया गया है। इसे ऐसे समझें कि मान लीजिए आपने क्रिप्टोकरेंसी में 1 लाख रुपये का निवेश किया, इस निवेश के बाद आपको 50 हजार रुपये का फायदा हुआ, तो सरकार टैक्स के रूप में इस 50 हजार रुपये के मुनाफे पर 30 फीसदी टैक्स काटेगी यानी क्रिप्टो से आपको हुई इस कमाई में से 15000 रुपये सरकार के खाते में जाएंगे। विशेषज्ञों का कहना था कि यह कदम अंततः निवेशकों को इस जोखिम भरे क्रिप्टो बाजार में अपना पैसा लगाने का निर्णय लेते समय दो बार सोचने के लिए मजबूर करेगा, अब इसका असर सबसे पहले क्रिप्टो एक्सचेंजों पर दिख रहा है। 

उपहार में लेने वाले पर लगेगा टैक्स
इसके अलावा नए नियम के मुताबिक, ऐसी डिजिटल संपत्ति को उपहार में देने के मामले में भी भारी-भरकम 30 फीसदी टैक्स लगाने की घोषणा अपने बजट भाषण में की है। इसे इस तरह से समझ सकते हैं कि अगर आप किसी को एक लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी उपहार स्वरूप देते हैं, तो जिसे आप ये कीमती उपहार दे रहे हैं यानी इसे पाने वाले पर 30 फीसदी की दर से टैक्स लागू होगा। आप एक लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी उपहार में देंगे तो ऐसे में उसे इसका 30 फीसदी या 30,000 रुपये सरकार को टैक्स के रूप में देना होगा। 

एक फीसदी टीडीएस का कैलकुलेशन
टीडीएस यानी टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स यह दरअसल इनकम टैक्स का ही एक हिस्सा है। सरकार की घोषणा की बात करें तो किसी भी तरह की क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन पर आपको 1 फीसदी का टीडीएस भरना होगा। आसान भाषा में समझें तो अगर आपने एक लाख रुपये की क्रिप्टोकरेंसी का लेन-देन किया तो इस लेन-देन की रकम आपके खाते में आने पर उससे एक फीसदी टीडीएस के तौर पर काट लिए जाएंगे। टीडीएस कटने से सरकार को आपके खाते से किए गए क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन का पूरा लेखा-जोखा मिल जाएगा। मतलब एक प्रकार से टीडीएस दरअसल, क्रिप्टोकरेंसी के लेन-देन पर नजर रखने के लिए लगाया गया है।


विवादों का विषय रहा क्रिप्टो कारोबार
देश में वर्चुअल करंसी के कारोबार की वैधानिक तौर पर इजाजत नहीं है तो इसे अवैधानिक भी नहीं माना गया है। सरकार ने इस पर टैक्स लगाकर अपनी जेब भरने का कदम उठाया, इसे लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। अब कंपनियों ने ऐप के जरिए भारतीय रुपये के माध्यम से होने वाली क्रिप्टो करंसी की खरीद फरोख्त की सुविधा बंद करना शुरू कर दी है। इससे माना जा रहा है कि सरकार या रिजर्व बैंक इस बारे में कोई बड़ा कदम उठा सकती है। 

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