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शेयर बाजारों में गिरावट के पांच कारण
Updated Tue, 25 Aug 2015 08:43 AM IST
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चीन के बाजारों में तेज गिरावट का विश्वव्यापी असर हुआ है। भारतीय और अमेरिकी बाजारों में कल की भारी गिरावट के बाद आज भी एशियाई बाजारों में गिरावट का सिलसिला जारी है।
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इसके चलते भारतीय बाजारों के जानकार मानते हैं कि आज भी गिरावट का सिलसिला जारी रह सकता है। गौरतलब है कि भारत में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में पहले ही दिन सेंसेक्स 1000 अंकों से अधिक लुढ़क गया था।
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यह गिरावट कारोबार के दौरान बढ़कर 1600 अंकों तक पहुंच गई और बाजार के इतने अधिक नीचे जाने की आशंका किसी भी जानकार को नहीं थी।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल बाजार को चारों तरफ से नकारात्मक खबरें मिल रही हैं जो अभी कुछ दिन जारी रहेगी। इसमें चीन की अर्थव्यवस्था को लेकर जारी आशंकाओं से लेकर विदेशी निवेशकों द्वारा बाजार से रकम की निकासी शामिल हैं।
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डॉलर के मुकाबले रुपया भी और कमजोर होकर 66.47 के स्तर पर गिर गया, जो कि 2 साल का सबसे निचला स्तर है।
बाजार में गिरावट के पांच प्रमुख कारण
1.हफ्ते के पहले कारोबारी दिन एशियाई बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। शंघाई कम्पोजिट 7.25 फीसदी गिरकर 3,270 के स्तर पर आ गया। जापान का निक्केई 3 फीसदी से ज्यादा गिरकर 18,850 के नीचे पहुंच गया। हैंग सेंग में 4.25 फीसदी की तेज गिरावट दिखी। कोरियाई कोस्पी में भी 2.2 फीसदी की कमजोरी है। ताइवान का इंडेक्स करीब 7 फीसदी गिरकर 7,300 के नीचे पहुंच गया। यह सिलसिला आज भी जारी है हैंग सेंग में 1 फीसदी की गिरावट तो चीनी बाजारों में छह फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। वहीं डाउ और नेस्डेक भी गिरावट के साथ बंद हुए। हालांकि जापान के निक्केई में बढ़त है।
2.भारतीय बाजारों के गिरने का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी और चीनी बाजारों में गिरावट रही। शंघाई के शेयर बाजारों ने पांच महीने के निम्नतम स्तर 7.7 प्रतिशत का गोता खाया। इस महीने इसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
3. चीन युआन के अवमूल्यन से विदेशी निवेशक इससे चिंता में हैं और उन्हीं का रुख इस भारी गिरावट की मुख्य वजह है।
4. चीन के बाजार का असर दुनियाभर पर होता है। अमेरिका में भी ब्याजदरों के बढ़ने की बात कही जा रही है इसके चलते भी बिकवाली बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर ज्यादा लंबे समय तक देखने को नहीं मिलेगा। विदेशी निवेशकों को जल्द समझ आ जाएगा और वह लौट आएंगे।
5. अमेरिकी सरकार के कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित इजाफे के बाद तेल मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से तेल का भाव 40-45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा है। इसके अलावा, निवेशकों में यह भी डर है कि चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से तेल की मांग घट सकती है और यह बाजार के लिए बेहद बुरा होगा।
2.भारतीय बाजारों के गिरने का सबसे बड़ा कारण अमेरिकी और चीनी बाजारों में गिरावट रही। शंघाई के शेयर बाजारों ने पांच महीने के निम्नतम स्तर 7.7 प्रतिशत का गोता खाया। इस महीने इसमें 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई।
3. चीन युआन के अवमूल्यन से विदेशी निवेशक इससे चिंता में हैं और उन्हीं का रुख इस भारी गिरावट की मुख्य वजह है।
4. चीन के बाजार का असर दुनियाभर पर होता है। अमेरिका में भी ब्याजदरों के बढ़ने की बात कही जा रही है इसके चलते भी बिकवाली बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर ज्यादा लंबे समय तक देखने को नहीं मिलेगा। विदेशी निवेशकों को जल्द समझ आ जाएगा और वह लौट आएंगे।
5. अमेरिकी सरकार के कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित इजाफे के बाद तेल मूल्य में गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ दिनों से तेल का भाव 40-45 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा है। इसके अलावा, निवेशकों में यह भी डर है कि चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की वजह से तेल की मांग घट सकती है और यह बाजार के लिए बेहद बुरा होगा।