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बिल्डरों की मनमानी रोकने की अंतिम बाधा भी दूर, रियल स्टेट बिल को मिली मंजूरी
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 15 Mar 2016 10:22 PM IST
सार
- रियल स्टेट बिल को मिली लोकसभा की मंजूरी
- राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होते ही बन जाएगा कानून
-बिल्डर नहीं दे पाएंगे भ्रामक विज्ञापन
-पारदर्शिता बढ़ने से बढ़ेगा निवेश और घटेगी मकान की कीमत
-नियामक प्राधिकरण के गठन से कानूनी दांवपेंच में नहीं फंसेंगे उपभोक्ता
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रियल एस्टेट रेग्युलरटी अथॉरिटी बिल को राज्य सभा में पास
- फोटो : Reuters
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विस्तार
बिल्डरों की मनमानी पर नकेल डालने वाले रियल एस्टेट बिल ने कानूनी जामा पहनने की आखिरी बाधा भी पार कर ली है। कुछ संशोधनों के साथ राज्यसभा से वापस आए इस बिल को मंगलवार को लोकसभा ने मंजूरी दे दी। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही रियल एस्टेट बिल कानून का रूप ले लेगा।
बिल के कानूनी जामा पहनते ही बिल्डर न सिर्फ उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों के सहारे झांसा नहीं दे सकेंगे, बल्कि उन्हें उपभोक्ताओं को दी गई तारीख तक हर हाल में मकान उपलब्ध कराना पड़ेगा। बिल के कानूनी जामा पहनते ही सरकार एक नियामक प्राधिकरण बनाएगी। इसमें बिल्डरों को किसी भी परियोजना की शुरुआत से पहले प्राधिकरण में पंजीकरण कराना, जमीन खरीदने से लेकर अन्य सभी मंजूरी से जुड़े दस्तावेज आदि का ब्योरा जमा करना होगा। बिल्डरों को इन बातों की जानकारी हर हाल में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करानी होगी। उपभोक्ता अपनी पसंद की परियोजना भी चुन सकेंगे।
शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू ने इस बिल को बेहद अहम बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को आ रही कई तरह की परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार ने इस आशय का कानून बनाना तय किया। उन्होंने कहा कि कानून बन जाने से बिल्डर उपभोक्ताओं को प्रताड़ित नहीं कर सकेंगे।
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खास तौर पर उपभोक्ताओं को बिल्डरों के परियोजना की सारी जानकारी हासिल होगी। गौरतलब है कि लोकसभा से पहले से ही पारित इस बिल को राज्यसभा ने पारित कर दिया था। हालांकि, इस दौरान उच्च सदन ने कुछ संशोधन भी पारित किए थे। इसलिए बिल को कानून बनाने की अंतिम बाधा दूर करने केलिए नियमानुसार इन संशोधनों की मंजूरी के लिए फिर से लोकसभा में पेश किया गया।
कानून बनने से क्या बदलेगा
-बिल्डर नहीं दे पाएंगे भ्रामक विज्ञापन
-पारदर्शिता बढ़ने से बढ़ेगा निवेश और घटेगी मकान की कीमत
-नियामक प्राधिकरण के गठन से कानूनी दांवपेंच में नहीं फंसेंगे उपभोक्ता
-बिना प्राधिकरण की मंजूरी से अपार्टमेंट न बनने से अवैध जगहों पर नहीं होगा निर्माण
-डेवलपर को अलग अकाउंट में रखना होगा ग्राहक के एडवांस राशि का 70 फीसदी पैसा, इससे निर्धारित समय में काम पूरा न करने वाले दूसरा प्रोजेक्ट नहीं कर पाएंगे शुरू
-लैंड टाइटल पर उपलब्ध होगा इंश्योरेंस, बाद में होने वाले विवाद से मिलेगा ग्राहक को फायदा
-बिल्डिंग या परियोजना का लेआउट नहीं बदल सकेंगे डेवलपर
-शिकायत सही पाए जाने पर प्रमोटर, डेवलपर को भुगतनी होगी तीन साल की सजा और लगेगा जुर्माना
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बिल के कानूनी जामा पहनते ही बिल्डर न सिर्फ उपभोक्ताओं को भ्रामक विज्ञापनों के सहारे झांसा नहीं दे सकेंगे, बल्कि उन्हें उपभोक्ताओं को दी गई तारीख तक हर हाल में मकान उपलब्ध कराना पड़ेगा। बिल के कानूनी जामा पहनते ही सरकार एक नियामक प्राधिकरण बनाएगी। इसमें बिल्डरों को किसी भी परियोजना की शुरुआत से पहले प्राधिकरण में पंजीकरण कराना, जमीन खरीदने से लेकर अन्य सभी मंजूरी से जुड़े दस्तावेज आदि का ब्योरा जमा करना होगा। बिल्डरों को इन बातों की जानकारी हर हाल में उपभोक्ताओं को उपलब्ध करानी होगी। उपभोक्ता अपनी पसंद की परियोजना भी चुन सकेंगे।
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शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू ने इस बिल को बेहद अहम बताते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को आ रही कई तरह की परेशानियों को दूर करने के लिए सरकार ने इस आशय का कानून बनाना तय किया। उन्होंने कहा कि कानून बन जाने से बिल्डर उपभोक्ताओं को प्रताड़ित नहीं कर सकेंगे।
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खास तौर पर उपभोक्ताओं को बिल्डरों के परियोजना की सारी जानकारी हासिल होगी। गौरतलब है कि लोकसभा से पहले से ही पारित इस बिल को राज्यसभा ने पारित कर दिया था। हालांकि, इस दौरान उच्च सदन ने कुछ संशोधन भी पारित किए थे। इसलिए बिल को कानून बनाने की अंतिम बाधा दूर करने केलिए नियमानुसार इन संशोधनों की मंजूरी के लिए फिर से लोकसभा में पेश किया गया।
कानून बनने से क्या बदलेगा
-बिल्डर नहीं दे पाएंगे भ्रामक विज्ञापन
-पारदर्शिता बढ़ने से बढ़ेगा निवेश और घटेगी मकान की कीमत
-नियामक प्राधिकरण के गठन से कानूनी दांवपेंच में नहीं फंसेंगे उपभोक्ता
-बिना प्राधिकरण की मंजूरी से अपार्टमेंट न बनने से अवैध जगहों पर नहीं होगा निर्माण
-डेवलपर को अलग अकाउंट में रखना होगा ग्राहक के एडवांस राशि का 70 फीसदी पैसा, इससे निर्धारित समय में काम पूरा न करने वाले दूसरा प्रोजेक्ट नहीं कर पाएंगे शुरू
-लैंड टाइटल पर उपलब्ध होगा इंश्योरेंस, बाद में होने वाले विवाद से मिलेगा ग्राहक को फायदा
-बिल्डिंग या परियोजना का लेआउट नहीं बदल सकेंगे डेवलपर
-शिकायत सही पाए जाने पर प्रमोटर, डेवलपर को भुगतनी होगी तीन साल की सजा और लगेगा जुर्माना