अब ग्राहक तय करेगा, होटल-रेस्त्रां में सर्विस चार्ज देना है या नहीं
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अब होटल,कंपनी और रेस्त्रां चलाने वाले सर्विस चार्ज देने के लिए ग्राहकों को बाध्य नहीं कर सकेंगे। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी कंपनी, होटल या रेस्त्रां ग्राहकों से जबर्दस्ती सर्विस चार्ज नहीं वसूल सकता। केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों से कहा है कि वह कंपनियों, होटलों और रेस्त्रां को इस बारे में सचेत कर दें।
गौरतलब है कि अलग-अलग टैक्सों के अलावा बिल में सर्विस चार्ज लगा हो तो इसका भुगतान पहले से ही वैकल्पिक था, लेकिन होटलों और रेस्टोरेंट वालों ने इसे जरूरी बना दिया था और ग्राहक की मर्जी के बिना वह सर्विस चार्ज वसूल रहे थे। मंत्रालय को शिकायतें मिलीं तो उसने स्पष्टीकरण जारी किया। उपभोक्ताओं ने कई शिकायतें की हैं कि होटल और रेस्त्रां टिप्स के रूप में 5 से 20 प्रतिशत तक 'सर्विस चार्ज' लगाते हैं जिसका भुगतान करने का दबाव उपभोक्ताओं पर बनाया जाता है, जिसका सर्विस की कैटिगरी से कोई लेना-देना नहीं होता है।'
इस स्पष्टीकरण में कहा गया है कि बिल में टैक्स जोड़ने के बाद सर्विस चार्ज लगाया गया हो तो उसे चुकाना वैकल्पिक होगा। यानी, अगर उपभोक्ता को लगे कि उसे मिली सेवा से वह पूर्णतः संतुष्ट है तो वह सर्विस चार्ज दे, वरना वह सर्विस चार्ज के रूप में एक रुपया भी न दे। साथ ही मंत्रालय ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वो होटलों से कहें कि वो उचित जगह पर इसकी जानकारी चिपका दें कि सर्विस चार्ज का भुगतान पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करता है, इसमें कोई जोर-जबर्दस्ती नहीं हो सकती।
Dept of Consumer Affairs asks State Govts to advise hotels/restaurants to give info tht consumer has discretion to pay service charge or not
— ANI (@ANI_news) January 2, 2017
फोरम में शिकायत कर सकता है उपभोक्ता
मंत्रालय की विज्ञप्ति कहती है, 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (कन्ज्यूमर प्रोटेक्शन ऐक्ट), 1986 में कहा गया है कि बिक्री, इस्तेमाल या किसी सामान की आपूर्ति अथवा किसी सेवा के लिए किसी अनुचित तरीका अपनाने या धोखा देने को गलत धंधा (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) माना जाएगा।
ऐसे में उपभोक्ता इस अधिनियम के अंतर्गत स्थापित उचित फोरम में ऐसे गलत धंधे के खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकता है।'
आगे कहा गया है कि इसी संदर्भ में केंद्र सरकार के उभपोक्ता मामलों के विभाग ने होटल असोसिएशन ऑफ इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा जिसने जवाब में कहा है कि सर्विस चार्ज का भुगतान पूरी तरह से उपभोक्ता की मर्जी पर निर्भर करता है और अगर कोई ग्राहक उसे मिली सेवा से संतुष्ट नहीं है तो बिल से सर्विस चार्ज पूरी तरह हटा सकता है। इसलिए, इसे असोसिएशन खुद से ही स्वीकार कर रहा है।