जानिए किस वजह से हर रोज महंगा होता जा रहा है पेट्रोल-डीजल
- लॉकडाउन में ढील के चलते पेट्रोल-डीजल की मांग में अचानक वृद्धि हुई है
- कंपनियों द्वारा दैनिक आधार पर कीमतों में संशोधन फिर से शुरू हो गया है
- ओपेक ने कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती को जुलाई अंत तक और बढ़ा दिया है
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सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने रविवार को 83 दिनों के अंतराल के बाद कीमतों की दैनिक आधार पर फिर समीक्षा शुरू की है। इसके बाद से पिछले तीन दिनों से तेल की कीमतों में इजाफा हो रहा है।
पूरे देश में लागू लॉकडाउन के कारण जारी प्रतिबंधों में छूट के बाद ईंधन की मांग बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों में मामूली तेजी की वजह से कीमतें बढ़ी हैं। लॉकडाउन में धीरे-धीरे छूट दिए जाने के बाद अब निजी वाहनों और ऑटो-टैक्सी आदि को चलने की अनुमति दे दी गई है, जिसके चलते पेट्रोल-डीजल की मांग में अचानक वृद्धि हुई है। लॉकडाउन के तीन चरणों तक एक तरह से सड़कों पर वाहन न के बराबर निकलते थे।
दैनिक आधार पर शुरू हुआ संशोधन
एक तेल कंपनी के अधिकारी ने बताया कि दैनिक आधार पर कीमतों में संशोधन फिर से शुरू हो गया है। तेल कंपनियां हालांकि, एटीएफ और एलपीजी की कीमतों की नियमित रूप से समीक्षा कर रही थीं, लेकिन 16 मार्च से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
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14 मार्च को की थी उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के लाभ को सोखने के लिए सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने कीमतों की दैनिक समीक्षा रोक दी थी।
ग्राहकों पर नहीं डाला शुल्क में बढ़ोतरी का भार
इसके बाद सरकार ने छह मई को एक बार फिर पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क को 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया। इस वृद्धि के बाद पेट्रोल पर कुल उत्पाद शुल्क बढ़कर 32.98 रुपये लीटर और डीजल पर 31.83 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया। तेल कंपनियों ने हालांकि, उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी का भार ग्राहकों पर नहीं डाला, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के साथ उसे समायोजित कर दिया गया।
ओपेक और उससे संबद्ध देशों ने कच्चे तेल के उत्पादन में करीब एक करोड़ बैरल प्रतिदिन की कटौती को जुलाई अंत तक एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। यह कदम कोरोना वायरस की वजह से पैदा हुई स्थिति के मद्देनजर बाजार में स्थिरता लाने की उम्मीद में उठाया गया है। चीन में तेल की मांग बढ़ने के साथ सऊदी ने कीमतों में बढ़ोतरी की है। सऊदी अरामको ने एशिया को निर्यात करने वाली अरब लाइट की कीमतों में 6.10 डॉलर प्रति बैरल का इजाफा किया है।
नरेंद्र मोदी सरकार ने मई 2014 में जब पहली बार सत्ता संभाली थी तब पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 9.48 रुपये लीटर और डीजल पर 3.56 रुपये प्रति लीटर पर था।
रोक दी गई थी दैनिक समीक्षा
कोरोना वायरस महामारी के कारण कच्चे तेल की कीमत अप्रैल में एक दशक के सबसे निचले स्तर पर जा पहुंची थी। भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी तेल आयात करता है। अधिकारियों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव के कारण तेल कीमतों की दैनिक समीक्षा को रोक दिया गया था। अब जबकि बाजार में कुछ हद तक स्थिरता दिखने लगी है दैनिक मूल्य समीक्षा शुरू कर दी गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उठापटक के बावजूद तेल कंपनियों ने विमान ईंधन एटीएफ और एलपीजी के दाम में लगातार संशोधन किया है।