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भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा, धराशायी हो सकता है शेयर बाजार

Sun, 21 Apr 2019 05:10 PM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sun, 21 Apr 2019 05:10 PM IST
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Indian share market is in danger due to participatory notes

विदेशी निवेशकों ने अप्रैल में अब तक देश के पूंजी बाजार में 11,012 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में निवेश कैसे करते हैं ? भारत में विदेशियों के पास निवेश का एक विकल्प मौजूद होता है, वो है पार्टिसिपेटरी नोट्स यानी पी-एन। दरअसल पार्टिसिपेटरी नोट्स वो दस्तावेज होते हैं, जिनके माध्यम से कुछ व्यक्तियों या संस्थाओं को भारतीय शेयर बाजार में भाग लेने का मौका मिलता है। भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व की बेहतर अर्थव्यवस्था में शुमार है। लेकिन पार्टिसिपेटरी नोट्स के जरिए भारतीय बाजार बिना किसी पूर्व सूचना के धराशायी हो सकता है। 

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भारत के लिए बड़ा खतरा है पार्टिसिपेटरी नोट्स

पार्टिसिपेटरी नोट्स भारत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह विदेशियों को गुप्त निवेश की सुविधा देता है। जो लोग भारत में सीधे निवेश नहीं करना चाहते, वो पी-नोट्स के जरिए निवेश करते हैं। इसमें फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर यानी एफआईआई भी शीमिल है। 

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तमाचे की तरह है पी-नोट्स

इस संदर्भ में प्रसिद्ध अर्थशास्त्री आर. वैद्यनाथन ने कहा कि पी-नोट्स भारतीय घरेलू निवेशकों के लिए एक तमाचे की तरह है। पार्टिसिपेटरी नोट्स के जरिए निवेश करने वाले विदेशियों को अपनी पहचान छुपाने की सुविधा मिलती है। इसकी मदद से वे अपनी पहचान बताए बिना भारतीय बाजार में निवेश करते हैं। इतना ही नहीं, सेबी के पास भी पी-नोट्स के जरिए निवेश करने वाले वास्तविक निवेशकों की पहचान नहीं होती है। 

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पी-नोट्स के जरिए हुआ 78,110 करोड़ रुपये का निवेश

भारत में ऐसी बहुत सी कॉस्मेटिक और पेय उत्पादों के क्षेत्र में काम कर रही कंपनियां थीं, जो पार्टिसिपेटरी नोट्स के जरिए हुए निवेश के चलते अपना अस्तित्व खो चुकी हैं। विदेशियों द्वारा अनजान तरीके से किया गया निवेश भारत के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है। घरेलू शेयर बाजारों में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए निवेश मार्च के अंत तक बढ़कर 78,110 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

आरबीआई और सरकार आमने-सामने

जहां एक ओर भारतीय रिजर्व बैंक इसे खत्म करने की बात कह रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार इसमें सुधार लाने की कोशिश में लगी है। आरबीआई और वित्त मंत्रालय पी-नोट्स निवेशकों को लेकर शुरू से एक दूसरे के विरोध में हैं। दरअसल आरबीआई इस तरह के निवेश को भारतीय शेयर बाजारों के लिए खतरा बताते हुए इस पर रोक की मांग कर रहा है। वहीं, वित्त मंत्रालय आरबीआई के इस फैसले का विरोध कर रहा है।   

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