टमाटर के बाद आसमान पर दाल के दाम, बिक रही 200 रुपए किलो
- म्यांमार और अफ्रीकी देशों से होगा दाल का आयात, बनेगा बफर स्टॉक
- जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का भी हुआ फैसला
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दालों और सब्जियों की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। टमाटर के दाम पहले ही आसमान छू रहे थे, अब पिछले कुछ दिनों में दाल समेत कई अन्य सब्जियां भी तेजी से और महंगी हुई हैं। बाजार में दाल के दाम 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच रहे हैं।
महंगाई पर चौतरफा आलोचना होने के बाद सरकार ने दालों की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया है, जिनमें म्यांमार और अफ्रीकी देशों से दाल का आयात करना, दालों का बफर स्टॉक बनाना तथा जमाखोरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना शामिल है।
दालों की कीमत 170 रुपये और कई जगह टमाटर की कीमत 100 रुपये प्रति किलो पहुंचने के मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में चर्चा हुई। इस बैठक में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह, खाद्य मंत्री रामबिलास पासवान, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण तथा शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू भी मौजूद थे। बैठक में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक इस दौरान बताया गया कि कीमतें क्यों चढ़ीं और इस स्थिति से निपटने के लिए क्या हो सकता है।
जमाखोरों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई
बैठक में बताया गया कि इस साल 1.15 लाख टन दालों की खरीद हो चुकी है, जिनमें से 10 हजार टन दाल राज्यों को जारी की जा चुकी है। इसमें से और दालें शीघ्र ही कुछ और राज्यों को दी जाएंगी। यही नहीं, यदि जरूरत पड़ी तो और दाल का आयात किया जाएगा।
इसके अलावा दालों का बफर स्टॉक बनाने पर भी सहमति बनी और निर्णय हुआ कि इसके लिए म्यांमार और अफ्रीकी देशों से दाल का आयात किया जाए। इस दौरान दाल के जमाखोरों पर भी कड़ी कार्रवाई करने पर सहमति बनी।
बैठक के बाद पासवान ने बताया कि बैठक का मुख्य विषय दाल ही था। इस साल डेढ़ लाख टन दाल खरीद का लक्ष्य था, जिसमें से 1.15 लाख टन की खरीद हो चुकी है तथा अभी यह जारी है। उनके मुताबिक वित्त मंत्री ने सरकारी के साथ साथ निजी कंपनियों द्वारा भी दालों के भरपूर आयात की वकालत की ताकि दाम पर अंकुश लगाया जा सके। लेकिन निजी आयातकों पर नजर भी रखी जाए कि वे दाल बाजार में बेच रहे हैं या गोदाम में भर रहे हैं।