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अरहर के बाद अब चना व मसूर दाल का होगा आयात
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 02 Jul 2016 02:16 AM IST
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घरेलू बाजार में दालों की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार अब सार्वजनिक कंपनी एमएमटीसी के माध्यम से चने व मसूर की दाल का आयात करने जा रही है। अब तक सरकार मुख्य रूप से अरहर दाल का आयात कर रही थी। घरेलू बाजार में दाल के दाम पर काबू रखने के लिए सरकार दालों का बफर स्टॉक बनाना चाहती है ताकि दाल के भाव में बेतहाशा बढ़ोतरी नहीं हो सके।
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पिछले महीने अरहर दाल के आयात के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने म्यांमार सरकार से बात की थी। अरहर दाल की कीमत बढ़ने पर उसके समर्थन में अन्य दालों के भाव भी बढ़ जाते हैं। इसलिए सरकार ने अब मसूर व चने की दाल का आयात करना चाहती है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार चने व मसूर की 7,500 टन दाल का आयात कर सकती है। इस साल चने की फसल कम हुई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक 7,500 टन दाल में 2,500 टन मसूर की दाल का आयात किया जाएगा तो 5,000 टन चने की दाल का आयात होगा।
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सूत्रों के मुताबिक जल्द ही एमएमटीसी इन दालों का आयात करने के लिए टेंडर जारी करने जा रही है। एमएमटीसी पहले ही 46,000 टन दाल का आयात करने का आर्डर कर चुकी है। इनमें से 14,000 टन से अधिक आयातित दालें भारत पहुंच चुकी है तो बाकी की दालें भी जल्द ही घरेलू बाजार में आ जाएंगी। पिछले साल अरहर दाल की कीमतें 200 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई थी। इसके बाद सरकार ने दाल का बफर स्टॉक बनाने का फैसला किया।
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बफर स्टॉक के लिए सरकार अब तक 1.19 लाख टन दाल की खरीदारी कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक जुलाई आखिर तक रबी में पैदा होने वाली दालों की सरकारी खरीद की जा सकती है। वर्तमान में अरहर दाल के भाव 120-125 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बताए जा रहे हैं।
केंद्र सरकार की तरफ से देश के विभिन्न राज्यों को 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अरहर दालें दी गईं ताकि राज्यों में अधिकतम 120 रुपये प्रति किलोग्राम की दरों से अरहर दालों की बिक्री हो सके। वर्ष 2015-16 में 176 लाख टन दालों के उत्पादन की संभावना है जबकि घरेलू स्तर पर दाल की सालाना मांग 235 लाख टन है। इस अंतर को बराबर करने के लिए हर साल दालों का आयात करना पड़ता है।