एफपीआई के लिए केवाईसी आसान, सेबी ने कई सुधारों का किया ऐलान
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पूंजी बाजार नियामक सेबी ने सेबी के लिए पंजीकरण, केवाईसी प्रक्रिया आसान बनाने के साथ ही कई सुधारों का ऐलान किया। सेबी ने एफपीआई को प्रतिभूतियों के कैरी आउट ऑफ मार्केट हस्तांतरण की भी मंजूरी दे दी है। कैरी आउट ऑफ मार्केट हस्तांतरण का मतलब दो पक्षों के बीच परस्पर सहमति से तय शर्तों के आधार पर होने वाले ऐसे लेनदेन से है, जिसमें स्टॉक एक्सचेंज की कोई भूमिका नहीं होती है।
बुधवार को हुई सेबी की बोर्ड बैठक में एफपीआई के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाने और गति देने के प्रयासों के तहत कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के अंतर्गत व्यापकता आधारित पात्रता के मानक को खत्म करने के अलावा एफपीआई को अब तीन की बजाय दो श्रेणियों में बांटा जाएगा।
सेबी ने एक बयान में कहा, ‘केवाईसी के लिए जरूरी प्रक्रिया को खासा सरल कर दिया गया है।’ आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों के आधार पर एफपीआई नियमों का मसौदा दोबारा तैयार किया गया है। म्युचुअल फंड्स द्वारा जारी ऑफशोर फंड्स को एफपीआई के रूप में पंजीकरण के बाद देश में निवेश की अनुमति मिलेगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में इकाइयों की स्थापना के लिए एफपीआई के लिए जरूरी शर्तों को पूरा करना होगा।
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रेटिंग एजेंसियों को देनी होगी कर्ज की जानकारी
सेबी ने कर्ज लौटाने में देरी और संभावित डिफॉल्ट जैसी जानकारियों क्रेडिट एजेंसियों को उपलब्ध कराने के नियम सख्त करने का ऐलान किया है। आईएलएंडएफएस सहित कंपनियों द्वारा कई बड़े लोन डिफॉल्ट के मामलों में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां ऐसी प्रतिभूतियों और इकाइयों रेटिंग देने को लेकर जांच के दायरे में आ गई थीं। रेटिंग एजेंसियों ने कंपनियों और ऋणदाताओं से जानकारी नहीं मिलने की बात कही थी।
इस दिक्कत को दूर करने के लिए सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से जुड़े नियमों में संशोधन करने का फैसला किया है, जिसके तहत किसी सूचीबद्ध या गैर सूचीबद्ध इकाई को ऋणदाता संस्थानों या इकाइयों से अपने मौजूदा कर्ज को लेकर सहमति रेटिंग एजेंसी को उपलब्ध करानी होगी।
पांच बड़े फैसले
- भेदिया कारोबार की सूचना देने वाले को मिलेगा एक करोड़ का इनाम
- म्युचुअल फंड कंपनियों को अपना निवेश चरणबद्ध तरीके से सूचीबद्ध या सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों में ले जाना होगा
- हाउसिंग फाइनेंस, एनबीएफसी इकाइयों के लिए बायबैक नियम हुए आसान
- स्टार्टअप एक साल बाद आ सकेंगे स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य बोर्ड पर, नियमों को मंजूरी
- स्मार्ट सिटीज को ‘मुनि बांड्स’ के माध्यम से कोष जुटाने की मिली मंजूरी