खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई दर 8.18 फीसदी हुई
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खुदरा महंगाई दर की तरह थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी का रुख जारी है। गत जून माह की थोक महंगाई दर बढ़ोतरी के साथ 1.62 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई वहीं खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर आलू, दाल व सब्जी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की वजह से बढ़त के साथ 8.18 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई।
इस साल मई में थोक महंगाई दर 0.79 फीसदी तो पिछले साल जून में थोक महंगाई दर -2.13 फीसदी थी। इस साल मई में खाद्य वस्तुओं की थोक मुद्रास्फीति दर 7.88 फीसदी थी।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल जून माह में आलू के दाम में पिछले साल जून के मुकाबले 64.48 फीसदी की बढ़ोतरी रही। इस अवधि में दाल के भाव में 26.61 फीसदी, सब्जी में 16.91 फीसदी, अंडा, मांस व मछली में 6.67 फीसदी, गेहूं में 6.83 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। लेकिन प्याज के दाम में जून माह में 28.60 फीसदी की गिरावट रही।
आंकड़ों के मुताबिक जून माह में गैर खाद्य पदार्थों की थोक महंगाई दर 5.72 फीसदी रही जबकि मैन्यूफैक्चरिंग में उत्पाद की थोक मुद्रास्फीति दर 1.17 फीसदी रही। हालांकि इस अवधि में फ्यूल व पावर की मुद्रास्फीति दर में 3.62 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जून महीने में पेट्रोल के थोक दाम में 8.74 फीसदी तो एलपीजी में 0.98 फीसदी की गिरावट रही।
मैन्यूफैक्चरिंग उत्पाद की श्रेणी में चीनी के दाम में 26.09 फीसदी की बढ़ोतरी रही तो खाद्य तेल के दाम में 3.42 फीसदी का इजाफा रहा।
घटी सस्ते ब्याज की आस
पहले खुदरा महंगाई दर और अब थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी के रुख से आने वाले महीनों में रिजर्व बैंक की तरफ से ब्याज दरों में कटौती की संभावना क्षीण हो गई है। औद्योगिक संगठनों के मुताबिक औद्योगिक उत्पादन में गिरावट के बाद थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी से उत्पादक की तरफ से उत्पाद के दाम बढ़ेंगे और इसका असर खुदरा महंगाई दर पर पड़ेगा और इस कारण रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती की स्थिति में नहीं होगा।
औद्योगिक संगठनों के मुताबिक इस स्थिति से निकलने के लिए सरकार को पूंजीगत खर्च को बढ़ाना चाहिए।
‘महंगाई दरों में बढ़ोतरी से अगस्त में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की आस धूमिल पड़ गई है। रिजर्व बैंक फिलहाल दरों में कोई कटौती नहीं करेगा और दरों में अच्छे खासे समय तक यथास्थिति बरकरार रह सकती है।’
-इंद्रनील पन, मुख्य अर्थशास्त्री, आईडीएफसी बैंक