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चावल, दाल, चीनी जैसी चीजें रहेंगी जीएसटी से बाहर

Fri, 05 Aug 2016 03:09 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 05 Aug 2016 03:09 AM IST
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Essential commodities to remain out from GST perview
GST BILL

चावल, दाल, चीनी जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुएं वस्तु एवं सेवा कर के दायरे में नहीं आएंगी। इस प्रकार की चीजों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। लेकिन इन चीजों के इस्तेमाल से बने खाने की अन्य चीजों पर जीएसटी लागू होगा। जीएसटी से जुड़े विशेषज्ञों ने बताया कि जीएसटी ड्राफ्ट में आरंभ से ही खाद्य पदार्थों के कच्चे माल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है।

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समय बीतने के साथ ड्राफ्ट में कई प्रकार के बदलाव किए गए, लेकिन कच्चे खाद्य पदार्थों को लेकर कोई बदलाव नहीं किया गया। वर्तमान में भी मंडी में बिकने वाले चावल, दाल, चीनी व अन्य अनाज पर कोई कर नहीं लगता है। वैसे ही जीएसटी के अमल में आने के बाद भी उनपर कोई कर नहीं लगेगा।
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विशेषज्ञों ने बताया कि मंडी में बिकने वाले चावल, दाल जैसी चीजें जीएसटी से बाहर होंगी, लेकिन जैसे ही इन वस्तुओं के इस्तेमाल से खाने की कोई अन्य चीज बनाकर बेची जाएंगी तो उन चीजों पर जीएसटी लागू होगा।
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जीएसटी के अमल में आने के बाद कई खाद्य पदार्थ महंगे भी हो जाएंगे क्योंकि अधिकतर खाद्य पदार्थों पर अभी 5-8 फीसदी का वैट लगता है और जीएसटी लागू होने के बाद उन चीजों 18 फीसदी या इससे अधिक टैक्स लगने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के मुताबिक 15 फीसदी ऐसी चीजें हैं जिन पर सिर्फ वैट लगता है और ये सारी चीजें जीएसटी लागू होने के बाद महंगी हो सकती है।

जीएसटी में रजिस्ट्रेशन होगा बेहद आसान

Essential commodities to remain out from GST perview
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सरकार का कहना है कि वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली में कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन बेहद आसान होगा। साथ ही जीएसटी के लिए आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का काम भी तेजी से चल रहा है। केन्द्रीय राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने बृहस्पतिवार को बताया कि जीएसटी प्रणाली में रजिस्ट्रेशन कराना बेहद आसान होगा। जिन कारोबारियों ने पहले से ही स्टेट वैट, सेंट्रल एक्साइज या सर्विस टैक्स विभाग में पंजीकरण करवा रखा है, उन्हें फिर से जीएसटी में पंजीकरण करवाने की आवश्यकता नहीं होगी।

जो नए कारोबारी होंगे, उन्हें सिर्फ एक आसान सा फार्म भरना होगा और ऑनलाइन जमा करना होगा। आवेदक को तीन में रजिस्ट्रेशन नंबर मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि जीएसटी के लिए तीन अलग-अलग स्तर पर काम करना होगा। पहला, लीगल फ्रेमवर्क तैयार करना। दूसरा, आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और तीसरा, अधिकारियों एवं कारोबारियों को इस प्रणाली के लिए अनुकूल बनाना। उन्होंने कहा कि 16 राज्यों की विधानमंडलों से इसे समर्थन मिलने के बाद जीएसटी का एक फ्रेमवर्क बनाकर जीएसटी काउंसिल के पास भेजा जाएगा।

काउंसिल द्वारा पास होने के बाद सेंट्रल और स्टेट जीएसटी के फ्रेमवर्क पर काम होगा। अढिया ने बताया कि आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) नाम से एक कंपनी बनायी जा चुकी है। इसके लिए सूचना तकनीक क्षेत्र की कंपनी इन्फोसिस ने सॉफ्टवेयर भी तैयार कर लिया है। हार्डवेयर के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए जा चुके हैं।

वित्त सचिव ने बताया कि जल्द ही हार्डवेयर की सप्लाई भी शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के चुनिंदा अधिकारियों को जीएसटी प्रणाली के अनुरूप प्रशिक्षण देना भी शुरू हो चुका है। ये अधिकारी अपने अपने कार्यालय में लौट कर अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।

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