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शेयर बाजार में डूब गए 1818 कंपनियों के शेयर, निवेशकों को लगी 4.42 लाख करोड़ की चपत

Thu, 04 Oct 2018 01:08 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 04 Oct 2018 01:08 PM IST
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black thursday in share market, investor losses 4.42 lakh crore in two days
शेयर बाजार में गिरावट
शेयर बाजार में 4 अक्टूबर का दिन काला गुरुवार साबित हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी पर लिस्टेड 2400 से अधिक कंपनियों में से केवल 1818 कंपनियों के शेयर डूब गए। इससे निवेशकों को केवल 3 घंटे में 2.63 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लग गई। 
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बुधवार को भी साफ हुए 1.79 लाख करोड़

बुधवार को शेयर बाजार में ऐसी तबाही मची कि 1.79 लाख करोड़ रुपए साफ हो गए। बीएसई में लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 145.43 लाख करोड़ रुपए से घटकर 143.64 लाख करोड़ रुपए पर आ गया।
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दो दिन में 4.42 लाख करोड़ का नुकसान

निवेशकों को सिर्फ दो दिन में ही 4.42 लाख करोड़ रुपये की चपत लग गई है। जो शेयर बाजार हाल तक उछल रहे थे, अब दर्द से कराह रहे हैं। बुधवार को बेंचमार्क इंडेक्स करीब डेढ़ फीसदी गिरकर बंद हुआ। दूसरी तरफ रुपए की पिटाई भी जारी है, जो डॉलर की तुलना में 73.34 पर पहुंच गया है।
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सोमवार को अच्छी-खासी पिटाई के बाद बुधवार को एक बार फिर कच्चे तेल के बढ़ते दाम और कमजोर होते रुपए ने बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स पर खासा दबाव बनाया। 

क्या है वजह

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने की वजह से आयातकों के बीच अमरीकी करेंसी की काफी मांग देखने को मिली, जिसकी वजह से रुपया कमजोर होते हुए पहली बार डॉलर के खिलाफ 73 का आंकड़ा पार कर गया।

लेकिन बीते कई दिनों से जारी गिरावट वाले बाजार में इस हाहाकार की वजह क्या है। क्या ये वैश्विक बाजार में गिरावट का असर है या फिर भारतीय शेयर मार्केट घरेलू स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रहा है? जानकारों का कहना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह कच्चा तेल या क्रूड और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते उसके दाम हैं।

आर्थिक मामलों के जानकार सुदीप बंदोपाध्याय ने बीबीसी को बताया कि मंगलवार और बुधवार को क्रूड ऑयल के भाव में गजब का उछाल आया है और कुछ हद तक इसका रिश्ता रुपये की कमजोरी से भी है, इन दोनों वजह से भारत के शेयर बाजार में गिरावट आ रही है।

सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा, ''कच्चा तेल 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। क्रूड के दाम बढ़ने की वजह से रुपया भी कमजोर हो रहा हैऔर इन दोनों कारणों से बाजार नर्वस है।'' उनका कहना है कि इन दोनों वजहों से भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव आएगा क्योंकि भारत सरकार और रिजर्व बैंक, दोनों के बजटीय प्रावधान 65 से 70 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से होते हैं। लेकिन अब ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है और हालात नाजुक बन गए हैं।

हालत कैसे सुधरेगी

black thursday in share market, investor losses 4.42 lakh crore in two days
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क्या कच्चा तेल आगे भी इतना ही महंगा रहेगा? जानकारों का कहना है कि जब अमरीका से ज्यादा शेल ऑयल बाजार में आना शुरू होगा, तो क्रूड के दाम भी कम होने लगेंगे। सुदीप ने कहा, ''क्रूड इतना ज्यादा रहेगा, ऐसा नहीं लगता। मध्यम से लंबी अवधि में इसके दाम काबू में आ जाएंगे, लेकिन छोटी अवधि में मांग-आपूर्ति के बीच असंतुलन, ईरान जैसी भौगोलिक-राजनीतिक स्थितियों की वजह से छोटी अवधि में क्रूड की कीमतों पर दबाव रह सकता है।''

लीबिया में भी दिक्कतें जारी हैं। देश दो अलग-अलग सरकारों में बंटा हुआ है। एक हिस्से में तेल रिफाइनरी हैं और दूसरे हिस्से में नहीं हैं, ऐसे में वहां के हालात अजीबोगरीब बने हुए हैं।

कच्चा तेल और रुला सकता है

भारत को कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा ईरान से मिलता है और अमरीका की अगुवाई में इस देश पर आने वाले वक्त में कई पाबंदियां लग सकती हैं, ऐसे में क्या भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ जाएंगे?

सुदीप ने कहा, ''जी बिल्कुल, यही नहीं। बल्कि ऐसा हुआ तो दुनिया भर में कच्चे तेल के दाम बढ़ जाएंगे। इन्हीं सब शंकाओं की वजह से बाजार में दिक्कत है।'' इन हालात में छोटे निवेशकों को क्या करना चाहिए, उन्होंने कहा, ''ये बात सही है कि बड़ी गिरावट टेंशन बढ़ा देती है, लेकिन इस कमजोरी में भी कुछ मजबूत शेयर ऐसे हैं, जो किफायती दामों पर उपलब्ध हैं।''

रुपए की कमजोरी और तेल का उछलना, इन दोनों वजह के अलावा जिस तीसरे कारण ने बाजार को गिराया, वो इंफ्रा सेक्टर की ग्रोथ में कमी है। अगस्त में आठ इंफ्रा सेक्टरों की ग्रोथ धीमी होकर 4.2 फीसदी तक आ गई।

इसकी वजह है क्रूड ऑयल और फर्टिलाइजर के उत्पादन में गिरावट। कोर सेक्टर जुलाई में 7.3 फीसदी बढ़े थे, लेकिन अगस्त में खेल बदल गया। इसके अलावा एशियाई बाजारों में मंदी रही जिसका असर भारतीय शेयर मार्केट पर भी हुआ।

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