फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Banking Beema ›   why swiss banks are famous with rich people to hoard there black money

आखिर क्यों कालाधन छिपाने वालों का पसंदीदा देश है स्विट्जरलैंड

Tue, 24 Jul 2018 07:52 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 24 Jul 2018 07:52 PM IST
विज्ञापन
why swiss banks are famous with rich people to hoard there black money

भारतीयों समेत विश्व के कई रईसों के लिए स्विस बैंकों में काला धन छुपाना सबसे मुफीद जगह है। ऐसा इसलिए क्योंकि स्विट्जरलैंड में लागू कानून के हिसाब से इन बैंकों में स्थित खातों और उनके खातेदारों की जानकारी किसी को भी सार्वजनिक नहीं की जाती है। 

विज्ञापन


1934 से लागू है बैंक गोपनीयता कानून

स्विट्जरलैंड में 1934 से बैंक गोपनीयता कानून लागू है। इस कानून की वजह से बैंक का कोई भी जांच एजेंसी या अदालत भी बिना किसी ठोस सबूत के जानकारी को नहीं ले सकते हैं। 
विज्ञापन


यह भी पढ़ेः- स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा काले धन में आई 34 फीसदी की कमीः पीयूष गोयल
विज्ञापन
विज्ञापन


1 जनवरी 2009 से लागू हुआ फिनमा

स्विट्जरलैंड में 1 जनवरी 2009 से संघीय वित्तबाजार निगरानी आयोग (फिनमा) के पास सारे अधिकार हैं। यह आयोग ही बैंकों से सभी तरह की जानकारियां मांग सकता है, लेकिन उसको भी गोपनीयता बरतनी होगी।



बैंक गोपनीयता क़ानून की धारा 47 के अनुसार स्विट्जरलैंड के हर बैंक का हर कर्मचारी, अधिकारी, बैंकिंग से जुडी संस्थाएँ, एजेंट, लेखा-परीक्षक (ऑडिटर) और स्वयं बैंक निगरानी आयोग के सदस्य व कर्मचारी भी गोपनीयता बरतने के लिए बाध्य हैं। 

गोपनीयता का उल्लंघन बड़ा अपराध

why swiss banks are famous with rich people to hoard there black money

इस कानून का उल्लंघन होना स्विट्डरलैंड में बड़ा अपराध है। अगर इसके लिए एफआईआर भी दर्ज नहीं की गई है तब भी पुलिस और न्यायिक एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं। लापरवाही से जानकारी लीक करने ऐसे लोगों को 2.50 लाख डॉलर का जुर्माना देना पड़ता है। वहीं जानबूझ कर जानकारी लीक करने पर तीन साल की जेल और नुकसान के अनुसार अर्थदंड लगेगा। बैंक को इस लीक से जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई अलग से करनी होगी। 

सरकारों की शिकायत पर आयोग पर निर्भर

अगर कोई विदेशी सरकार प्रामाणिक तौर पर शिकायत करती है तो भी उसे फिनमा के जरिए ही जानकारी मिल सकती है। फिनमा को भी स्विटजरलैंड की सरकार अनुरोध कर सकती है, जिसके बाद जानकारी देना है या फिर नहीं देना है यह आयोग पर निर्भर करता है।

यह भी पढ़ेंः- स्विस बैंकों में 50 फीसदी बढ़ा भारतीयों का धन, स्वामी का तंज- सरकार की बड़ी कामयाबी

किसी विदेशी सरकार के अनुरोध को बैंक तभी स्वीकार करते हैं, जब यह अनुरोध स्विस सरकार के माध्यम से आया हो, हर संदिग्ध व्यक्ति के बारे में अलग से ठोस प्रमाण हों और स्विस सरकार ने या किसी स्विस न्यायालय ने जानकारी देने का अनुमोदन किया हो। 

इन लोगों को मिल सकती है केवल खातों की जानकारी

अगर खातेदार जीवित नहीं है  तो उस स्थिति में स्विस बैंक केवल उसके सच्चे वारिस को ही इसकी जानकारी दे सकते हैं। पति या फिर पत्नी के पास अदालत का सर्टिफिकेट होना जरूरी है, जिसके बाद जानकारी मिल सकेगी।

खातेदार की संपत्ति कुर्क होने या उस का किसी बड़े भ्रष्टाचारी, आतंकवादी, धोखाधड़ी अथवा कालेधन की धुलाई वाले मामले से संबंध होने की स्थिति में अदालती आदेश पर ही किसी बैंक कर्मचारी को अदालत में गवाही देनी पड़ सकती है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed