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स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा काले धन में आई 34 फीसदी की कमीः पीयूष गोयल

Tue, 24 Jul 2018 01:15 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 24 Jul 2018 01:15 PM IST
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black money stashed in swiss banks down by 34 percent
केंद्र सरकार ने स्विस बैंकों में भारतीयों के जमा काले धन पर नए आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक जमा काले धन में कमी आई है। यह कमी 34 फीसदी की है जो कि बहुत बड़ी है। वहीं इससे पहले स्विस नेशनल बैंक की तरफ से जारी किए आंकड़ों के मुताबिक भारतीयों द्वारा जमा किए गए काले धन में 50 फीसदी का इजाफा होने की बात कही गई थी।  
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वित्त मंत्री ने दी राज्यसभा में जानकारी

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा कि पहले आई रिपोर्टों के मुताबिक 7000 करोड़ रुपये भारतीयों ने स्विस बैंकों में जमा किया था। हालांकि इसमें वो ट्रांजेक्शन भी शमिल थे जो भारतीय बैंकों की शाखा के ज़रिए किए गए हैं और जो भारत की राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखाओं से स्विस बैंक की शाखाओ में ट्रांसफर हुए हैं। गोयल ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने स्विस बैंक से खातों में जमा हुए काले धन के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसके मुताबिक स्विस बैंकों में भारतीयों के पैसे में बीते एक साल में 34 फीसदी की कमी आई है।
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यूपीए के राज में 770 अरब का कालाधन

इससे पहले यह जानकारी भी सामने आई थी कि 2005-14 के बीच (यूपीए सरकार के 10 साल का कार्यकाल) में कुल 770 अरब का कालाधन भारत में आया था, लेकिन वित्त मंत्रालय ने संसद की गोपनीयता भंग होने की संभावना के चलते इस तरह की रिपोर्ट को जारी करने से साफ इंकार कर दिया था। 
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कांग्रेस के कार्यकाल में बने थे तीन कमीशन

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कांग्रेस सरकार ने 2011 में काला धन का पता लगाने के लिए तीन अलग-अलग संस्थानों से रिपोर्ट तैयार करने को कहा था, जिन्होंने 30 दिसंबर 2013, 18 जुलाई 2014 और 21 अगस्त 2014 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। यह तीन कमीशन दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च व फरीदाबाद स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट हैं। 

केंद्र ने दिया यह तर्क

केंद्र सरकार ने इन तीनों रिपोर्टों को सार्वजनिक करने से पूरी तरह से इंकार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि उसने यह रिपोर्ट पिछले साल 21 जुलाई को संसद में वित्त मामलों के लिए बनी स्टैंडिंग कमेटी को सौंप दी थी। अभी यह रिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी के पास विचाराधीन है, जिसके चलते इसके बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी जा सकती है। 

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