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निवेश के मंत्र 8: होम लोन को MCLR से रेपो रेट में बदलने का सही समय, ऐसे समझें फायदे का गणित

Mon, 04 May 2020 05:51 AM IST
संदीप भट्ट बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: संदीप भट्ट Updated Mon, 04 May 2020 05:51 AM IST
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सार
अधिकतर बैंक अपने ग्राहकों को पेश नहीं कर रहे ऑफर...लोन स्विच करने से घटेगी ईएमआई 
अगर आपका होम लोन अक्तूबर 2019 से पहले का है तो यह सीमांत 
 
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This is the best time to switch from MCLR to repo rate linked home loans

विस्तार

रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में लगातार कटौती के साथ बैंकों पर भी इसका लाभ देने का दबाव बनाया। इस कोशिश से अधिकतर बैंकों ने खुदरा कर्ज को रेपो रेट से जोड़ दिया और ग्राहकों को सस्ता कर्ज मिलने लगा। लेकिन जिन ग्राहकों ने पहले से ही एमसीएलआर से जुड़े कर्ज ले रखे हैं, उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे ग्राहक अपने पुराने कर्ज को नए बेंचमार्क में शिफ्ट कराकर ईएमआई घटा सकते हैं। प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट...

अगर आपका होम लोन अक्तूबर 2019 से पहले का है तो यह सीमांत 
लागत की उधारी दर (एमसीएलआर) पर आधारित होगी। कर्ज लेते समय बैंक पूरी अवधि के लिए एग्रीमेंट कराते हैं, इसलिए अपनी दरों में बदलाव के लिए आपको खुद बैंक से मोलभाव करना होगा। अपने बैंक से बताना होगा कि पुराने एमसीएलआर से जुड़े कर्ज को रेपो आधारित उधारी दर (आरएलएलआर ) से जोड़ दिया जाए। हालांकि, यह ध्यान रखना होगा कि एक बार कर्ज को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ दिया तो इसे बदला नहीं जा सकता है। आरबीआई नियमों के मुताबिक, नए सिस्टम में जाने के लिए बैंकों को अपने ग्राहक की मदद करनी होगी।   

क्यों और कैसे चुनें नया विकल्प
किसी बैंक का एमसीएलआर आधारित होम लोन रेपो रेट के अलावा बैंक की आंतरिक लागत पर भी निर्भर करता है। जो हर बैंक की अलग-अलग दर हो सकती है। यही कारण है कि इस पर लोन दर ज्यादा हो जाती है।

  • आरबीआई के रेपो रेट घटाने के तत्काल बाद एमसीएलआर में कटौती नहीं होती, न ही रेपो रेट के बराबर कटौती होती है। वहीं, रेपो आधारित लोन आरबीआई की कटौती के तत्काल बाद ही समान रूप से सस्ता हो जाता है। 
  • एसबीआई का एमसीएलआर आधारित लोन 10 अप्रैल, 2020 से 7.70% है, जबकि रेपो आधारित होम लोन (30 लाख तक) की दर 1 मई, 2020 से 7.40% सालाना है। 
  • एसबीआई रेपो रेट (4.4%) में 2.65% लागत जोड़कर गणना करता है। इसमें 35 आधार अंक की अन्य लागत व प्रीमियम शामिल।

ऐसे समझें फायदे का गणित
माना आपने एसबीआई से एमसीएलआर पर आधारित 30 लाख रुपये का लोन लिया था, जिसे 20 साल में पूरा करना है। इसमें से 4 साल की ईएमआई आप अभी तक भुगतान कर चुके हैं और अब शेष राशि को रेपो रेट पर शिफ्ट करना चाहते हैं। अगर शेष  राशि 25 लाख रुपये और शेष समय 16 साल बचा है तो आपको रेपो रेट में आने से मौजूदा दरों पर ही 83 हजार रुपये का फायदा होगा। एमसीएलआर पर 25 लाख के लिए 16 साल तक 7.70% की दर पर कुल 18,55,567 रुपये ब्याज चुकाना होगा। वहीं, रेपो रेट पर इसी अवधि में 17,72,313 रुपये ही ब्याज देना होगा।

काम आएंगे ये तथ्य

  • पूरे लोन का 0.25% लेता है एसबीआई एमसीएलआर से रेपो में बदलने के लिए 
  • एनबीएफसी या एचएफसी से होमलोन है, तो ग्राहकों को नहीं मिलेगी यह सुविधा 
  • एसबीआई सालाना 6 लाख से ज्यादा आय वालों को ही रेपो रेट पर कर्ज देता है 

ग्राहक दो बातों पर ध्यान दें 
जिन ग्राहकों का पहले से होम लोन है, वे दो बातों का विशेष ध्यान रखें। पहला इसमें खर्च क्या आएगा और दूसरा दोनों ब्याज दर में अंतर से बचत कितनी होगी। अगर लोन के कई साल बाकी है तो मामूली कमी भी बड़ी बचत करा सकती है।  -आदिल शेट्टी, सीईओ, बैंक बाजार डॉट कॉम

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