केंद्रीय बैंक ने जुलाई में शुद्ध रूप से की 15.97 अरब डॉलर की लिवाली

पीटीआई, नई दिल्ली Updated Sat, 12 Sep 2020 03:41 PM IST
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RBI - फोटो : पीटीआई

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जुलाई में डॉलर का शुद्ध लिवाल रहा है। केंद्रीय बैंक के मासिक बुलेटिन के अनुसार जुलाई में उसने हाजिर बाजार से शुद्ध रूप से 15.97 अरब डॉलर खरीदे। आंकड़ों के अनुसार जुलाई में केंद्रीय बैंक ने 16.90 अरब डॉलर की खरीद की। इस दौरान उसने 93 करोड़ डॉलर की बिकवाली की। 
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पिछले साल समान महीने यानी जुलाई, 2019 में रिजर्व बैंक डॉलर का शुद्ध बिकवाल रहा था। उस समय रिजर्व बैंक ने 1.59 अरब डॉलर की खरीद की थी, जबकि 1.68 अरब डॉलर बेचे थे। इस साल जून में रिजर्व बैंक ने शुद्ध रूप से 9.81 अरब डॉलर की खरीद की। मई में भी उसने 4.36 अरब डॉलर की खरीद की। अप्रैल में उसने 1.14 अरब डॉलर की बिकवाली की। बीते वित्त वर्ष 2019-20 में केंद्रीय बैंक ने 45.09 अरब डॉलर की शुद्ध लिवाली की थी। उसने 72.20 अरब डॉलर की खरीद की थी, जबकि हाजिर बाजर में 27.10 अरब डॉलर की बिकवाली की थी।
एमएफआई के लिए पूंजी बफर बनाना महत्वपूर्ण
कोविड-19 की वजह से सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एमएफआई) के समक्ष वित्तीय जोखिम पैदा होने की संभावना है। ऐसे में एमएफआई के लिए पूंजी बफर बनाना और नकदी का प्रबंधन करना काफी महत्वपूर्ण है। 

रिजर्व बैंक के निरीक्षण विभाग के स्निमरदीप सिंह द्वारा लिखे गए इस लेख में कहा गया है कि कोविड-19 की वजह से बेशक सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के समक्ष नई चुनौतियां और उल्लेखनीय वित्तीय जोखिम पैदा हुआ है, लेकिन इसने उन्हें दीर्घावधि की जुझारू क्षमता विकसित करने का भी अवसर दिया है। 

लेख में कहा गया है कि, 'आगे चलकर पूंजी बफर बनाना और नकदी का प्रबंधन करना एमएफआई की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होगा।' लेख में कोविड-19 को लंबे समय में सबसे बड़ा जोखिम करार दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आपूर्ति श्रृंखला तथा कारोबारी परिचालन में बाधा से आजीविका के नुकसान की संभावना काफी अधिक है। इससे अंतत: परिवारों की आय घटेगी। 

इसमें कहा गया है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी सूक्ष्म वित्त संस्थान (एनबीएफसी-एमएफआई) कम आय वर्ग के समूहों को बिना गारंटी वाला ऋण प्रदान करते हैं। इस परिदृश्य में उनके ऋण का जोखिम बढ़ेगा। लेख में कहा गया है कि कर्ज के भुगतान की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है, जिससे एमएफआई के समक्ष नकदी का जोखिम पैदा हो गया है। इसके अलावा एनबीएफसी-एमएफआई की क्रेडिट रेटिंग के भी नीचे आने की आशंका बनती है। ऐसे में उनकी नई पूंजी जुटाने की क्षमता प्रभावित होगी।
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