MPC: आज से शुरू RBI की बैठक, क्या इस बार मिलेगा सस्ते लोन का तोहफा?
आज से शुरू हुई आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक का फैसला आठ अक्तूबर को सामने आएगा। कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच केंद्रीय बैंक द्वैमासिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रख सकता है।
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक आज से शुरू हो गई है और आठ अक्तूबर को इसके नतीजों की घोषणा की जाएगी। हर दो महीने में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक होती है। इस बैठक में अर्थव्यवस्था में सुधार पर चर्चा की जाती है और साथ ही ब्याज दरों का फैसला लिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 की तीसरी लहर और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं के बीच केंद्रीय की शुक्रवार को घोषित की जाने वाली द्वैमासिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दर को वर्तमान स्तर पर ही बनाए रख सकता है।
विशेषज्ञों का दावा- केंद्रीय बैंक पर महंगाई को काबू में रखने का दबाव
मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि आरबीआई आगामी बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने के साथ अपने नरम रुख को भी जारी रखेगा। चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई पांच फीसदी के आसपास रहेगी। एसबीआई चेयरमैन दिनेश खारा ने हाल ही में ब्याज दरों के यथावत रहने का अनुमान जताया था।
लगातार आठवीं बार ब्याज दरें स्थिर रहने का अनुमान
केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति नीतिगत दरों पर फैसला लेती है। आठ अगस्त को हुई पिछली बैठक में केंद्रीय बैंक ने लगातार सातवीं बार रेपो रेट को चार फीसदी पर बरकरार था। यानी ग्राहकों को ईएमआई या लोन की ब्याज दरों पर राहत नहीं मिली थी। मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट भी 4.25 फीसदी पर स्थिर है। रिवर्स रेपो रेट को भी 3.35 फीसदी पर स्थिर रखा गया। इसके साथ ही बैंक रेट में भी कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया था। यह 4.25 फीसदी पर है।
वहीं डेलॉय इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि आरबीआई पर अपने रुख में बदलाव का दबाव है क्योंकि कुछ औद्योगिक देशों में मौद्रिक नीति की वजह से महंगाई बढ़ रही है।